“UP Education News 2026: उत्तर प्रदेश सरकार जुलाई से परिषदीय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में ‘कैच-अप शिक्षण’ अभियान शुरू करेगी। इस अभियान के तहत छात्रों के लर्निंग गैप को दूर करने, अतिरिक्त शिक्षण, फॉर्मेटिव असेसमेंट और गतिविधि आधारित शिक्षा पर विशेष जोर दिया जाएगा।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के लाखों स्कूली बच्चों की पढ़ाई को और मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (NCFSE) के अनुरूप जुलाई 2026 से प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में विशेष ‘कैच-अप शिक्षण’ अभियान शुरू किया जाएगा।
इस अभियान का उद्देश्य उन विद्यार्थियों की मदद करना है जो नियमित कक्षाओं के बावजूद अपेक्षित अधिगम स्तर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा पढ़ाई में पीछे न रह जाए और सभी विद्यार्थियों को समान सीखने का अवसर मिले।
जुलाई में चलेगा 15 दिवसीय विशेष शिक्षण अभियान
बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) और डायट प्राचार्यों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
योजना के तहत जुलाई माह में सभी विद्यालयों में 15 दिनों का विशेष पुनरावृत्ति (रिवीजन) शिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान विद्यार्थियों की बुनियादी समझ, भाषा कौशल और गणितीय दक्षता को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
अगस्त से जनवरी तक अतिरिक्त कक्षाएं
अभियान के दूसरे चरण में अगस्त 2026 से जनवरी 2027 तक प्रतिदिन 20 से 30 मिनट का अतिरिक्त ‘कैच-अप शिक्षण’ सत्र संचालित किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के लर्निंग गैप को धीरे-धीरे समाप्त करना और उन्हें उनकी कक्षा के स्तर तक पहुंचाना है।
फॉर्मेटिव असेसमेंट के आधार पर बनेगा शिक्षण मॉडल
कार्यक्रम के तहत पहले विद्यार्थियों का फॉर्मेटिव असेसमेंट किया जाएगा। इसके आधार पर छात्रों की शैक्षिक आवश्यकताओं को समझकर अलग-अलग समूह बनाए जाएंगे।
हर समूह के लिए विशेष शिक्षण रणनीति तैयार की जाएगी ताकि प्रत्येक विद्यार्थी अपनी गति और क्षमता के अनुसार सीख सके। शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्थानीय उदाहरणों और दैनिक जीवन से जुड़े अनुभवों का उपयोग किया जाएगा।
खेल-खेल में होगी पढ़ाई
शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि पढ़ाई को बोझिल बनाने के बजाय रोचक और सहभागितापूर्ण बनाया जाए।
विद्यालयों में—
- बिग बुक
- वार्तालाप कार्ड
- पोस्टर
- पुस्तकालय की पुस्तकें
- गणित किट
- स्थानीय शिक्षण सामग्री
का अधिकतम उपयोग किया जाएगा।
भाषा शिक्षण में पहले सरल शब्द, फिर छोटे वाक्य और उसके बाद अनुच्छेद पढ़ाने की रणनीति अपनाई जाएगी। वहीं गणित को खेल आधारित गतिविधियों के माध्यम से समझाया जाएगा।
आधुनिक शिक्षण तकनीकों का होगा उपयोग
अभियान के दौरान पीयर लर्निंग, पेयर लर्निंग और कोऑपरेटिव लर्निंग जैसी आधुनिक शिक्षण विधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
इसके अलावा कहानी, चित्र आधारित गतिविधियां, रोल प्ले, स्किट, प्रश्नोत्तरी और प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों की सहभागिता बढ़ाई जाएगी, जिससे सीखना अधिक रोचक और स्थायी बन सके।
किसी बच्चे को नहीं कहा जाएगा ‘कमजोर’
सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी विद्यार्थी को कमजोर, पिछड़ा या असफल नहीं कहा जाएगा।
अतिरिक्त शिक्षण सत्रों को विशेष सहायता और सकारात्मक शैक्षिक सहयोग के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। बच्चों की गलतियों को दंड का आधार नहीं बल्कि सीखने का अवसर माना जाएगा। शिक्षकों को नोटबुक और कार्य पुस्तिकाओं की नियमित समीक्षा कर सुधारात्मक सुझाव देने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में बड़ा कदम
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड काल और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक कारणों से कई छात्रों में सीखने का अंतर पैदा हुआ है। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार का यह अभियान बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने और विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।
यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो प्रदेश के लाखों बच्चों को इसका सीधा लाभ मिलेगा और शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार देखने को मिल सकता है।
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