
एलडीए रिश्वत कांड में जांच का दायरा बढ़ गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने 50 बड़े शिकायतकर्ताओं की सूची विजिलेंस को सौंपी है। शिकायतों की आड़ में वसूली, बिचौलियों की भूमिका और CCTV फुटेज की जांच होगी।
लखनऊ। एलडीए रिश्वत कांड में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक अधिकारियों और कर्मचारियों पर केंद्रित जांच में नया मोड़ आ गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने आईजीआरएस और अन्य माध्यमों से सबसे अधिक अवैध निर्माण की शिकायत करने वाले 50 प्रमुख शिकायतकर्ताओं की सूची विजिलेंस को सौंप दी है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाएगी कि कहीं शिकायतों की आड़ में वसूली, दबाव या बिचौलियों का कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने जांच में सहयोग के लिए सचिव विवेक श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह 24 घंटे के भीतर विजिलेंस को सभी आवश्यक फाइलें, आईजीआरएस रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य संबंधित सूचनाएं उपलब्ध कराए।
विजिलेंस ने घटना वाले दिन सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक की सीसीटीवी फुटेज के साथ-साथ पिछले एक महीने की CCTV रिकॉर्डिंग भी मांगी है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि एलडीए कार्यालय में किन लोगों की नियमित आवाजाही थी और क्या किसी बिचौलिया नेटवर्क की भूमिका सामने आती है।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने स्पष्ट कहा है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होगी। यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी, बिचौलिये या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
रिश्वत मामले में गिरफ्तार पंप ऑपरेटर चंद्र प्रकाश को पहले ही निलंबित किया जा चुका है, जबकि आरोपी अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा के निलंबन की संस्तुति शासन को भेज दी गई है। साथ ही एलडीए ने अपने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि भविष्य में आईजीआरएस या किसी अन्य माध्यम से मिलने वाली अवैध निर्माण संबंधी शिकायतों पर बिना तथ्यात्मक जांच के कार्रवाई नहीं की जाएगी।
एलडीए रिश्वत कांड की यह जांच लखनऊ में प्रशासनिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। विजिलेंस की रिपोर्ट के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।








