“लखनऊ नगर निगम के विशेष सदन में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर जोरदार चर्चा हुई। महापौर सुषमा खर्कवाल ने आवास पर हुई घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए विपक्ष पर हमला बोला। 93 पार्षदों ने सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित कर नारी सम्मान के पक्ष में मजबूत संदेश “
लखनऊ। लखनऊ नगर निगम का विशेष सदन गुरुवार को सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं रहा, बल्कि यह महिला सम्मान और राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा के बहाने शुरू हुई बैठक में माहौल उस वक्त गरमा गया, जब महापौर सुषमा खर्कवाल ने अपने आवास पर हुई घटना को लेकर खुलकर नाराजगी जताई।

त्रिलोकीनाथ हॉल में आयोजित इस बैठक में महापौर ने अपने संबोधन की शुरुआत ही एक अलग अंदाज में की। उन्होंने खुद को सिर्फ शहर की महापौर नहीं, बल्कि एक सैनिक परिवार की बेटी, बहू और पत्नी बताते हुए कहा कि उन्होंने जीवन में अनुशासन और स्वाभिमान को सबसे ऊपर रखा है—लेकिन बुधवार सुबह जो हुआ, उसने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया।

उन्होंने विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि नारी के सम्मान के मुद्दे पर राजनीति करना देश की संस्कृति के खिलाफ है। “जिस देश में गंगा-गोमती को माँ कहा जाता है, वहां माँ-बहन-बेटी का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा,”—महापौर के इस बयान पर सदन में जोरदार प्रतिक्रिया देखने को मिली।

महापौर ने अपने ऊपर लगे आरोपों को भी खारिज किया और कहा कि एक माँ होने के नाते वह किसी भी महिला का अपमान सोच भी नहीं सकतीं। उन्होंने इसे एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया।

बैठक के दौरान कई पार्षदों ने भी खुलकर अपने विचार रखे और महिला सशक्तिकरण की दिशा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को ऐतिहासिक कदम बताया। पार्षदों ने एक स्वर में कहा कि अब समय आ गया है जब महिलाओं को उनका पूरा अधिकार मिले और समाज में उन्हें बराबरी का दर्जा दिया जाए।

विवाद का केंद्र बना बुधवार का वह घटनाक्रम भी रहा, जब महापौर के आवास पर प्रदर्शन के दौरान उनकी नामपट्टिका पर जूता चलाया गया। इस मुद्दे पर महापौर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह केवल उनका नहीं, बल्कि पूरे लखनऊ की गरिमा का अपमान है।

सदन में इस पूरे मामले की निंदा करते हुए प्रस्ताव लाया गया, जिसे 119 में से 93 पार्षदों ने सर्वसम्मति से पास कर दिया। इस दौरान सत्ता पक्ष पूरी तरह एकजुट नजर आया।

महापौर ने समर्थन के लिए सभी पार्षदों और शहरवासियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक प्रस्ताव नहीं, बल्कि नारी सम्मान के पक्ष में एक मजबूत आवाज है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा—“यह तो शुरुआत है, अपमान का पूरा हिसाब अभी बाकी है।”सदन की कार्यवाही ने यह साफ कर दिया कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा शहर की राजनीति में और ज्यादा गर्माने वाला है।





