“अब समझाने का वक्त नहीं” — बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा बयान, 2027-2029 चुनाव की दी चुनौती

भागलपुर में क्षत्रिय सम्मेलन से दिया संदेश—“जरूरत नहीं तो कह दो”; संगठन और सरकार पर दबाव की अटकलें तेज

“पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भागलपुर में बड़ा बयान देते हुए कहा कि 2027 या 2029 के चुनाव में अपनी ताकत दिखाएंगे। क्षत्रिय समाज की अनदेखी पर उठाए सवाल।”

भागलपुर/गोंडा।पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बिहार के भागलपुर में आयोजित बाबू वीर कुंवर सिंह विजय उत्सव के मंच से सियासी तेवर दिखाते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर किसी को लगता है कि उनकी उपयोगिता खत्म हो गई है, तो साफ कह दिया जाए—वे 2027 या 2029 के चुनाव में अपनी ताकत दिखा देंगे।

“हमारी जरूरत नहीं तो एक बार कह दो”

बृजभूषण सिंह ने कहा,
“आज सरकार की नजरों में हमारा कोई अस्तित्व नहीं है। अगर हम भार लगते हैं तो एक बार कह दो कि हमारी जरूरत नहीं। जब भी कहोगे—2027 में या 2029 में—हम दिखा देंगे कि हमारी उपयोगिता क्या है।”

उनका यह बयान सीधे तौर पर संगठन और सरकार के प्रति नाराजगी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

क्षत्रिय समाज को लेकर उठाया मुद्दा

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीति में क्षत्रिय समाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समाज ने जब-जब चुप्पी साधी, तब-तब उसे कमजोर समझा गया।

उन्होंने ऐतिहासिक हस्तियों जैसे वीर कुंवर सिंह, महाराणा प्रताप, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और बिरसा मुंडा का जिक्र करते हुए कहा कि समाज अपने महापुरुषों को उचित सम्मान दिलाने में पीछे रह गया।

संविधान और इतिहास को लेकर टिप्पणी

बृजभूषण सिंह ने संविधान निर्माण पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसका श्रेय केवल डॉ. भीमराव अंबेडकर तक सीमित करना सही नहीं है, क्योंकि संविधान सभा में कई सदस्य शामिल थे।

2023 विवाद का जिक्र

अपने खिलाफ लगे आरोपों पर उन्होंने कहा कि 2023 में उनके खिलाफ “विश्वव्यापी षड्यंत्र” हुआ, लेकिन वे झुके नहीं। उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर की कविता का हवाला देते हुए संघर्ष की बात कही और धार्मिक संदर्भों का भी उल्लेख किया।

राजनीतिक संकेत और अंदरूनी संदेश

कार्यक्रम में बाहुबली नेता धनंजय सिंह की मौजूदगी भी चर्चा में रही। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बृजभूषण सिंह का यह बयान संगठन और सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

सूत्रों का कहना है कि यूपी भाजपा में जल्द ही संगठनात्मक बदलाव और मंत्रिमंडल विस्तार संभावित है। ऐसे में बृजभूषण सिंह अपने प्रभाव को फिर से स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

टिकट कटने के बाद बदले तेवर

गौरतलब है कि 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उनका टिकट काट दिया था। तब से वे सक्रिय राजनीति में अपनी वापसी की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने यह भी कहा था कि वे 2029 का लोकसभा चुनाव जरूर लड़ेंगे—चाहे पार्टी टिकट दे या नहीं।

भागलपुर से दिया गया यह बयान सिर्फ एक भाषण नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का संकेत माना जा रहा है। बृजभूषण सिंह के तेवर आने वाले समय में उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकते हैं।

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