अयोध्या राम मंदिर में रामलला की श्रृंगार आरती का बदला स्वरूप, कृष्णजन्मोत्सव से बढ़ा आकर्षण

अयोध्या राम मंदिर में कृष्णजन्मोत्सव से रामलला की श्रृंगार आरती का स्वरूप बदला गया है। चार अतिरिक्त अर्चक गर्भगृह के बाहर आरती करते हैं। एकादशी पर 56 प्रकार के फलाहारी व्यंजनों का छप्पन भोग लगाया गया।

अयोध्या। भव्य राम मंदिर में रामलला की नियमित पूजा-अर्चना के साथ अब श्रृंगार आरती का स्वरूप भी और आकर्षक हो गया है। कृष्णजन्मोत्सव से मंदिर में श्रृंगार आरती की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब गर्भगृह के भीतर अर्चकों की ओर से होने वाली आरती के साथ चार अतिरिक्त अर्चक गर्भगृह के सम्मुख खड़े होकर भी आरती करते हैं। इससे रामलला की श्रृंगार आरती का दृश्य पहले की अपेक्षा अधिक भव्य और आकर्षक नजर आता है।

गर्भगृह के बाहर से चार अर्चक करते हैं आरती

नई व्यवस्था के तहत रामलला की श्रृंगार आरती के दौरान चार अतिरिक्त अर्चक गर्भगृह के बाहर निर्धारित स्थान पर खड़े होकर भगवान की आरती करते हैं। इससे श्रद्धालुओं को आरती का भव्य स्वरूप देखने का अवसर मिलता है। आरती के दौरान भगवान के समक्ष पदों का गायन किया जाता है। इसके साथ ही घंटियों और बड़े-बड़े घंटा-घड़ियाल की ध्वनि से मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

अब तक रामलला की आरती मुख्य रूप से गर्भगृह के भीतर से ही अर्चकों द्वारा की जाती थी। कृष्णजन्मोत्सव के अवसर से इसमें नया स्वरूप जोड़ा गया है। मंदिर की पूजा पद्धति को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था फिलहाल श्रृंगार आरती के लिए लागू की गई है।

आगे मध्याह्न और शयन आरती भी होगी भव्य

पूजा पद्धति के प्रमुख आचार्य इंद्रदेव के अनुसार, फिलहाल नई शैली में केवल श्रृंगार आरती की जा रही है। आने वाले समय में इसी प्रकार मध्याह्न आरती और शयन आरती को भी सज्जित किए जाने की योजना है। इस बदलाव के बाद रामलला की विभिन्न आरतियों में भी भक्तिमय वातावरण और भव्यता और बढ़ने की उम्मीद है।

मंदिर में आरती की व्यवस्था को लेकर समय-समय पर बदलाव किए जाते रहे हैं, ताकि निर्धारित पूजा पद्धति के अनुरूप धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के साथ श्रद्धालुओं को भी बेहतर आध्यात्मिक अनुभव मिल सके।

एकादशी पर रामलला को लगा फलाहारी छप्पन भोग

इसी क्रम में सोमवार को एकादशी के अवसर पर रामलला को विशेष फलाहारी भोग भी लगाया गया। एकादशी के व्रत को देखते हुए भगवान के लिए फलाहार से तैयार विभिन्न प्रकार के व्यंजन, मिष्ठान और फलों की व्यवस्था की गई। मध्याह्न आरती से पहले भगवान को 56 प्रकार के फलाहारी व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया।

भोग की थाल में कूटी के आटे से तैयार पकौड़ी और पूड़ी के साथ मखाना, ड्राई फ्रूट सहित विभिन्न फलाहारी सामग्री शामिल रही। कुल 56 प्रकार के व्यंजनों को भगवान के समक्ष अर्पित कर विधि-विधान से भोग लगाया गया। इसके बाद प्रसाद का वितरण भी किया गया।

पूजा परंपरा के साथ बढ़ रही मंदिर की भव्यता

राम मंदिर में रामलला की पूजा-अर्चना और आरती की परंपरा को निर्धारित धार्मिक पद्धति के अनुसार आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं, विशेष अवसरों और पर्वों पर पूजा-अनुष्ठानों को अधिक भव्य रूप दिया जाता है। कृष्णजन्मोत्सव से शुरू हुई श्रृंगार आरती की नई व्यवस्था भी इसी कड़ी का हिस्सा है।

रामलला की आरती के दौरान पदों का गायन, घंटियों और घंटा-घड़ियाल की ध्वनि तथा अर्चकों की सामूहिक आरती से मंदिर परिसर में विशेष आध्यात्मिक वातावरण बन रहा है। आने वाले समय में मध्याह्न और शयन आरती में भी इसी प्रकार की व्यवस्था लागू होने के बाद राम मंदिर की दैनिक पूजा व्यवस्था में एक और आकर्षक अध्याय जुड़ जाएगा।

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