“शिवसेना (UBT) में संभावित टूट की अटकलों के बीच अरविंद सावंत, अनिल देसाई और संजय राउत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। पार्टी ने दलबदल विरोधी कानून का हवाला देते हुए ज्ञापन सौंपा, जबकि संजय राउत ने सांसदों को 50 करोड़ रुपये के ऑफर दिए जाने का आरोप लगाया।“
नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (यूबीटी) के भीतर संभावित टूट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और सांसदों ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर कथित दलबदल की आशंकाओं पर चिंता जताई और किसी भी गैर-कानूनी राजनीतिक कदम को मान्यता न देने की अपील की।
शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा सांसद अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने राज्यसभा सांसद संजय राउत के साथ संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पार्टी के छह से सात सांसदों के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
मुलाकात के बाद सांसद अनिल देसाई ने बताया कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को एक प्रतिनिधित्व पत्र सौंपा है। इसमें अनुरोध किया गया है कि संविधान और दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों का पूरी तरह पालन किया जाए तथा किसी भी गैर-कानूनी दलबदल को मान्यता न दी जाए।
देसाई ने कहा कि केवल सांसदों का कोई समूह दूसरी पार्टी में विलय का दावा नहीं कर सकता। नियमों के अनुसार मूल राजनीतिक दल के स्तर पर ही विलय की प्रक्रिया संभव है। उन्होंने कहा कि यदि कोई समूह दो-तिहाई सांसदों के समर्थन का दावा भी करता है तो भी उसे स्वतः मान्यता नहीं मिल सकती, क्योंकि अंतिम निर्णय कानून और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप ही लिया जाएगा।
वर्तमान में लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के कुल नौ सांसद हैं। दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई यानी छह सांसदों का एक साथ अलग होना आवश्यक माना जाता है। इसी वजह से पार्टी के भीतर संभावित राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
राज्यसभा सांसद संजय राउत ने दावा किया कि लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें आश्वस्त किया है कि किसी भी मामले में निर्णय लेने से पहले सभी कानूनी पहलुओं और नियमों का गंभीरता से अध्ययन किया जाएगा। राउत ने कहा कि अध्यक्ष ने निष्पक्षता और संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप कार्रवाई का भरोसा दिया है।
इस बीच शिवसेना (यूबीटी) के सांसद राजाभाऊ वाजे ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े हैं। हालांकि शेष सांसदों को लेकर राजनीतिक अटकलों का दौर जारी है और उनके भविष्य को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं।
मुलाकात से पहले आयोजित एक प्रेस वार्ता में संजय राउत ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि कुछ सांसदों को पाला बदलने के लिए भारी धनराशि की पेशकश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसदों को 50 करोड़ रुपये तक का ऑफर दिया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पक्षों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि शिवसेना (यूबीटी) में किसी प्रकार की टूट होती है तो इसका असर न केवल महाराष्ट्र की राजनीति बल्कि विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजर संभावित घटनाक्रम और पार्टी नेतृत्व की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।
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