“उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश के बाद घाघरा नदी कई जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। अवध क्षेत्र के कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बाराबंकी, बहराइच और गोंडा में प्रशासन अलर्ट पर है, वहीं बुंदेलखंड में बारिश और बिजली गिरने से तीन लोगों की मौत हुई है।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। अवध क्षेत्र में घाघरा नदी कई स्थानों पर खतरे के निशान को पार कर चुकी है, जिससे तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा गहरा गया है। बाराबंकी, बहराइच और गोंडा समेत कई जिलों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।
घाघरा के अलावा शारदा और राप्ती नदियां भी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई हैं। निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की तैयारी करने को कहा गया है।
बाराबंकी में घाघरा लाल निशान के ऊपर
बाराबंकी में घाघरा (सरयू) नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। गुरुवार को एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर 106.110 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 106.070 मीटर है।
नदी खतरे के निशान से करीब चार सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। इससे रामसनेही घाट, रामनगर और सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के तटीय गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
हर साल इन क्षेत्रों के करीब 119 गांव बाढ़ से प्रभावित होते हैं। इस बार अब तक करीब 32 गांवों में पानी पहुंच चुका है, जिससे ग्रामीणों ने पलायन की तैयारी शुरू कर दी है।
बहराइच और गोंडा में भी बढ़ा खतरा
बहराइच में एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से पांच सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया है। पिछले 24 घंटे में नदी के जलस्तर में करीब 22 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है।
हालांकि प्रशासन ने अभी बड़े स्तर पर बाढ़ की स्थिति से इनकार किया है, लेकिन लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है।
वहीं गोंडा में भी घाघरा नदी खतरे के निशान से करीब आठ सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। नवाबगंज क्षेत्र में नदी कटान तेज होने से कई संरचनाएं नदी में समा गई हैं।
सीतापुर और श्रावस्ती में नदियां उफान पर
सीतापुर में घाघरा (सरयू) और शारदा नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई हैं। रामपुर मथुरा क्षेत्र के करीब 20 गांवों में पानी जमा होने लगा है।
मिश्रणपुरवा, अंगरौरा और सोतीपुरवा जैसे गांवों में जलभराव की स्थिति बनने लगी है।
श्रावस्ती में राप्ती नदी अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही है। राप्ती बैराज पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान 127.70 मीटर से करीब 90 सेंटीमीटर नीचे 126.80 मीटर दर्ज किया गया है।
नरौरा और हरिद्वार से छोड़े गए पानी से बढ़ी चिंता
गंगा और अन्य नदियों के जलस्तर को लेकर भी प्रशासन सतर्क है। नरौरा बांध से करीब 55 हजार क्यूसेक और हरिद्वार से 70 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
कानपुर में गंगा नदी का जलस्तर एक दिन में करीब 32 सेंटीमीटर बढ़ा है, हालांकि अभी स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
रुहेलखंड में फिलहाल राहत
पीलीभीत में शारदा, बदायूं में गंगा, शाहजहांपुर में गर्रा और बरेली में रामगंगा नदी अभी खतरे के निशान से नीचे हैं।
अमरोहा और संभल में भी गंगा का जलस्तर नियंत्रण में है, हालांकि स्थानीय बारिश के कारण पानी बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
फर्रुखाबाद में गंगा नदी चेतावनी बिंदु 136 मीटर के करीब पहुंच गई है।
बुंदेलखंड में बारिश और बिजली गिरने से तीन मौतें
दूसरी ओर बुंदेलखंड क्षेत्र में तेज बारिश और आकाशीय बिजली गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई। कई स्थानों पर जनहानि और नुकसान की घटनाएं सामने आई हैं।
ललितपुर में बुधवार रात हुई भारी बारिश के कारण एक कच्चा मकान गिर गया। मलबे में दबने से कमरे में सो रही वृद्ध महिला की मौत हो गई।
हमीरपुर में खेत में काम करने के दौरान बिजली गिरने से एक मजदूर की जान चली गई, जबकि खेत मालिक समेत दो लोग झुलस गए।
इटावा में धान की रोपाई कर रही एक बालिका पर बिजली गिर गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
बाढ़ की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और आपदा प्रबंधन टीमें अलर्ट पर हैं। नदी किनारे बसे गांवों में निगरानी बढ़ा दी गई है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में बारिश जारी रहने पर नदियों के जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है, जिससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
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