कच्चे तेल में गिरावट से संभला भारतीय रुपया, डॉलर के मुकाबले 95.40 पर पहुंचा

भारतीय रुपया आज डॉलर के मुकाबले 4 पैसे मजबूत होकर 95.40 पर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और RBI के कदमों से रुपये को सहारा मिला। जानें डॉलर-रुपये का ताजा हाल।

मुंबई। भारतीय रुपया गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोरी के साथ खुलने के बाद संभल गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.50 के स्तर पर खुला और शुरुआती कारोबार में 95.52 तक फिसल गया। हालांकि इसके बाद घरेलू मुद्रा ने तेजी से वापसी की और पिछले बंद स्तर के मुकाबले चार पैसे की मजबूती के साथ 95.40 रुपये प्रति डॉलर पर कारोबार करने लगी।

इससे पहले मंगलवार को रुपया 26 पैसे की मजबूती के साथ 95.44 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। बुधवार को ईद-ए-मिलाद के अवसर पर घरेलू विदेशी मुद्रा बाजार बंद था। ऐसे में गुरुवार को बाजार खुलने के बाद निवेशकों की नजर रुपये की चाल और वैश्विक संकेतों पर रही।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपये को राहत

भारतीय रुपये की मजबूती के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट को अहम वजह माना जा रहा है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड कई दिनों बाद 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आ गया है। शुरुआती कारोबार में इसकी कीमत 87.48 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई।

तेल की कीमतों में कमी भारत के लिए सकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने पर भारत के आयात बिल पर दबाव कम हो सकता है। इससे डॉलर की मांग घटने और रुपये को सहारा मिलने की संभावना रहती है।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर बातचीत का असर

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के पीछे ओमान और ईरान के बीच समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में अस्थायी शिपिंग कॉरिडोर बनाने को लेकर चल रही बातचीत को भी एक कारण बताया जा रहा है।

हालांकि इस संबंध में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन बातचीत से वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका कुछ कम हुई है। इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव देखने को मिला।

RBI के कदमों से भी रुपये को मिला सहारा

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक के कदमों का भी रुपये की स्थिति पर असर पड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार, आरबीआई ने जून में बाजार से करीब 56.1 करोड़ डॉलर की खरीदारी की थी। इससे पहले केंद्रीय बैंक रुपये को संभालने के लिए लगातार दो महीनों तक डॉलर की बिक्री कर रहा था।

इसके अलावा विदेशी मुद्रा प्रवासी जमा यानी FCNR-B, विदेशी वाणिज्यिक कर्ज यानी ECB और विदेशी संस्थागत लोन से जुड़ी विशेष योजनाओं के जरिए भी देश में विदेशी फंड का प्रवाह बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक 21 अगस्त तक इन माध्यमों से करीब 73 अरब डॉलर का विदेशी फंड भारत में आया।

31 अगस्त तक जारी है विशेष डिपॉजिट स्कीम

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विशेष डिपॉजिट स्कीम 31 अगस्त तक खुली है। ऐसे में निकट अवधि में रुपये को इससे भी कुछ सहारा मिल सकता है। विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक आने वाले दिनों में डॉलर के मुकाबले रुपया 95.15 से 95.20 के आसपास के स्तर पर रह सकता है।

हालांकि लंबी अवधि में रुपये पर दबाव की आशंका भी जताई जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले सप्ताहों में डॉलर के मुकाबले रुपया 96.20 से 96.50 के स्तर तक कमजोर हो सकता है।

डॉलर इंडेक्स में भी मामूली गिरावट

दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स भी गुरुवार को थोड़ा कमजोर रहा। कारोबार के दौरान डॉलर इंडेक्स 0.04 प्रतिशत गिरकर 99.14 पर आ गया।

डॉलर में मामूली कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भी भारतीय रुपये को शुरुआती दबाव से बाहर निकलने में मदद की।

शेयर बाजार में भी हल्की गिरावट

घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान मामूली गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स करीब 45 अंक गिरकर 77,422.70 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं एनएसई निफ्टी छह अंक की मामूली गिरावट के साथ 24,202.45 पर था।

दूसरी ओर विदेशी निवेशकों का रुख सकारात्मक रहा। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में 502.63 करोड़ रुपये की खरीदारी की।

आगे रुपये की चाल पर इन कारकों की रहेगी नजर

आने वाले दिनों में रुपये की दिशा तय करने में कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी पूंजी का प्रवाह, अमेरिकी डॉलर की वैश्विक स्थिति और RBI की नीतियां अहम भूमिका निभा सकती हैं। फिलहाल क्रूड ऑयल में नरमी और विदेशी फंड के प्रवाह से घरेलू मुद्रा को राहत मिली है, लेकिन लंबी अवधि में रुपये पर दबाव की संभावना को लेकर बाजार विशेषज्ञ सतर्क हैं।

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