“उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट गहराने पर राजनीति तेज हो गई है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्मार्ट मीटर भ्रष्टाचार और बिजली कटौती को लेकर सरकार पर हमला बोला, जबकि ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने पलटवार करते हुए लखनऊ के 31 संवेदनशील उपकेंद्रों पर PAC तैनाती का ऐलान किया।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच गहराए बिजली संकट को लेकर सियासत तेज हो गई है। राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई जिलों में अघोषित बिजली कटौती, लो वोल्टेज और ट्रांसफार्मर फुंकने की घटनाओं से लोग परेशान हैं। इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा तो ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने तीखा पलटवार किया है।
बिजली संकट को देखते हुए प्रशासन ने लखनऊ के 31 संवेदनशील बिजली उपकेंद्रों पर पीएसी तैनात कर दी है। चिनहट, उतरेटिया, राजाजीपुरम और दुबग्गा समेत कई इलाकों को संवेदनशील घोषित किया गया है।

अखिलेश यादव ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर जारी एक पत्र में भाजपा सरकार पर बिजली व्यवस्था पूरी तरह फेल होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चल रहा बिजली संकट सरकार की गलत नीतियों का परिणाम है।
अखिलेश ने जनता से अपील करते हुए कहा कि बिजली विभाग के लाइनमैन और कनिष्ठ कर्मचारियों पर गुस्सा न निकाला जाए, क्योंकि संविदा कर्मचारियों की छंटनी के बाद वे सीमित संसाधनों में काम कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बिजली की बढ़ती मांग के मुताबिक नए पावर प्लांट नहीं लगाए और न ही ट्रांसमिशन व डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को मजबूत किया। सपा प्रमुख ने स्मार्ट मीटर योजना में भ्रष्टाचार का आरोप भी लगाया।
“आईना पहले खुद देखो” : ऊर्जा मंत्री का पलटवार
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने अखिलेश यादव के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष जानबूझकर प्रदेश की व्यवस्था को कमजोर दिखाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “आईना जब भी उठाया करो, पहले खुद का चेहरा देखा करो।”
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों ने बिजली व्यवस्था को बदहाल छोड़ा था, जिसे वर्तमान सरकार सुधारने में लगी है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश आज देश में सबसे अधिक पीक बिजली आपूर्ति करने वाला राज्य बन चुका है।

गाजियाबाद के दो अधिशासी अभियंता निलंबित
बिजली संकट के बीच ऊर्जा मंत्री खुद देर रात विभिन्न उपकेंद्रों और फीडरों का निरीक्षण करने पहुंचे। निरीक्षण के दौरान लापरवाही पाए जाने पर गाजियाबाद के दो अधिशासी अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
सरकार ने बिजली व्यवस्था की निगरानी के लिए अधिकारियों को फील्ड में उतरने के निर्देश दिए हैं। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्य अभियंता और निदेशक भी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
45 डिग्री तापमान में बेहाल जनता
प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। कई शहरों में 4 से 8 घंटे तक बिजली कटौती होने से लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। कूलर और एसी बंद होने से पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। अस्पतालों में भर्ती मरीजों और बुजुर्गों की परेशानी बढ़ गई है।
बिजली विभाग का कहना है कि भीषण गर्मी के कारण अचानक बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर दिक्कतें आ रही हैं।
सरकार ने गिनाईं उपलब्धियां
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने दावा किया कि 2017 के मुकाबले प्रदेश में बिजली व्यवस्था में बड़े स्तर पर सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि:
- 2017 में प्रदेश की औसत पीक डिमांड 13 हजार मेगावाट थी, जो अब 30 हजार मेगावाट तक पहुंच गई है।
- बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 1.80 करोड़ से बढ़कर 3.70 करोड़ हो गई है।
- प्रदेश में 1.70 लाख से अधिक मजरों का विद्युतीकरण किया गया।
- तापीय बिजली उत्पादन 5160 मेगावाट से बढ़कर 9120 मेगावाट तक पहुंच गया।
- ट्रांसमिशन क्षमता 39 हजार MVA से बढ़कर दो लाख MVA तक पहुंच चुकी है।
- जर्जर तार और लाखों बिजली खंभों को बदला गया है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सरकार नई बिजली परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रही है और भीषण गर्मी के बावजूद विद्युत कर्मी लगातार व्यवस्था संभालने में जुटे हैं।
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