“कानपुर की आकांक्षा सिंह ने बिहार PCS 2026 परीक्षा में 34वीं रैंक हासिल कर SDM पद प्राप्त किया है। गोल्ड मेडलिस्ट आकांक्षा ने रोजाना 7-8 घंटे की सेल्फ स्टडी और दादा के मार्गदर्शन से यह सफलता हासिल की। जानिए उनकी सफलता की कहानी और तैयारी की रणनीति।“
कानपुर। कड़ी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर कानपुर की बेटी आकांक्षा सिंह ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। आकांक्षा ने परीक्षा में 34वीं रैंक प्राप्त कर उप जिलाधिकारी (एसडीएम) पद के लिए चयनित होकर एक नई मिसाल कायम की है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
बलिया की बेटी ने कानपुर में लिखी सफलता की कहानी
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के अघैला गांव की रहने वाली आकांक्षा सिंह वर्तमान में कानपुर के पनकी क्षेत्र से जुड़ी हैं। उनके पिता अरविंद कुमार सिंह ओडिशा के संबलपुर में इंजीनियर हैं, जबकि माता रिंकी सिंह गृहिणी हैं।
आकांक्षा बचपन से ही मेधावी छात्रा रही हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा अरमापुर केंद्रीय विद्यालय से पूरी की। इसके बाद वर्ष 2019 में स्नातक की पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया। वर्ष 2021 में मास्टर्स की डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने पूरी तरह सिविल सेवा की तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर दिया।
रिजल्ट देखकर पूरे परिवार में छा गई खुशी
अपनी सफलता पर आकांक्षा ने बताया कि उन्हें अच्छे परिणाम की उम्मीद थी, लेकिन इतनी बेहतर रैंक मिलेगी, इसका अंदाजा नहीं था। उन्होंने कहा कि रिजल्ट देखते समय उनका छोटा भाई उनके साथ था और सबसे पहले उन्होंने उसी के साथ यह खुशखबरी साझा की। इसके बाद पूरे परिवार में जश्न का माहौल बन गया।

दादाजी बने सबसे बड़ी प्रेरणा
आकांक्षा अपनी सफलता का श्रेय पूरे परिवार को देती हैं, लेकिन विशेष रूप से अपने दादाजी तेज नारायण सिंह को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा मानती हैं। यूको बैंक से सेवानिवृत्त दादाजी ने बचपन से ही उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए प्रेरित किया।
आकांक्षा के अनुसार, दादाजी ने न केवल उनका मार्गदर्शन किया, बल्कि हर कठिन समय में उनका मनोबल भी बढ़ाया। आज उनकी सफलता दादाजी के उसी सपने का साकार रूप है।
असफलताओं से नहीं टूटा हौसला
सिविल सेवा की तैयारी के दौरान आने वाली चुनौतियों पर बात करते हुए आकांक्षा ने कहा कि यह सफर आसान नहीं था। कोविड काल के कारण तैयारी की अवधि लंबी हो गई और कई बार निराशा भी हुई, लेकिन उन्होंने पढ़ाई जारी रखी।
उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति लगातार मेहनत करता रहे तो सफलता देर-सबेर जरूर मिलती है। आज जब लक्ष्य हासिल हो गया है तो संघर्ष के वे सभी वर्ष सार्थक लगते हैं।
सफलता का मंत्र: सेल्फ स्टडी और लगातार रिवीजन
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को संदेश देते हुए आकांक्षा ने कहा कि कोचिंग मदद कर सकती है, लेकिन सफलता का वास्तविक आधार सेल्फ स्टडी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने नियमित रूप से प्रतिदिन 7 से 8 घंटे अध्ययन किया और बेसिक पुस्तकों का बार-बार रिवीजन किया।
उनका मानना है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए मल्टीपल रिवीजन और अनुशासित अध्ययन सबसे महत्वपूर्ण है।
अभिभावकों से भी की खास अपील
आकांक्षा ने कहा कि वर्तमान समय में प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिस्पर्धा बेहद बढ़ गई है। ऐसे में छात्रों को धैर्य बनाए रखना चाहिए और अभिभावकों को अपने बच्चों पर भरोसा रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई बार सफलता मिलने में समय लग सकता है, लेकिन यदि परिवार का सहयोग बना रहे तो विद्यार्थी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य होंगी प्राथमिकता
एसडीएम बनने के बाद अपनी प्राथमिकताओं पर बात करते हुए आकांक्षा ने कहा कि वह महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में विशेष रूप से काम करना चाहती हैं। उनका उद्देश्य प्रशासनिक सेवा के माध्यम से आम लोगों की समस्याओं का समाधान करना और विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी मंजिल अभी समाप्त नहीं हुई है। भविष्य में उनका लक्ष्य संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण कर देश स्तर पर सेवाएं देना है।
गया में होगी प्रशासनिक ट्रेनिंग
चयन के बाद आकांक्षा सिंह जल्द ही बिहार के गया में प्रशासनिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वह औपचारिक रूप से अपने पद का कार्यभार संभालेंगी।
“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”









