पेपर लीक के मुद्दे पर Gen-Z में बढ़ते असंतोष के बीच यूपी भाजपा ने युवा वोट बैंक को साधने की रणनीति तेज कर दी है। हर घर तिरंगा अभियान, कॉलेजों में संवाद और संगोष्ठियों के जरिए पार्टी युवाओं तक पहुंचने की तैयारी में है।
लखनऊ। पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर युवाओं में बढ़ती नाराजगी ने राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा ने भी अब Gen-Z यानी युवा मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाने की रणनीति तेज कर दी है। पार्टी की कोशिश केवल राजनीतिक संदेश देने तक सीमित रहने के बजाय युवाओं के साथ सीधे संवाद स्थापित करने की है।
विपक्षी दल युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेता छात्रों और युवाओं के आंदोलनों के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। ऐसे में भाजपा ने भी युवा मोर्चे समेत अपने संगठनात्मक तंत्र को सक्रिय कर दिया है।
मोहन भागवत के बयान से मिला राजनीतिक संकेत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत की ओर से Gen-Z को राष्ट्रवादी और देश का भविष्य बताया जाना भी इस रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। युवा वर्ग को भविष्य की राजनीति में महत्वपूर्ण बताते हुए संघ की ओर से मिले संदेश के बाद भाजपा ने भी युवाओं के बीच अपनी गतिविधियां बढ़ाने पर जोर दिया है।
भाजपा की रणनीति में राष्ट्रवाद, विकसित भारत और युवाओं की भूमिका जैसे मुद्दे प्रमुखता से शामिल किए जा रहे हैं। पार्टी का मानना है कि युवाओं के साथ वैचारिक और सामाजिक संवाद बढ़ाकर उनके बीच अपनी पकड़ मजबूत की जा सकती है।
हर घर तिरंगा अभियान की कमान युवाओं के हाथ
भाजपा 11 से 15 अगस्त तक हर घर तिरंगा अभियान चलाएगी। पार्टी ने इस अभियान में युवाओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने की तैयारी की है। स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को अभियान से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
इस दौरान संगोष्ठियों और अन्य कार्यक्रमों में राष्ट्रवाद, देश की उपलब्धियों और विकसित भारत के लक्ष्य जैसे विषयों पर चर्चा होगी। पार्टी इसे युवाओं के साथ सीधे संवाद का माध्यम भी बना रही है।
कॉलेज और विश्वविद्यालयों में बढ़ेगी भाजपा की सक्रियता
भाजपा की नजर खास तौर पर शैक्षणिक परिसरों पर है। पार्टी विद्यालयों से लेकर विश्वविद्यालयों तक संगोष्ठियों और संवाद कार्यक्रमों के जरिए युवाओं तक पहुंचने की तैयारी कर रही है।
पार्टी का प्रयास है कि इन कार्यक्रमों में केवल सरकार की उपलब्धियां बताने के बजाय युवाओं के विचार और उनकी समस्याएं भी सुनी जाएं। रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, सामाजिक बदलाव और आर्थिक अवसर जैसे मुद्दों पर युवाओं के साथ संवाद बढ़ाने की योजना है।
सितंबर तक परिसरों में सक्रिय रहेगा भाजयुमो
छात्र आंदोलनों और युवाओं के बीच विपक्षी दलों की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए भाजपा ने भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) को भी मैदान में उतारा है। उत्तर प्रदेश में भाजयुमो सितंबर तक कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक परिसरों में विशेष अभियान चलाने की तैयारी में है।
इस दौरान युवा मोर्चा छात्रों और युवाओं से राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विषयों पर संवाद करेगा। पार्टी की कोशिश है कि युवाओं की समस्याओं को समझने के साथ-साथ उन्हें सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी भी दी जाए।
संत रविदास समरसता संकल्प अभियान से भी युवाओं को जोड़ने की तैयारी
भाजपा के लंबे अभियान में संत रविदास समरसता संकल्प अभियान भी शामिल है। छह माह तक चलने वाले इस अभियान के तहत कॉलेजों में समाज सुधारकों और सामाजिक आंदोलनों पर संगोष्ठियां आयोजित करने की योजना है।
इन कार्यक्रमों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर रहेगा। पार्टी का उद्देश्य सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों को युवा वर्ग से जोड़ना है।
‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ और विकसित भारत का संदेश
भाजपा अपने युवा संपर्क अभियान में एक भारत-श्रेष्ठ भारत और वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य को भी प्रमुखता से सामने रखेगी। पार्टी युवाओं को देश के विकास में उनकी भूमिका के बारे में जोड़ने की कोशिश करेगी।
भाजपा का संदेश है कि युवा देश के भविष्य के साथ-साथ वर्तमान विकास प्रक्रिया के भी महत्वपूर्ण भागीदार हैं। ऐसे में उन्हें पार्टी के अभियानों और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ना संगठन की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।
विपक्ष के हमलों का भी जवाब देने की तैयारी
भाजपा की रणनीति केवल संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। पार्टी विपक्षी दलों के आरोपों का जवाब देने के लिए भी युवाओं के बीच संवाद अभियान चलाएगी।
प्रयागराज में राहुल गांधी के युवाओं और छात्रों से संवाद के कार्यक्रम को देखते हुए भाजपा के ओबीसी मोर्चे ने भी छात्रों से संपर्क की रणनीति बनाई है। पार्टी युवाओं के बीच यह संदेश पहुंचाने की कोशिश करेगी कि कांग्रेस ने इतिहास, संस्कृति और रोजगार के मुद्दों पर उन्हें अपेक्षित परिणाम नहीं दिए।
युवाओं को लेकर भाजपा की रणनीति पर रहेगी नजर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से युवाओं को देश की महत्वपूर्ण सामाजिक शक्तियों में शामिल किए जाने का उल्लेख भी भाजपा के अभियान में किया जा रहा है। पार्टी युवा वर्ग को अपनी राजनीतिक और विकास संबंधी रणनीति से जोड़ने का प्रयास कर रही है।
हालांकि, पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दे युवाओं के लिए सीधे तौर पर जुड़े सवाल हैं। ऐसे में भाजपा के सामने चुनौती केवल राष्ट्रवाद और विकास के संदेश तक सीमित नहीं है। युवाओं की वास्तविक समस्याओं और उनकी अपेक्षाओं पर प्रभावी जवाब देना भी जरूरी होगा।
आने वाले समय में भाजपा का यह युवा संपर्क अभियान कितना प्रभावी साबित होता है, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी। खासकर युवा मतदाताओं के बीच बढ़ती राजनीतिक जागरूकता के दौर में शैक्षणिक परिसरों और सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक युवाओं के बीच पकड़ बनाने की कोशिशें आने वाले चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती हैं।








