तृणमूल के बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी में विलय का किया ऐलान

लोकसभा अध्यक्ष से अलग बैठने की मांग, NDA को समर्थन देने का दावा; ममता खेमे ने उठाए कानूनी सवाल

TMC Rebel MPs Merger News: तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी में विलय का ऐलान कर दिया है। काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि टीएमसी के दो-तिहाई सांसद उनके साथ हैं। बागी गुट ने NDA को समर्थन देने और लोकसभा में अलग पहचान की मांग की है।

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी राजनीतिक संकट रविवार को उस समय और गहरा गया, जब पार्टी के बागी सांसदों ने अपने गुट के नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी (NCP) में विलय की घोषणा कर दी। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का भी ऐलान किया।

इस घटनाक्रम ने न केवल टीएमसी की आंतरिक राजनीति में हलचल बढ़ा दी है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है।

लोकसभा अध्यक्ष से की अलग पहचान की मांग

बागी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को ओम बिरला से मुलाकात की और सदन में अपने लिए अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की। मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि टीएमसी के दो-तिहाई लोकसभा सांसद उनके साथ हैं।

उन्होंने कहा कि बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर अलग समूह के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया है। काकोली घोष ने यह भी कहा कि उनका गुट नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी में विलय करेगा और एनडीए को समर्थन देगा।

सुदीप बंदोपाध्याय ने किया विलय का दावा

टीएमसी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने दावा किया कि असंतुष्ट गुट का नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी में विलय पहले ही हो चुका है। उन्होंने इस पार्टी को त्रिपुरा की एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी बताया।

सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि अब यह कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया का विषय है कि “असली टीएमसी” किसे माना जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बागी गुट पार्टी के चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ पर भी अपना दावा पेश करेगा।

ममता खेमे ने जताई आपत्ति

दूसरी ओर, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी खेमे ने इस कदम का विरोध किया है। पार्टी नेताओं कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने भी रविवार को लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की।

उन्होंने टीएमसी लोकसभा संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी द्वारा लिखा गया पत्र सौंपा, जिसमें किसी भी कथित अलग गुट को मान्यता न देने का आग्रह किया गया है।

दलबदल कानून का दिया हवाला

अभिषेक बनर्जी के पत्र में तर्क दिया गया है कि संविधान और दलबदल विरोधी कानून किसी मौजूदा राजनीतिक दल के भीतर अलग संसदीय समूह बनाने की अनुमति नहीं देते। पत्र में कहा गया है कि इस प्रकार का विभाजन कानून की भावना के विपरीत है और इसे मान्यता नहीं दी जानी चाहिए।

बताया गया कि यह पत्र पहले ईमेल के माध्यम से भी लोकसभा अध्यक्ष को भेजा जा चुका था।

राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बागी गुट को औपचारिक मान्यता मिलती है और उसका एनडीए को समर्थन जारी रहता है, तो संसद में सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति और मजबूत हो सकती है। वहीं पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

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