संसद में पप्पू यादव का बड़ा बयान: “नेताओं को पोर्न देखने की आदत”, सदन में हंगामा

महिला आरक्षण और परिसीमन पर बहस के बीच सांसद के आरोपों से सदन में हंगामा

संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर चर्चा के दौरान पप्पू यादव ने नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए। पोर्न देखने और यौन शोषण के मामलों को लेकर दिए बयान से सदन में हंगामा मच गया। जानिए पूरा मामला।

पटना/नई दिल्ली। संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर जारी चर्चा के दौरान पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने बेहद विवादित और तीखा बयान दिया, जिससे सदन का माहौल गरमा गया। अपने संबोधन में उन्होंने राजनीतिक वर्ग पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि “सबसे ज्यादा पोर्न देखने की आदत नेताओं को है” और यौन शोषण के मामलों में भी नेता सबसे आगे हैं।

“हमाम में हम सब नंगे हैं”—सदन में गूंजे नारे

बहस के दौरान पप्पू यादव ने कहा कि देश में यौन शोषण के मामलों में पहले नंबर पर नेता, दूसरे पर बाबा और तीसरे स्थान पर अधिकारी आते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “हमाम में हम सब नंगे हैं।”

उनके इस बयान पर सदन में कई बार ‘शेम-शेम’ के नारे लगे और माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया।

सांसदों पर लगाए गंभीर आरोप

पप्पू यादव ने दावा किया कि देश के 755 सांसदों पर यौन शोषण के आरोप हैं, जिनमें से 155 मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। हालांकि इन आंकड़ों पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है।

महिला आरक्षण बिल का किया विरोध

महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करते हुए पप्पू यादव ने इसे पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ साजिश बताया। उन्होंने कहा कि आरक्षण के भीतर ओबीसी, ईबीसी, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए अलग कोटा सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन लोगों ने ऐतिहासिक रूप से महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक अधिकार नहीं दिए, वही आज आरक्षण की बात कर रहे हैं।

समाज में महिलाओं की स्थिति पर जताई चिंता

सांसद ने अपने भाषण में यह भी कहा कि सिनेमा, मीडिया और फैशन जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाओं का शोषण होता है। उन्होंने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को केवल राजनीतिक बहस तक सीमित न रखने की अपील की।

बयान से बढ़ा सियासी विवाद

पप्पू यादव के इस बयान के बाद संसद के भीतर और बाहर सियासी हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहां कुछ नेताओं ने इसे अतिशयोक्तिपूर्ण बताया, वहीं दूसरी ओर इसने राजनीतिक वर्ग की नैतिकता पर नई बहस छेड़ दी है।

“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button