“समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav के भाई Prateek Yadav की मौत मामले में नया मोड़ आ गया है। NHRC में शिकायत देकर SIT जांच की मांग की गई है। सपा नेता रविदास मेहरोत्रा ने प्रतीक यादव को जहर दिए जाने का आरोप लगाया है। जानिए पूरा मामला, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और राजनीतिक प्रतिक्रिया।“
लखनऊ। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रविदास मेहरोत्रा ने दावा किया है कि प्रतीक यादव को जहर दिया गया था।
रविदास मेहरोत्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रतीक यादव के शरीर पर नीले-नीले धब्बे दिखाई दिए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सामान्य मौत नहीं लगती और पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए। मेहरोत्रा ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी शरीर के नीला पड़ने की बात सामने आई है, जिससे कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

NHRC में पहुंचा मामला
प्रतीक यादव की मौत को लेकर अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में मौत की परिस्थितियों को संदिग्ध बताते हुए स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग भी उठाई गई है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता और राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए सामान्य जांच के बजाय स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सभी तथ्यों का निष्पक्ष तरीके से खुलासा हो सके।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर उठ रहे सवाल
सूत्रों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्रतीक यादव के शरीर पर कई निशानों और त्वचा के रंग बदलने जैसी बातों का उल्लेख होने की चर्चा है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर किसी भी जांच एजेंसी या प्रशासन ने जहर देने की पुष्टि नहीं की है।
फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां मेडिकल रिपोर्ट, घटनास्थल से जुड़े तथ्यों और अन्य परिस्थितियों की जांच में जुटी हुई हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी के नेताओं की ओर से लगातार निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
प्रतीक यादव की मौत के बाद से प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इस मामले में पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशासनिक स्तर पर अब तक आधिकारिक तौर पर मौत के कारणों पर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
मामले में NHRC की ओर से क्या रुख अपनाया जाता है और SIT गठन की मांग पर क्या फैसला होता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
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