“मुरादाबाद के मैनाठेर कांड में तीन दोषियों ने खुद को नाबालिग बताकर कोर्ट को गुमराह किया, लेकिन जांच में वे बालिग निकले। कोर्ट ने 16 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।“
मुरादाबाद। मुरादाबाद के चर्चित मैनाठेर कांड में कोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है। इस मामले में 16 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। खास बात यह रही कि इनमें से तीन दोषियों ने खुद को नाबालिग बताकर पुलिस और अदालत को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जांच में उनका दावा झूठा साबित हुआ।
जानकारी के अनुसार, दो सगे भाई समेत तीन आरोपियों ने उम्र से जुड़े दस्तावेज पेश कर खुद को नाबालिग बताया था, जिसके चलते उनकी फाइल किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई थी। हालांकि कोर्ट के आदेश पर जब दस्तावेजों की जांच और मेडिकल परीक्षण कराया गया, तो सभी आरोपी बालिग पाए गए और दस्तावेज फर्जी निकले।
इसके बाद तीनों की फाइल वापस सत्र न्यायालय में भेजी गई और अन्य आरोपियों के साथ सुनवाई करते हुए अदालत ने उन्हें भी उम्रकैद की सजा सुनाई।
क्या था पूरा मामला?
यह घटना 6 जुलाई 2011 की है, जब मैनाठेर क्षेत्र के असालतनगर बघा गांव में बवाल की सूचना पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों पर भीड़ ने हमला कर दिया था। उस दौरान डीआईजी और उनके पीआरओ पर हमला किया गया, उनकी पिस्टल छीन ली गई और मोबाइल लूट लिया गया।
इस मामले में पुलिस ने 33 नामजद और कुछ अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। जांच के बाद 25 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई, जिन पर हत्या के प्रयास, लूट, आगजनी, सरकारी संपत्ति को नुकसान और सरकारी कर्मचारियों पर हमला जैसी गंभीर धाराएं लगाई गईं।
कोर्ट का फैसला
अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद 16 दोषियों को आजीवन कारावास और प्रत्येक पर 55 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
नाबालिग आरोपियों पर अलग सुनवाई
इस केस में शामिल छह अन्य नाबालिग आरोपियों की सुनवाई अभी किशोर न्याय बोर्ड में चल रही है। दोनों पक्षों की बहस पूरी हो चुकी है और जल्द ही इस पर भी फैसला आने की उम्मीद है।
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