ममता बनर्जी को बड़ा झटका, TMC सांसद काकोली घोष ने पार्टी पदों से दिया इस्तीफा

महिला विंग की अध्यक्ष समेत कई जिम्मेदारियां छोड़ीं, बोलीं- ‘अंतरात्मा झकझोर देने वाली घटनाएं हुईं’

TMC MP Kakoli Ghosh Resigns: तृणमूल कांग्रेस सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने राशन वितरण, शिक्षक भर्ती भ्रष्टाचार और पार्टी नेतृत्व से असंतोष का हवाला दिया।

कोलकाता। ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बुधवार को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया।

काकोली घोष दस्तीदार ने महिला तृणमूल कांग्रेस विंग की अध्यक्ष समेत अन्य संगठनात्मक जिम्मेदारियों से इस्तीफा दिया है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सांसद के रूप में अपना कार्य जारी रखेंगी।

‘गहरे मानसिक द्वंद्व’ के बाद लिया फैसला

सांसद ने कहा कि उन्होंने “गहरे मानसिक द्वंद्व और लंबे विचार-विमर्श” के बाद यह निर्णय लिया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व के प्रति सार्वजनिक रूप से नाराजगी भी जाहिर की।

काकोली घोष दस्तीदार ने अपने बयान में कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान एक अन्य शिक्षित महिला सांसद के कथित अनुचित व्यवहार को रोका नहीं जा सका और उन्हें शीर्ष नेतृत्व से अपेक्षित सहयोग या सहानुभूति भी नहीं मिली।

उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में पद पर बने रहने का अब कोई औचित्य नहीं रह गया था।

भ्रष्टाचार के आरोपों का भी किया जिक्र

अपने बयान में काकोली घोष दस्तीदार ने पश्चिम बंगाल में पिछले एक दशक के दौरान सामने आए विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि राशन वितरण घोटाला, शिक्षक भर्ती भ्रष्टाचार और अन्य वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं ने उनकी अंतरात्मा को गहराई से प्रभावित किया है।

सांसद के अनुसार, इन घटनाओं के कारण आम जनता के बीच सरकार और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है तथा लोगों के मन में अविश्वास बढ़ा है।

मुख्य सचेतक पद से हटाए जाने के बाद बढ़ी नाराजगी

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, काकोली घोष दस्तीदार की नाराजगी उस समय और बढ़ गई थी जब उन्हें संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से हटाया गया। इसके बाद से पार्टी नेतृत्व और उनके बीच दूरी बढ़ने की चर्चा चल रही थी।

बंगाल की राजनीति में बढ़ सकती है हलचल

काकोली घोष दस्तीदार के इस्तीफे को पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की चर्चाएं और तेज हो सकती हैं।

हालांकि अभी तक पार्टी नेतृत्व की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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