“कादिर राना के ठिकानों पर ED की छापेमारी 26 घंटे तक चली। मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और फरीदाबाद के नौ परिसरों से 3.80 करोड़ रुपये नकद, दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए।“
मुजफ्फरनगर। फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के जरिए कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बड़ी कार्रवाई की। ED की लखनऊ इकाई ने मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और फरीदाबाद के नौ परिसरों पर छापेमारी की।
करीब 26 घंटे तक चली जांच के बाद ED की टीम वापस लौट गई। कार्रवाई के दौरान अलग-अलग ठिकानों से कुल 3.80 करोड़ रुपये की नकदी जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा जांच टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी बरामद किए।
कादिर राना और शाहनवाज राना के ठिकाने भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान पूर्व सांसद एवं सपा नेता कादिर राना और पूर्व विधायक एवं आजाद समाज पार्टी नेता शाहनवाज राना से जुड़े परिसरों की भी तलाशी ली गई। अधिकारियों ने यहां से दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं।
ED की कार्रवाई मुख्य रूप से शाहनवाज राना के स्वामित्व वाली जंबूद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इम्पोर्ट्स लिमिटेड से जुड़े कथित फर्जी ITC मामले की जांच के तहत हुई।
सोमवार सुबह पांच बजे शुरू हुई थी छापेमारी
जानकारी के मुताबिक ED की टीम ने सोमवार सुबह करीब पांच बजे राना हाउस में जांच शुरू की थी। बैंक अधिकारियों की मौजूदगी में शुरू हुआ यह अभियान मंगलवार सुबह करीब सात बजे तक चला।
राना हाउस परिसर में कादिर राना, उनके छोटे भाई नूर सलीम उर्फ पप्पू राना और पूर्व विधायक शाहनवाज राना के आवास बताए गए हैं। जांच के दौरान अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की पड़ताल की।
पांच ठिकानों पर कारोबारियों से भी पूछताछ
जंबूद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इम्पोर्ट्स लिमिटेड से माल की खरीद-फरोख्त करने वाले कुछ कारोबारियों के परिसरों पर भी जांच की गई। इनमें संजय जैन, आकाश कुमार और अनिल तायल से जुड़े ठिकाने शामिल बताए गए हैं।
ED ने इन कारोबारियों के बयान भी दर्ज किए। वर्ष 2018-19 में जंबूद्वीप फर्म से कारोबार करने वाले सर्वोत्तम स्टील के संचालक संजय जैन के परिसर से बैंक खातों का लेखा-जोखा और कारोबारी इनवायस जब्त किए गए।
बिना माल की आपूर्ति के फर्जी ITC लेने का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार जंबूद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इम्पोर्ट्स लिमिटेड पर आरोप है कि फर्म ने वास्तविक माल की आपूर्ति किए बिना फर्जी बिल और ई-वे बिल तैयार कर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया।
आरोप है कि फर्जी तरीके से हासिल किए गए ITC को कारोबार से जुड़े दूसरे उद्यमियों तक भी पहुंचाया गया। ED ने इसी कथित वित्तीय लेनदेन को मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अपराध के तौर पर जांच के दायरे में लिया है।
सरकारी खजाने को 27.02 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा
ED की जांच के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2018-19 में जंबूद्वीप फर्म और उसके निदेशकों ने कथित तौर पर फर्जी चालान और जाली ई-वे बिलों का इस्तेमाल किया।
एजेंसी का आरोप है कि बिना वास्तविक माल की आपूर्ति के इनपुट टैक्स क्रेडिट का धोखाधड़ी से लाभ उठाया गया और इसे आगे भी पासऑन किया गया। इस कथित फर्जीवाड़े से सरकारी खजाने को 27.02 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात सामने आई है।
नकदी और डिजिटल साक्ष्यों पर ED की नजर
26 घंटे चली इस कार्रवाई में 3.80 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए हैं। इसके साथ ही दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, कारोबारी इनवायस और डिजिटल उपकरण भी जांच एजेंसी के कब्जे में लिए गए हैं।
ED अब बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल के जरिए कथित फर्जी ITC नेटवर्क से जुड़े लेनदेन और अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर सकती है।
आगे की जांच में सामने आ सकती हैं और जानकारियां
फर्जी ITC मामले में हुई इस कार्रवाई से जुड़े दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के बाद मामले में आगे की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। फिलहाल ED की कार्रवाई में नकदी और कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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