“CA दीपक गुप्ता के वित्तीय लेन-देन और प्रभावशाली लोगों से कथित संपर्कों की जांच तेज हो गई है। एजेंसियां आजम खान और पूर्व एमएलसी इकबाल उर्फ बाल्ला से उनके संपर्क की कड़ियां तलाश रही हैं। दीपक गोयल का नाम भी जांच के दायरे में आया है।“
सहारनपुर। चार्टर्ड अकाउंटेंट दीपक गुप्ता से जुड़े मामले की जांच अब उनके वित्तीय लेन-देन के साथ-साथ राजनीतिक और कारोबारी क्षेत्र के प्रभावशाली लोगों से कथित संपर्कों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दीपक गुप्ता के किन-किन लोगों से पेशेवर संबंध रहे और उनके बीच संपर्क स्थापित होने का माध्यम क्या था।
जांच का एक अहम पहलू पूर्व मंत्री आजम खान से दीपक गुप्ता के कथित संपर्क को लेकर है। एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि दोनों के बीच संपर्क किस व्यक्ति, कारोबारी माध्यम या अन्य किसी कड़ी के जरिये स्थापित हुआ।
पुराने वित्तीय रिकॉर्ड और संपर्कों की पड़ताल
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एजेंसियां दीपक गुप्ता के पुराने वित्तीय रिकॉर्ड, कारोबारी लेन-देन और पेशेवर संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं। खासतौर पर उन लोगों और संस्थाओं से जुड़े दस्तावेजों को देखा जा रहा है, जिनके वित्तीय खातों या लेखा संबंधी कामकाज को दीपक गुप्ता संभालते रहे हैं।
जांच एजेंसियों का फोकस इस बात पर है कि इन पेशेवर संबंधों के पीछे सामान्य कारोबारी गतिविधियां थीं या किसी अन्य तरह की वित्तीय अथवा कारोबारी कड़ी भी मौजूद थी।
आजम खान से संपर्क का माध्यम क्या था?
जांच में सबसे अहम सवाल यह है कि दीपक गुप्ता की आजम खान से पहचान और कथित नजदीकी कैसे बनी। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि दोनों के बीच संपर्क सीधे था या किसी तीसरे व्यक्ति के माध्यम से हुआ।
इसके लिए पुराने दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन, कारोबारी गतिविधियों और संभावित मध्यस्थों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। जांच में यदि कोई ठोस दस्तावेजी या वित्तीय साक्ष्य सामने आता है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
पूर्व एमएलसी इकबाल उर्फ बाल्ला प्रकरण से भी जुड़ा नाम
दीपक गुप्ता का नाम सहारनपुर के बसपा के पूर्व एमएलसी इकबाल उर्फ बाल्ला से जुड़े मामले में भी सामने आ चुका है। इसी वजह से जांच एजेंसियां अब उनके पुराने पेशेवर और वित्तीय संपर्कों को नए सिरे से खंगाल रही हैं।
एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि अलग-अलग मामलों में सामने आए प्रभावशाली लोगों के बीच कोई साझा कारोबारी, वित्तीय या मध्यस्थ कड़ी तो नहीं रही। इसके लिए पुराने लेन-देन और संबंधित दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।
कई सफेदपोश लोगों के खाते संभालने का दावा
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि दीपक गुप्ता कई प्रभावशाली और सफेदपोश लोगों के वित्तीय खातों से जुड़े काम संभालते थे। ऐसे में जांच एजेंसियों की नजर उन लोगों और संस्थाओं पर भी है, जिनके साथ उनका लंबे समय तक पेशेवर संबंध रहा।
खातों से जुड़े दस्तावेजों, ऑडिट रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल के जरिए यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि दीपक गुप्ता की भूमिका केवल पेशेवर चार्टर्ड अकाउंटेंट तक सीमित थी या कुछ अन्य गतिविधियों में भी उनकी भागीदारी थी।
दीपक गोयल का नाम भी जांच में सामने आया
पूरे मामले में दीपक गोयल का नाम भी सामने आ रहा है। बताया जा रहा है कि दीपक गोयल ने पहले एक सीए के यहां काम किया था। बाद में उन्होंने अपनी फर्म शुरू की। जांच में यह बात भी सामने आई है कि दीपक गोयल, दीपक गुप्ता के माध्यम से ऑडिट से संबंधित काम कराते थे।
इकबाल उर्फ बाल्ला से जुड़े मामले में दीपक गोयल के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी भी हो चुकी है। इसके बाद से उनका नाम भी जांच की कड़ियों में देखा जा रहा है।
दीपक गुप्ता के कार्यालय से मिले दस्तावेज
जांच एजेंसियों ने दीपक गुप्ता के जिस कार्यालय पर कार्रवाई कर दस्तावेज बरामद किए हैं, उसकी गतिविधियां भी जांच के दायरे में हैं। सूत्रों के अनुसार, इस कार्यालय का इस्तेमाल लोगों से बातचीत और मुलाकात के लिए किया जाता था।
जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कार्यालय में किन लोगों की आवाजाही रही और वहां होने वाली बैठकों अथवा बातचीत का वित्तीय मामलों से कोई संबंध था या नहीं।
जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा
फिलहाल जांच एजेंसियां दीपक गुप्ता से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और संपर्कों की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। जांच का दायरा अब केवल उनके व्यक्तिगत वित्तीय मामलों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उनसे जुड़े प्रभावशाली लोगों और कारोबारी संपर्कों तक फैलता दिखाई दे रहा है।
आजम खान से उनका संपर्क किस माध्यम से हुआ, पूर्व एमएलसी इकबाल उर्फ बाल्ला प्रकरण में उनकी भूमिका क्या थी और दीपक गोयल के साथ उनके पेशेवर संबंधों का स्वरूप क्या रहा—इन सभी सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।








