“UP Birth Death Certificate Rules: उत्तर प्रदेश सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब देरी से रजिस्ट्रेशन कराने पर ज्यादा शुल्क देना होगा। जानें नए नियम, जुर्माना और नाम सुधार से जुड़ी पूरी जानकारी।“
उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश सरकार ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रेशन देरी से कराने पर लोगों को पहले की तुलना में अधिक शुल्क देना होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
सरकार ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम-1969 की नियमावली में संशोधन करते हुए विलंब शुल्क, नाम जोड़ने, त्रुटि सुधार और डुप्लीकेट प्रमाण पत्र से जुड़े नियमों में बदलाव किया है।
देरी से रजिस्ट्रेशन कराने पर कितना लगेगा शुल्क?
नए नियमों के अनुसार अब जन्म या मृत्यु का पंजीकरण तय समय सीमा के बाद कराने पर ज्यादा शुल्क देना होगा।
नए शुल्क इस प्रकार हैं:
| पंजीकरण अवधि | पुराना शुल्क | नया शुल्क |
|---|---|---|
| 21 से 30 दिन के अंदर | 2 रुपये | 20 रुपये |
| 30 दिन से 1 वर्ष के अंदर | 5 रुपये | 50 रुपये |
| 1 वर्ष के बाद | 10 रुपये | 100 रुपये |
सरकार ने साफ किया है कि एक वर्ष से अधिक देरी होने पर पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट या एसडीएम की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
नामकरण और त्रुटि सुधार के नियम भी बदले
यदि जन्म के समय बच्चे का पंजीकरण हो गया है लेकिन नाम दर्ज नहीं कराया गया, तो अब माता-पिता को 12 महीने के भीतर रजिस्ट्रार को इसकी सूचना देनी होगी।
यदि 12 महीने से 15 वर्ष के भीतर नाम जोड़ने का आवेदन किया जाता है तो उस पर भी निर्धारित अर्थदंड लगाया जाएगा।
इसके अलावा प्रमाण पत्र में किसी प्रकार की गलती होने पर जिला रजिस्ट्रार को आवेदन देकर सुधार कराया जा सकेगा।
डुप्लीकेट प्रमाण पत्र भी हुआ महंगा
जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र खो जाने पर डुप्लीकेट कॉपी के लिए भी शुल्क बढ़ा दिया गया है।
- पहले एक वर्ष के भीतर आवेदन पर 2 रुपये शुल्क था, जिसे बढ़ाकर 20 रुपये कर दिया गया है।
- प्रत्येक अतिरिक्त वर्ष के लिए भी 20 रुपये शुल्क तय किया गया है।
- हर जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रति के लिए अब 50 रुपये शुल्क देना होगा, जो पहले 5 रुपये था।
क्यों किया गया बदलाव?
केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम में संशोधन किया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने अगस्त 2023 में नई नियमावली तैयार की थी। अब उसी नियमावली में संशोधन कर नए शुल्क और प्रक्रियाएं लागू की गई हैं।
सरकार का कहना है कि इससे रिकॉर्ड प्रबंधन और पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।
प्रदेश में इतनी इकाइयां करती हैं पंजीकरण
प्रदेश के 75 जिलों में जन्म-मृत्यु पंजीकरण का काम स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज विभाग और स्थानीय निकायों के माध्यम से संचालित होता है।
राज्य में कुल 85,618 इकाइयां जन्म और मृत्यु पंजीकरण का कार्य करती हैं, जिनमें ग्राम पंचायतें, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और सरकारी चिकित्सा इकाइयां शामिल हैं।
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