“अमृतलाल नागर के जीवन और साहित्य पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘चौक यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर’ अगले माह न्यूयार्क में प्रदर्शित होगी। लखनऊ के चौक से जुड़े नागर के जीवन, 10 उपन्यासों और सामाजिक चेतना को डॉक्यूमेंट्री में दिखाया गया है।“
लखनऊ। पद्मभूषण से सम्मानित साहित्यकार अमृतलाल नागर के जीवन और साहित्य पर आधारित डॉक्यूमेंट्री ‘चौक यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर’ अब न्यूयार्क में भी प्रदर्शित की जाएगी। अगले माह भारतीय दूतावास के सहयोग से डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग होगी। इससे पहले यह फिल्म इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (आईएफएफआई) और जागरण फिल्म फेस्टिवल (जेएफएफ) में प्रदर्शित हो चुकी है।
डॉक्यूमेंट्री को देश-विदेश के दूसरे शहरों तक ले जाने की तैयारी है। मध्य प्रदेश समेत कई शहरों में इसके प्रदर्शन की योजना है। विश्वविद्यालयों में भी इसकी स्क्रीनिंग कराई जाएगी, ताकि नई पीढ़ी अमृतलाल नागर के साहित्य और उनके रचनात्मक संसार से परिचित हो सके।
नागर के जीवन और लखनऊ से रिश्ते की कहानी
डॉक्यूमेंट्री का निर्देशन नागर परिवार की सविता शर्मा नागर और राजेश अमरोही ने किया है। इसे तैयार करने में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव सच्चिदानंद जोशी का भी सहयोग रहा है।
सविता शर्मा नागर के अनुसार, 17 अगस्त 1916 को जन्मे अमृतलाल नागर का जीवन केवल साहित्य सृजन तक सीमित नहीं था। उनके लेखन में लखनऊ के चौक की गलियां, वहां का जनजीवन, लोक संस्कृति और आम आदमी की संवेदनाएं गहराई से दिखाई देती हैं। डॉक्यूमेंट्री में नागर के जीवन के साथ उन स्थानों और परिवेश को भी सामने लाने की कोशिश की गई है, जिसने उनकी रचनात्मकता को आकार दिया।
10 प्रमुख उपन्यासों का भी जिक्र
डॉक्यूमेंट्री में अमृतलाल नागर के चर्चित उपन्यासों और उनके पीछे छिपे सामाजिक संदर्भों को भी शामिल किया गया है। ‘ये कोठेवालियां’, ‘मानस का हंस’, ‘नाच्यो बहुत गोपाल’, ‘खंजन नयन’, ‘गदर के फूल’, ‘अमृत और विष’, ‘बूंद और समुद्र’, ‘हम फिदा-ए-लखनऊ’ और ‘एकदा नैमिषारण्ये’ समेत उनके 10 उपन्यासों पर चर्चा की गई है।
इन रचनाओं को लिखने के पीछे की परिस्थितियां क्या थीं, नागर ने इन विषयों को क्यों चुना और आज के दौर में इन रचनाओं को पढ़ने की जरूरत क्यों है, डॉक्यूमेंट्री में इन सवालों के जवाब तलाशे गए हैं।
चौक बना नागर का विश्वविद्यालय
डॉक्यूमेंट्री के शीर्षक के पीछे भी अमृतलाल नागर के लखनऊ और चौक से गहरे रिश्ते की कहानी है। सविता शर्मा नागर के मुताबिक चौक की गलियां, वहां का जीवन और आम लोगों के अनुभव ही नागर के लिए किसी विश्वविद्यालय की तरह थे। इसी वजह से उन्हें उस ‘चौक यूनिवर्सिटी’ का ‘वाइस चांसलर’ माना गया है।
नागर ने अपने साहित्य में भारतीय लोक संस्कृति, मानवीय संबंधों और सामाजिक चेतना को जिस तरह अभिव्यक्त किया, डॉक्यूमेंट्री उसी दृष्टि को केंद्र में रखती है। इसमें यह भी दिखाया गया है कि साहित्यकार अपने समय के समाज और इतिहास को किस तरह रचनाओं के माध्यम से दर्ज करता है।
एआई के जरिए दिखाए सामाजिक संघर्ष
डॉक्यूमेंट्री की खासियत यह भी है कि अमृतलाल नागर के प्रमुख उपन्यासों में चित्रित सामाजिक संघर्ष और उनके दौर के वातावरण को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के माध्यम से दृश्य रूप देने का प्रयास किया गया है।
निर्माताओं का कहना है कि इसका उद्देश्य दर्शकों को नागर के साहित्य की पृष्ठभूमि को सहज तरीके से समझाना है। डॉक्यूमेंट्री यह संदेश भी देती है कि लेखक केवल कहानियां और उपन्यास नहीं लिखते, बल्कि अपने समय के समाज, संस्कृति और इतिहास को भी शब्दों में संरक्षित करते हैं।
जिस हवेली में रचा साहित्य, वह आज जर्जर
अमृतलाल नागर की साहित्यिक स्मृतियों से जुड़ी चौक स्थित हवेली आज उपेक्षा का शिकार है। जिस हवेली में उन्होंने अपनी अनेक महत्वपूर्ण कृतियों की रचना की, वहां अब परिवार का कोई सदस्य नहीं रहता। जर्जर हो चुकी हवेली की दीवारें और झांकती ईंटें उसकी बदहाली की कहानी बयां करती हैं।
नागर परिवार की सविता शर्मा नागर के अनुसार, अमृतलाल नागर के निधन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव भी इस हवेली में आए थे। उन्होंने इसे स्मारक के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में सरकार बदल गई और यह घोषणा पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद किसी सरकार ने इस दिशा में गंभीर पहल नहीं की।
न्यूयार्क स्क्रीनिंग से बढ़ेगी पहचान
अमृतलाल नागर की साहित्यिक विरासत को डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से देश और विदेश तक पहुंचाने की कोशिश अब न्यूयार्क तक पहुंच गई है। भारतीय दूतावास के सहयोग से होने वाली स्क्रीनिंग से हिंदी साहित्य और लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के बीच प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। वहीं विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन के जरिए नई पीढ़ी को नागर के साहित्य, उनके समय और उनकी लोकनिष्ठ दृष्टि से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
Meta Description: अमृतलाल नागर के जीवन और साहित्य पर आधारित डॉक्यूमेंट्री ‘चौक यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर’ अगले माह न्यूयार्क में प्रदर्शित होगी। डॉक्यूमेंट्री में नागर के 10 उपन्यासों, लखनऊ के चौक और उनकी साहित्यिक विरासत को दिखाया गया है।








