मलिहाबाद में किला या मकबरा? राजा कंस पासी स्थल पर विवाद गहराया, पुलिस निगरानी में जुमे की नमाज

राजा कंस पासी का किला या मकबरा? पासी समाज और मुस्लिम समुदाय आमने-सामने, इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

लखनऊ के मलिहाबाद स्थित कसमंडी कला गांव में ऐतिहासिक ढांचे को लेकर विवाद गहरा गया है। पासी समाज ने इसे राजा कंस पासी का किला और प्राचीन शिव मंदिर बताया, जबकि मुस्लिम समुदाय यहां नमाज अदा कर रहा है। पुलिस निगरानी में जुमे की नमाज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद इलाके के कसमंडी कला गांव में स्थित एक ऐतिहासिक ढांचे को लेकर विवाद गहरा गया है। पासी समाज और मुस्लिम समुदाय के बीच इस स्थल की पहचान को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। शुक्रवार को जुमे की नमाज के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए भारी पुलिस बल और पीएसी की तैनाती की गई।

प्रशासन को खुफिया इनपुट मिला था कि बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट सकते हैं। इसके बाद पूरे इलाके को बैरिकेडिंग कर छावनी में तब्दील कर दिया गया। पुलिस निगरानी में जुमे की नमाज शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराई गई। नमाज के बाद दूसरे पक्ष की ओर से विरोध प्रदर्शन भी किया गया।

पासी समाज ने किया राजा कंस पासी का किला होने का दावा

लाखन पासी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी के नेतृत्व में पासी समाज ने दावा किया है कि यह स्थल महाप्रतापी राजा कंस पासी का किला और प्राचीन शिव मंदिर है। समाज का कहना है कि दीवारों पर फूल, नाग और कलश जैसी आकृतियां बनी हुई हैं, जो हिंदू स्थापत्य शैली का हिस्सा हैं।

पासी समाज का आरोप है कि परिसर के अंदर बनाई गई समाधि और बाहर लगाया गया बोर्ड हाल के वर्षों में लगाया गया है। उनका दावा है कि पहले यहां नमाज नहीं होती थी, लेकिन पिछले दो वर्षों से विशेष समुदाय की ओर से यहां धार्मिक गतिविधियां शुरू की गई हैं।

गजेटियर और इतिहास का हवाला

पासी समाज ने अपने दावों के समर्थन में पुराने लखनऊ गजेटियर और 11वीं सदी के इतिहास का हवाला दिया है। समाज का कहना है कि उस दौर में इस क्षेत्र पर राजा कंस पासी का शासन था और उन्होंने विदेशी आक्रांता सैयद सालार मसूद गाजी की सेना का मुकाबला किया था।

इतिहास से जुड़े इन दावों को लेकर अब पूरे मामले की ऐतिहासिक और वैज्ञानिक जांच की मांग तेज हो गई है।

ASI जांच की मांग, सीएम योगी को भेजा पत्र

पासी समाज के प्रतिनिधियों ने योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर इस स्थल की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा जिलाधिकारी और पुलिस प्रशासन को ज्ञापन देकर पूरे परिसर का वैज्ञानिक सर्वे कराने की मांग भी उठाई गई है।

समाज का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच होती है तो इस स्थल का वास्तविक इतिहास सामने आ जाएगा।

प्रशासन अलर्ट मोड पर

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। सुरेंद्र सिंह भाटी ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था के बीच जुमे की नमाज शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई और इलाके में शांति कायम है।

पुलिस लगातार गश्त कर रही है और सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है ताकि अफवाहों को रोका जा सके। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी भ्रामक सूचना पर ध्यान न देने की अपील की है।

“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button