यूपी में भ्रष्ट और अयोग्य चकबंदी अधिकारियों पर गिरेगी गाज, अनिवार्य सेवानिवृत्ति की तैयारी शुरू

लंबित मामलों के निस्तारण में लापरवाही पर सरकार सख्त; 50 वर्ष की आयु और 30 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके अधिकारियों की होगी स्क्रीनिंग

UP Chakbandi Departments: उत्तर प्रदेश में चकबंदी कार्यों में तेजी लाने के लिए भ्रष्ट और अयोग्य चकबंदी अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की तैयारी शुरू हो गई है। चकबंदी आयुक्त ने स्क्रीनिंग समिति गठित कर 50 वर्ष से अधिक आयु और 30 वर्ष सेवा पूरी कर चुके अधिकारियों की सूची मांगी है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चकबंदी कार्यों में तेजी लाने और वर्षों से लंबित मामलों के निस्तारण को लेकर योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। चकबंदी विभाग ने भ्रष्ट और अयोग्य अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए विभागीय स्तर पर स्क्रीनिंग की तैयारी शुरू हो गई है।

चकबंदी आयुक्त डा. हृषिकेश भास्कर यशोद ने चार सदस्यीय स्क्रीनिंग समिति का गठन करते हुए सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि 15 दिनों के भीतर ऐसे अधिकारियों की सूची उपलब्ध कराई जाए, जिन्होंने 50 वर्ष की आयु पूरी कर ली है और 30 वर्ष की सेवा भी पूरी कर चुके हैं।

योगी सरकार के निर्देश के बाद तेज हुई कार्रवाई

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 22 मई को चकबंदी से जुड़े लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को तत्काल निस्तारण और कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद विभाग ने जवाबदेही तय करने और कार्यप्रणाली में सुधार के लिए यह कार्रवाई शुरू की है।

सरकार का मानना है कि वर्षों से लंबित चकबंदी मामलों के पीछे कुछ अधिकारियों की लापरवाही, अयोग्यता और भ्रष्टाचार भी प्रमुख कारण रहे हैं। ऐसे में प्रशासनिक सुधार के लिए कठोर कदम आवश्यक हैं।

7955 मामले अब भी लंबित

चकबंदी विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में वर्तमान समय में चकबंदी से संबंधित 7,955 वाद लंबित हैं। कई मामलों में वर्षों से सुनवाई और निस्तारण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

विभागीय अधिकारियों को कई बार चेतावनी और निर्देश दिए जाने के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसी के चलते अब अनिवार्य सेवानिवृत्ति का विकल्प अपनाने की तैयारी की जा रही है।

चार सदस्यीय स्क्रीनिंग समिति करेगी समीक्षा

चकबंदी आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति में अपर आयुक्त चकबंदी, वित्त नियंत्रक और उप संचालक चकबंदी को सदस्य बनाया गया है। यह समिति जिलाधिकारियों द्वारा भेजी गई सूची की समीक्षा करेगी और इसी माह अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

समिति अधिकारियों की कार्यशैली, लंबित मामलों के निस्तारण, शिकायतों और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर मूल्यांकन करेगी।

FR-56 के तहत होगी अनिवार्य सेवानिवृत्ति

स्क्रीनिंग रिपोर्ट के आधार पर चयनित अधिकारियों को पहले तीन महीने का नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद Fundamental Rules-56 (FR-56) के तहत जनहित में अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकेगी।

यह वही प्रावधान है जिसके तहत सरकार ऐसे कर्मचारियों को सेवा से हटाने का अधिकार रखती है, जिनकी कार्यक्षमता या ईमानदारी पर गंभीर सवाल हों और जिनका सेवा में बने रहना जनहित में उचित न माना जाए।

दशकों पुराने मामलों के निस्तारण से बढ़ा विभाग का मनोबल

पिछले माह विभाग ने कई पुराने मामलों का समाधान कर बड़ी उपलब्धि हासिल की थी। इनमें:

  • कन्नौज के अकबरपुर गांव में 45 वर्षों से लंबित चकबंदी प्रक्रिया,
  • बिजनौर के कस्बा झालू का पुराना मामला,
  • सहारनपुर के डालामाजरा गांव में 37 वर्षों से लंबित प्रक्रिया,
  • प्रयागराज के राजेपुर मय सराय अरजानी गांव में 34 वर्षों से लंबित चकबंदी कार्य

का निस्तारण किया गया था।

इन मामलों के समाधान के बाद सरकार अब शेष लंबित मामलों को भी तेजी से समाप्त करने की रणनीति पर काम कर रही है।

पक्षपात करने वाले अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई

चकबंदी आयुक्त ने जिलाधिकारियों और बंदोबस्त अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भ्रष्ट और अयोग्य अधिकारियों की सूची तैयार करने में किसी प्रकार का पक्षपात या भेदभाव न किया जाए।

उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि स्क्रीनिंग प्रक्रिया में किसी प्रकार की पक्षधरता या तथ्य छिपाने का मामला सामने आता है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

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