मनरेगा में वित्तीय अनियमितता के आरोप में संयुक्त आयुक्त संजय कुमार पाण्डेय निलंबित, डिप्टी CM केशव मौर्य के निर्देश पर कार्रवाई

उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए संयुक्त आयुक्त मनरेगा संजय कुमार पाण्डेय को निलंबित कर दिया है। उन्नाव में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच के बाद कार्रवाई हुई।

उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए संयुक्त आयुक्त (मनरेगा), ग्राम्य विकास विभाग संजय कुमार पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश पर की गई है।

संजय कुमार पाण्डेय पर गंभीर प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे। जांच में प्रथमदृष्टया आरोप सही पाए जाने के बाद शासन ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।

उन्नाव में तैनाती के दौरान लगे थे अनियमितताओं के आरोप

शासन के अनुसार, संजय कुमार पाण्डेय जब जनपद उन्नाव में उपायुक्त (स्वतः रोजगार), राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के पद पर तैनात थे, उस दौरान उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं।

इन आरोपों की जांच कराई गई, जिसमें प्रथमदृष्टया उन्हें गंभीर प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार पाया गया। इसके बाद उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

अनुशासन एवं अपील नियमावली के तहत निलंबन

शासन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, प्रस्तावित अनुशासनिक कार्यवाही को देखते हुए संजय कुमार पाण्डेय को उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-4 के तहत निलंबित किया गया है।

निलंबन अवधि के दौरान उन्हें ग्राम्य विकास विभाग मुख्यालय से संबद्ध रखा जाएगा। उनके खिलाफ आगे की विभागीय कार्रवाई नियमानुसार जारी रहेगी।

भ्रष्टाचार पर सरकार का सख्त संदेश

उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ किया है कि प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितताओं में शामिल पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आगे भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

सुशासन और जनहित को प्राथमिकता

शासन ने दोहराया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। मनरेगा जैसी ग्रामीण विकास योजनाओं में किसी भी तरह की वित्तीय गड़बड़ी को सरकार गंभीरता से ले रही है।

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