“UP Gopathy Center 2026: योगी सरकार उत्तर प्रदेश के हर गांव में गोपैथी सेंटर खोलने की तैयारी में है। पंचगव्य आधारित चिकित्सा, गोशाला उद्योग, ग्रामीण रोजगार और आयुष रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा। लखनऊ से बड़ी योजना की शुरुआत।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में गो संरक्षण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारंपरिक चिकित्सा को जोड़ते हुए नई पहल करने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य के हर गांव में ‘गोपैथी सेंटर’ स्थापित करने की तैयारी तेज कर दी गई है।
सरकार का उद्देश्य पंचगव्य आधारित चिकित्सा पद्धति को आधुनिक वैज्ञानिक पहचान दिलाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
पंचगव्य आधारित चिकित्सा को मिलेगा बढ़ावा
सरकार की इस योजना में गाय से प्राप्त पांच प्रमुख तत्वों—दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर—से तैयार उत्पादों को चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।
आयुर्वेदिक परंपराओं के अनुसार, इन उत्पादों का उपयोग मधुमेह, माइग्रेन, लकवा, हृदय रोग और त्वचा संबंधी बीमारियों में सहायक चिकित्सा के रूप में किया जा सकता है।
इसी मॉडल को ‘गोपैथी थेरेपी’ नाम दिया गया है। बताया जा रहा है कि इस दिशा में बड़े स्तर पर क्लीनिकल अध्ययन और शोध की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है।
गोशालाएं बनेंगी ग्रामीण उद्योगों का केंद्र
सरकार की योजना के तहत प्रदेश की गोशालाओं को केवल संरक्षण केंद्र तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें जैविक कृषि और पंचगव्य उत्पाद निर्माण के औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
इसके जरिए ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और किसानों को आधुनिक तकनीक और पंचगव्य उत्पाद निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। गांव स्तर पर मंजन, औषधीय मरहम, अर्क, साबुन और अन्य दैनिक उपयोग के उत्पाद तैयार किए जाएंगे।
सरकार इन उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए मजबूत सप्लाई चेन विकसित करने की तैयारी में है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
यूपी बनेगा देश का सबसे बड़ा गोपैथी केंद्र
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि इस मॉडल को प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर लागू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा ‘गोपैथी सेंटर’ बनकर उभरेगा।
सरकार का मानना है कि यह पहल बेसहारा गोवंश के संरक्षण, पर्यावरण अनुकूल कृषि और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगी।
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