“आजादी के बाद से पक्की सड़क का इंतजार कर रहे हमीरपुर के चंदूपुर गांव के ग्रामीणों का सब्र मंगलवार को टूट गया। स्कूली बच्चों और अभिभावकों ने हाथों में तिरंगा लेकर करीब पांच किलोमीटर की पदयात्रा की और कलेक्ट्रेट पहुंचकर सड़क निर्माण की मांग उठाई। बरसात में करीब डेढ़ किलोमीटर का कच्चा रास्ता दलदल बन जाने से बच्चों की पढ़ाई और मरीजों तक एंबुलेंस पहुंचने में परेशानी होती है।“
हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों और स्कूली बच्चों का आक्रोश मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंच गया। विकासखंड कुरारा के चंदूपुर गांव और आसपास के डेरों के ग्रामीण अपने बच्चों के साथ करीब पांच किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि आजादी के बाद से गांव को पक्की सड़क नहीं मिली है और बारिश के दिनों में कच्चा रास्ता दलदल में बदल जाता है।
कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। जिलाधिकारी से मुलाकात न होने पर ग्रामीणों और बच्चों का गुस्सा और बढ़ गया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने डीएम कार्यालय में प्रवेश करने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस ने गेट बंद कर दिया। स्थिति को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में पुलिस और पीएसी की तैनाती करनी पड़ी।
तिरंगा लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे बच्चे और ग्रामीण
चंदूपुर गांव से निकली तिरंगा यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ स्कूली बच्चे भी शामिल हुए। करीब पांच किलोमीटर पैदल चलकर सभी कलेक्ट्रेट पहुंचे। बच्चों के हाथों में तिरंगा था और वे सड़क निर्माण की मांग को लेकर नारे लगा रहे थे।
ग्रामीणों का कहना है कि उनका विरोध किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही मूलभूत समस्या को लेकर है। उनका आरोप है कि बरसात के मौसम में सड़क की हालत इतनी खराब हो जाती है कि गांव से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
बारिश में दलदल बन जाता है डेढ़ किलोमीटर का रास्ता
ग्रामीणों के अनुसार, चंदूपुर की बच्ची के डेरा से हमीरपुर तक करीब डेढ़ किलोमीटर का कच्चा मार्ग है। बारिश होते ही यह रास्ता कीचड़ और दलदल में बदल जाता है। इससे करीब 1600 की आबादी को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को होती है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में कीचड़ भरे रास्ते के कारण कई बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंच पाते। वहीं, बीमार और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस भी गांव तक पहुंचने में दिक्कत का सामना करती है।
डीएम से मुलाकात न होने पर बढ़ा आक्रोश
कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मुलाकात की मांग की। डीएम से मुलाकात न होने पर प्रदर्शनकारियों ने मुख्य गेट पर धरना शुरू कर दिया। इस दौरान बच्चों और अभिभावकों ने नारेबाजी की और हाथों में तिरंगा लेकर सड़क निर्माण की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने डीएम कार्यालय में जाने का प्रयास भी किया। पुलिस ने कार्यालय का गेट बंद कर दिया। इसके बाद बड़ी संख्या में पुलिस और पीएसी के जवानों को तैनात किया गया।
चार घंटे तक चला प्रदर्शन
प्रदर्शन मंगलवार सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ और दोपहर तीन बजे तक चलता रहा। मुख्य गेट पर धरना होने के कारण अधिकारियों के वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। इसके बाद कलेक्ट्रेट के दूसरे गेट को खोलकर अधिकारियों के वाहनों को बाहर निकाला गया।
एडीएम राकेश कुमार, एसडीएम अभिषेक कुमार और सीओ यशपाल सिंह ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे। करीब चार घंटे बाद प्रदर्शनकारी बच्चों के साथ वापस गांव लौट गए।
प्रशासन ने सड़क पर डलवानी शुरू की डस्ट
प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने तत्काल राहत के तौर पर कच्चे मार्ग पर डस्ट डलवाने का काम शुरू कराया है। इसका उद्देश्य बारिश के दौरान रास्ते पर होने वाले कीचड़ को कम करना और ग्रामीणों को अस्थायी राहत देना है।
जिलाधिकारी अभिषेक गोयल ने कहा कि गांव की सड़क को लेकर पहले भी ग्रामीणों के साथ बैठक हो चुकी है और ग्रामीण अपनी समस्या बता चुके हैं। उनके मुताबिक, लोक निर्माण विभाग की कार्ययोजना में यह मार्ग शामिल है और सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
शासन को भेजा गया सड़क निर्माण का प्रस्ताव
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अरुण कुमार के अनुसार, करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे मार्ग के निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित सड़क की लागत करीब 181.6 करोड़ रुपये बताई गई है। शासन से बजट स्वीकृत होने के बाद सड़क निर्माण शुरू कराया जाएगा।
फिलहाल बारिश के कारण ग्रामीणों को हो रही परेशानी को देखते हुए सड़क पर डस्ट डलवाई जा रही है, ताकि रास्ते पर कीचड़ की समस्या कम हो सके।
वन विभाग की जमीन के कारण अटका था मामला
सदर विधायक डा. मनोज प्रजापति के अनुसार, सड़क निर्माण में वन विभाग की जमीन से जुड़ी समस्या सामने आई थी। उन्होंने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही सड़क निर्माण का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।
विधायक के मुताबिक, उन्होंने स्वयं चंदूपुर और आसपास के डेरों का दौरा कर ग्रामीणों की समस्या को देखा है। सड़क निर्माण के लिए संबंधित विभागों के स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
ग्रामीणों को स्थायी सड़क का इंतजार
चंदूपुर में हुए प्रदर्शन ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों की मुख्य मांग अब स्थायी पक्की सड़क का निर्माण है, ताकि बारिश के मौसम में बच्चों की पढ़ाई, मरीजों की आवाजाही और रोजमर्रा के आवागमन में परेशानी न हो।
फिलहाल डस्ट डाले जाने से ग्रामीणों को अस्थायी राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन लोगों की नजर अब शासन से बजट मंजूरी और प्रस्तावित सड़क के वास्तविक निर्माण पर टिकी है।





