चार महीने बाद दिल्ली से गिरफ्तार हुई निलंबित BSA शालिनी

गोरखपुर शिक्षक कृष्ण भगवान सिंह आत्महत्या मामले में फरार चल रही देवरिया की निलंबित BSA शालिनी श्रीवास्तव को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया है। चार महीने से फरार शालिनी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। गोरखपुर पुलिस उन्हें कोर्ट में पेश करेगी।

लखनऊ/गोरखपुर। गोरखपुर शिक्षक कृष्ण भगवान सिंह आत्महत्या मामले में में बड़ा अपडेट सामने आया है। गोरखपुर के चर्चित शिक्षक आत्महत्या मामले में चार महीने से फरार चल रहीं देवरिया की निलंबित बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) शालिनी श्रीवास्तव को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया है। गोरखपुर पुलिस की टीम ने मंगलवार देर रात उन्हें हिरासत में लिया। गिरफ्तारी की पुष्टि एसपी सिटी गोरखपुर निमिष पाटिल ने की है।

पुलिस के अनुसार शालिनी श्रीवास्तव के खिलाफ 22 फरवरी 2026 को गोरखपुर के शाहपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद से वह लगातार फरार चल रही थीं। अदालत ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया था और गिरफ्तारी न होने पर पुलिस ने उन पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा था।

दिल्ली में मिली लोकेशन, पुलिस ने बिछाया जाल

गोरखपुर पुलिस की विशेष टीम पिछले कई महीनों से शालिनी श्रीवास्तव और उनके कार्यालय के लिपिक संजीव सिंह की तलाश कर रही थी। जांच के दौरान पुलिस को दिल्ली में उनकी मौजूदगी की सूचना मिली। इसके बाद तकनीकी निगरानी और स्थानीय इनपुट के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

एसपी सिटी निमिष पाटिल ने बताया कि आरोपी को गोरखपुर लाया जा रहा है, जहां अदालत में पेश करने के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

क्या है पूरा मामला?

मामला कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग गांव निवासी शिक्षक कृष्ण भगवान सिंह से जुड़ा है। वह देवरिया जिले के गौरीबाजार विकासखंड के एक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात थे।

20 फरवरी 2026 की रात उन्होंने गोरखपुर के शाहपुर क्षेत्र स्थित अपने भाई के मकान में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले शिक्षक ने एक वीडियो और सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें तत्कालीन BSA शालिनी श्रीवास्तव और कार्यालय के लिपिक संजीव सिंह पर मानसिक प्रताड़ना और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए थे।

सुसाइड नोट सामने आने के बाद मामला सुर्खियों में आया और पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

शासन ने किया था निलंबित

एफआईआर दर्ज होने के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने तत्काल प्रभाव से शालिनी श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय जांच भी शुरू की गई थी।

जांच के दौरान एक विद्यालय के प्रधानाचार्य की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई थी। पुलिस ने उन्हें पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि मामले में नामजद लिपिक संजीव सिंह अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर बताया जा रहा है।

पहले 10 हजार, फिर बढ़ाकर किया गया 25 हजार इनाम

शुरुआती दौर में पुलिस ने शालिनी श्रीवास्तव और संजीव सिंह पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। लगातार गिरफ्तारी न होने के कारण इनाम की राशि बढ़ाकर 25-25 हजार रुपये कर दी गई थी।

गोरखपुर पुलिस की चार टीमें देवरिया, बलिया, लखनऊ और प्रयागराज समेत कई जिलों में लगातार दबिश दे रही थीं। आखिरकार चार महीने बाद पुलिस को शालिनी श्रीवास्तव को गिरफ्तार करने में सफलता मिली है।

आगे क्या होगा?

कानूनी प्रक्रिया के तहत शालिनी श्रीवास्तव को गोरखपुर कोर्ट में पेश किया जाएगा। इसके बाद पुलिस उनसे पूछताछ कर मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच करेगी। वहीं फरार लिपिक संजीव सिंह की तलाश अभी भी जारी है।

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