“मिर्जापुर पीपा पुल टूटा: मिर्जापुर में 2.45 करोड़ की लागत से बना गंगा नदी का पीपा पुल उद्घाटन के 14 दिन बाद ही टूट गया। मझवां विधायक शुचिस्मिता मौर्य ने किया था लोकार्पण।“
मिर्जापुर। मिर्जापुर जिले में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। गंगा नदी पर बना पीपा पुल उद्घाटन के महज 14 दिन बाद ही तेज बहाव और आंधी की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गया।
इस पुल का लोकार्पण सुचिस्मिता मौर्य ने 21 मार्च को किया था। करीब 2 करोड़ 45 लाख रुपये की लागत से बना यह पुल एक भी तेज मौसम का सामना नहीं कर सका।
गंगा पर बना था महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग
यह पीपा पुल नेवढ़िया घाट से गेगराव घाट को जोड़ता था, जिससे मिर्जापुर सिटी, मझवां ब्लॉक और भदोही के महाराजगंज क्षेत्र के कई गांवों के लोगों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिल रही थी।
करीब 700 मीटर लंबे इस पुल के शुरू होने से स्थानीय लोगों को लंबा चक्कर लगाने से राहत मिली थी, लेकिन अब इसके टूटने से फिर से परेशानी बढ़ गई है।
तेज आंधी और बढ़े जलस्तर से हुआ नुकसान
लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिशासी अभियंता के अनुसार 3 अप्रैल को आई तेज आंधी और गंगा के जलस्तर में वृद्धि के कारण पुल का किनारा खिसक गया, जिससे संरचना को नुकसान पहुंचा।
विभाग ने बताया कि मरम्मत कार्य जारी है और 6 अप्रैल तक आवागमन बहाल करने का प्रयास किया जाएगा।
दो दिन में दूसरा मामला, बढ़ी चिंता
चौंकाने वाली बात यह है कि मिर्जापुर में यह दूसरा मामला है, जब हाल ही में उद्घाटन किए गए पीपा पुल इतने कम समय में क्षतिग्रस्त हो गए।
दो दिन पहले ही सदर विधायक रत्नाकर मिश्रा द्वारा उद्घाटित एक अन्य पीपा पुल भी 15 दिन के भीतर टूट गया था।
लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, लोगों में आक्रोश
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पुल का हिस्सा बहता हुआ दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों ने इस पर नाराजगी जताते हुए जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
लोकार्पण के समय किए गए थे बड़े दावे
लोकार्पण के दौरान विधायक सुचिस्मिता मौर्य ने कहा था कि यह पुल क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही मांग थी और इससे हजारों लोगों को लाभ मिलेगा।
लेकिन उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद पुल का क्षतिग्रस्त होना इन दावों पर सवाल खड़ा कर रहा है।
जांच और जवाबदेही की मांग तेज
लगातार दो पीपा पुलों के टूटने से अब स्थानीय स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते गुणवत्ता की जांच नहीं की गई, तो भविष्य में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं।
मिर्जापुर में पीपा पुलों के बार-बार टूटने की घटनाएं न सिर्फ निर्माण व्यवस्था की खामियों को उजागर करती हैं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
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