“UP Bijli Sankat 2026: उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट गहरा गया है। गांवों में सिर्फ 8-10 घंटे बिजली मिल रही है जबकि शहरों में लगातार फॉल्ट और कटौती से लोग परेशान हैं। लखनऊ समेत कई जिलों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट गहराता जा रहा है। शहरों से लेकर गांवों तक अघोषित कटौती ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। कहीं पेयजल व्यवस्था ठप हो रही है तो कहीं लघु उद्योगों पर असर पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में 18 घंटे के रोस्टर के बावजूद लोगों को केवल आठ से 10 घंटे ही बिजली मिल पा रही है, जबकि शहरों में लगातार ट्रिपिंग और फाल्ट के कारण रातभर लोगों को जागकर समय बिताना पड़ रहा है।
प्रदेश में लगातार बढ़ रही बिजली की मांग और सीमित संसाधनों के बीच बिजली व्यवस्था पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है। ऊर्जा विभाग जहां रिकॉर्ड आपूर्ति का दावा कर रहा है, वहीं जमीनी हालात अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। कई जिलों में लोग उपकेंद्रों का घेराव कर विरोध जता रहे हैं।
बढ़ती गर्मी ने बढ़ाया बिजली संकट
प्रदेश में तापमान लगातार 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ एसी, कूलर और पंपों के उपयोग में भारी इजाफा हुआ है। इसका सीधा असर बिजली मांग पर पड़ा है।
ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले छह दिनों में बिजली की मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है।
हर दिन बढ़ती गई बिजली की मांग
- 16 मई – 27,776 मेगावाट
- 17 मई – 28,904 मेगावाट
- 18 मई – 29,330 मेगावाट
- 19 मई – 30,160 मेगावाट
- 20 मई – 30,458 मेगावाट
- 21 मई – 31,000 मेगावाट
अधिकारियों का अनुमान है कि मई के अंत तक बिजली की अधिकतम मांग 33 हजार मेगावाट तक पहुंच सकती है।
गांवों में सबसे ज्यादा कटौती
बिजली विभाग के अभियंताओं के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती सबसे ज्यादा की जा रही है। एक मुख्य अभियंता ने बताया कि गांवों में 18 घंटे आपूर्ति का रोस्टर तय है, लेकिन वास्तविकता इससे काफी अलग है।
उन्होंने बताया कि यदि उत्तर प्रदेश लोड डिस्पैच सेंटर से तीन घंटे कटौती का कोड जारी होता है तो आपूर्ति सीधे 15 घंटे पर आ जाती है। इसके बाद स्थानीय फाल्ट, ट्रांसफार्मर खराब होने या लाइन जलने जैसी समस्याओं में तीन से चार घंटे और निकल जाते हैं। ऐसे में कई गांवों में लोगों को केवल आठ से 12 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
अभियंताओं का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में विरोध अपेक्षाकृत कम होने और राजस्व कम मिलने के कारण वहां कटौती अधिक की जाती है।
सोशल मीडिया ग्रुप से जारी हो रहे कटौती के कोड
बिजली विभाग के कई अभियंताओं ने दावा किया कि अघोषित कटौती के निर्देश सोशल मीडिया ग्रुपों के माध्यम से भेजे जाते हैं। मांग बढ़ने पर अलग-अलग क्षेत्रों में कटौती के लिए कोड जारी किए जाते हैं, जिसके आधार पर सप्लाई रोकी जाती है।
शहरी क्षेत्रों में आधिकारिक तौर पर 24 घंटे आपूर्ति का दावा किया जाता है, लेकिन ओवरलोडिंग और बार-बार फाल्ट के कारण शहरों में भी स्थिति सामान्य नहीं है।
स्वीकृत भार और संसाधनों में बड़ा अंतर
प्रदेश में बिजली संकट की सबसे बड़ी वजह स्वीकृत भार और उपलब्ध संसाधनों के बीच बढ़ता अंतर माना जा रहा है।
प्रदेश में कुल 3.73 करोड़ उपभोक्ता हैं। इनका स्वीकृत भार 8.57 करोड़ किलोवाट है, जबकि 132 केवी सबस्टेशनों की कुल क्षमता केवल 6.25 करोड़ किलोवाट बताई जा रही है।
इसके अलावा करीब 15 प्रतिशत बिजली चोरी भी व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है। पीक आवर्स में जब उपभोक्ता अधिकतम भार का उपयोग करते हैं, तब ट्रांसफार्मर, केबल और कंडक्टर जवाब देने लगते हैं।
33 केवी स्तर पर डिस्कॉम में स्थापित ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता 62,123 एमवीए है। विशेषज्ञों का कहना है कि मांग बढ़ने के साथ यह क्षमता अपर्याप्त साबित हो रही है।
फाल्ट और ओवरलोडिंग से बिगड़ रही स्थिति
भीषण गर्मी में ओवरलोडिंग के कारण ट्रांसफार्मर फुंकने, केबल जलने और लाइन ट्रिपिंग की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। कई जिलों में उपकेंद्रों पर कर्मचारियों को लगातार शिकायतों का सामना करना पड़ रहा है।
कानपुर, बिजनौर, शाहजहांपुर और पूर्वांचल के कई जिलों में बिजली संकट को लेकर लोगों ने प्रदर्शन भी किया। ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति योजनाएं प्रभावित होने से पेयजल संकट भी गहराने लगा है।
अभियंताओं ने सुझाए समाधान
बिजली विभाग के अभियंताओं ने व्यवस्था सुधारने के लिए कई सुझाव दिए हैं। उनका कहना है कि केवल 1912 हेल्पलाइन के भरोसे व्यवस्था नहीं सुधर सकती। लाइनमैन से लेकर मुख्य अभियंता तक जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्वीकृत भार और उपलब्ध संसाधनों के बीच के अंतर को तत्काल कम किया जाए। गर्मी के मौसम को युद्धस्तर की स्थिति मानते हुए संविदा कर्मियों की छंटनी रोकी जाए और निलंबित अभियंताओं को भी आपूर्ति व्यवस्था में लगाया जाए।
ऊर्जा मंत्री बोले- रिकॉर्ड आपूर्ति हो रही
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बावजूद रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति की जा रही है। उनका दावा है कि बिजली उत्पादन और आपूर्ति दोनों में प्रदेश देश में अग्रणी है।
उन्होंने कहा कि नए सबस्टेशनों का निर्माण, ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने और वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए लगातार काम किया जा रहा है। ऊर्जा विभाग द्वारा सतत मॉनिटरिंग के जरिए उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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