युद्ध के कारण कानपुर टेक्सटाइल उद्योग प्रभावित, ईद से पहले बाजार में चिंता

Iran Israel War Impact on Kanpur Textile Market: “मध्य पूर्व में जारी Iran–Israel conflict का असर अब Kanpur के कपड़ा बाजार पर दिखने लगा है। सूरत से माल की सप्लाई धीमी हो गई है और यार्न के दाम 15% तक बढ़ गए हैं, जिससे ईद बाजार प्रभावित होने की आशंका है।

कानपुर। मध्य-पूर्व में जारी ईरान–इजराइल युद्ध का असर अब भारत के टेक्सटाइल सेक्टर तक पहुंचने लगा है। कानपुर के कपड़ा बाजार में कच्चे माल की कीमतों में तेजी और आपूर्ति में देरी से कारोबार प्रभावित होने लगा है। व्यापारियों को आशंका है कि इसका असर आगामी ईद के बाजार पर भी पड़ सकता है।

सूरत से डिलीवरी में देरी

व्यापारियों के अनुसार सूरत से आने वाले पुराने ऑर्डरों की डिलीवरी धीमी हो गई है। वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण कई फैक्ट्रियों से माल समय पर नहीं पहुंच पा रहा है। कुछ इकाइयों ने उत्पादन धीमा या बंद करने की भी सूचना दी है।

यार्न के दामों में 15% तक उछाल

होजरी और गारमेंट कारोबारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में यार्न की कीमतों में करीब 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है। सूती धागे के दाम में तीन-चार रुपये प्रति किलो और प्लास्टिक धागे में करीब 20 रुपये प्रति किलो तक वृद्धि दर्ज की गई है। इससे फैब्रिक उत्पादन की लागत बढ़ गई है और छोटे-मध्यम पावरलूम पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

1500 से अधिक इकाइयों पर असर

कानपुर में गारमेंट और होजरी का बड़ा नेटवर्क है। शहर के दादानगर, पनकी, फजलगंज और जाजमऊ जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 1500-2000 छोटी-बड़ी इकाइयां संचालित हैं, जिनमें हजारों कारीगर काम करते हैं। वहीं रूमा क्षेत्र में 50-60 बड़ी इकाइयां सीधे धागा और कपड़ा उत्पादन से जुड़ी हैं।

3000–4000 करोड़ का कारोबार

कपड़ा व परिधान क्षेत्र का शहर में अनुमानित वार्षिक कारोबार 3000 से 4000 करोड़ रुपये के बीच है और कुल निर्यात में इसका हिस्सा करीब 15-20 प्रतिशत है। उद्योग से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि पिछले एक साल से बाजार पहले ही दबाव में था, ऐसे में युद्ध के कारण कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी से स्थिति और कठिन हो सकती है।

व्यापारियों के मुताबिक अगर आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो ईद के कपड़ा बाजार में नई डिजाइन और स्टॉक की कमी देखने को मिल सकती है।

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