“उत्तर प्रदेश में चीनी के बढ़ते दामों के बीच सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ निगरानी बढ़ा दी है। मेरठ और बरेली में टीमों ने गोदामों और प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। तय सीमा से अधिक स्टॉक रखने वालों पर कार्रवाई होगी।“
लखनऊ/मेरठ/बरेली: चीनी की कीमतों में उछाल के बाद सरकार सख्त
उत्तर प्रदेश में चीनी के दाम अचानक बढ़ने के बाद सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। बाजार में कृत्रिम कमी पैदा कर कीमत बढ़ाने की कोशिश करने वाले कारोबारियों पर प्रशासन की नजर है। इसी क्रम में मेरठ और बरेली समेत कई जिलों में सरकारी टीमों ने चीनी मिलों, गोदामों और कारोबारियों के प्रतिष्ठानों की जांच तेज कर दी है।
अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है। इसके बावजूद यदि कोई कारोबारी निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक रखकर कृत्रिम अभाव पैदा करने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मेरठ में 2.69 लाख मीट्रिक टन स्टॉक की निगरानी
मेरठ परिक्षेत्र में चीनी के स्टॉक पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। उप गन्ना आयुक्त यशपाल चौधरी के मुताबिक क्षेत्र में करीब 2,69,672.46 मीट्रिक टन चीनी का स्टॉक उपलब्ध है। विभाग ने कहा है कि उपलब्धता पर्याप्त होने के कारण बाजार में चीनी की कमी को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।
चीनी मिलों में उपलब्ध स्टॉक का नियमित भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। मौके पर मौजूद स्टॉक का मिल के रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है, ताकि किसी तरह की जमाखोरी या स्टॉक छिपाने की स्थिति सामने आने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
तकनीक के जरिए भी हो रही स्टॉक की निगरानी
चीनी के स्टॉक की निगरानी को तकनीक से भी जोड़ा गया है। एसजीके पोर्टल पर चीनी मिलों के दैनिक स्टॉक की जानकारी दर्ज कराई जा रही है। विभाग इन आंकड़ों का नियमित रूप से मिलान कर रहा है।
मिल में कितनी चीनी उपलब्ध है, कितनी बिक्री हुई और कितना स्टॉक बचा है, इसकी लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि स्टॉक और बिक्री के आंकड़ों में असामान्य अंतर मिलने पर संबंधित इकाई की जांच की जाएगी।
चीनी डीलरों और थोक कारोबारियों पर भी नजर
सरकार की कार्रवाई केवल चीनी मिलों तक सीमित नहीं है। डीलरों, थोक विक्रेताओं और बड़े उपभोक्ताओं के स्टॉक की भी जांच की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार भारत सरकार के निर्देशों के तहत चीनी डीलर 30 दिन से अधिक का स्टॉक नहीं रख सकते। इसके अलावा किसी भी समय 400 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं है।
वहीं, जिन बड़े उपभोक्ताओं की मासिक खपत 10 मीट्रिक टन या उससे अधिक है, उनके लिए भी निर्धारित अवधि से अधिक चीनी का भंडारण प्रतिबंधित है। ऐसे उपभोक्ता 15 दिन से अधिक अवधि का स्टॉक नहीं रख सकते।
बिक्री के बाद मिलों के स्टॉक पर भी नजर
विभाग चीनी मिलों की बिक्री के बाद बचे स्टॉक की भी निगरानी कर रहा है। यदि निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी मिल अपने परिसर या गोदाम में चीनी रोककर रखती है तो उसकी जांच की जाएगी।
अधिकारियों के मुताबिक निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक, बिक्री और उपलब्धता के आंकड़ों में असामान्य अंतर या कोई संदिग्ध गतिविधि मिलने पर जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मेरठ मंडल के सात जिलों में निगरानी टीमें सक्रिय
मेरठ परिक्षेत्र में कार्रवाई के लिए जिला स्तरीय निगरानी टीमें सक्रिय कर दी गई हैं। मेरठ, बागपत, हापुड़, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़ और मथुरा में ये टीमें चीनी के स्टॉक और आपूर्ति व्यवस्था पर नजर रख रही हैं।
इन टीमों में गन्ना विभाग के साथ प्रशासन, आपूर्ति, विपणन और मंडी विभाग के अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा मंडल स्तर पर भी निरीक्षण दल गठित किए जा रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर अलग-अलग स्थानों पर तत्काल जांच की जा सके।
बरेली में दो चीनी प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण
बरेली में भी चीनी की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। सोमवार को जिला पूर्ति अधिकारी और डिप्टी आरएमओ की संयुक्त टीम ने श्यामगंज स्थित दो चीनी प्रतिष्ठानों का अचानक निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने दोनों प्रतिष्ठानों में मौजूद चीनी के स्टॉक का मौके पर भौतिक सत्यापन किया और संबंधित अभिलेखों से उसका मिलान किया। जांच के दौरान दोनों प्रतिष्ठानों का स्टॉक रिकॉर्ड के अनुसार सही पाया गया। अधिकारियों को किसी तरह की अनियमितता नहीं मिली।
आगे भी जारी रहेगी औचक जांच
जिला आपूर्ति अधिकारी मनीष कुमार सिंह ने बताया कि चीनी कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों की नियमित और औचक जांच आगे भी जारी रहेगी। प्रशासन का उद्देश्य बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और जमाखोरी या कालाबाजारी के जरिए कृत्रिम महंगाई पैदा करने की कोशिशों पर रोक लगाना है।
सरकार की सख्ती के बाद अब चीनी मिलों, डीलरों, थोक कारोबारियों और बड़े उपभोक्ताओं को निर्धारित स्टॉक सीमा का पालन करना होगा। नियमों का उल्लंघन मिलने पर जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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