हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद में उत्तराखंड BJP नेताओं पर जीरो FIR, बेंगलुरु पुलिस ने दर्ज किया केस

हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद में बेंगलुरु पुलिस ने उत्तराखंड BJP नेताओं के खिलाफ जीरो FIR दर्ज की है। मामला मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम से जुड़ा है।

बेंगलुरु: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद रामलीला मैदान में किए गए कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर विवाद अब पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है। बेंगलुरु पुलिस ने इस मामले में उत्तराखंड भाजपा नेताओं के खिलाफ जीरो FIR दर्ज की है। यह मामला 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खरगे के संबोधन के बाद 10 अगस्त को कथित तौर पर किए गए ‘शुद्धिकरण अनुष्ठान’ से जुड़ा है।

विधान सौधा पुलिस थाने में दर्ज जीरो FIR को आगे की जांच के लिए हल्द्वानी के संबंधित थाना क्षेत्र में भेजा जाएगा।

किन धाराओं में दर्ज हुई FIR?

पुलिस ने यह मामला Protection of Civil Rights Act, 1955 की धारा 7(1)(c), 7(1)(d) और 7(1)(e), SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989 की धारा 3(1)(u) और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196(1)(b) के तहत दर्ज किया है।

BNS की धारा 196(1)(b) अलग-अलग समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने से संबंधित है।

कांग्रेस के पूर्व ST विभाग उपाध्यक्ष ने दी शिकायत

यह शिकायत कांग्रेस के पूर्व ST विभाग उपाध्यक्ष टीआर रामप्पा ने 31 अगस्त को दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि भाजपा के कुछ सदस्यों ने 10 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम आयोजित किया।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस आयोजन का उद्देश्य यह संदेश देना था कि अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले मल्लिकार्जुन खरगे के वहां पहुंचने से स्थल ‘अपवित्र’ हो गया था।

शिकायत में इस कथित कृत्य को जातिगत और अपमानजनक बताते हुए इसे अस्पृश्यता से जुड़े कानूनों के तहत अपराध बताया गया है।

उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का भी नाम

शिकायत में उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का भी नाम शामिल किया गया है। आरोप है कि कार्यक्रम की आलोचना होने के बाद उन्होंने कथित ‘शुद्धिकरण’ का बचाव और समर्थन किया था।

हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।

क्या होती है जीरो FIR?

जीरो FIR किसी भी पुलिस थाने में दर्ज की जा सकती है, भले ही घटना उस थाने के अधिकार क्षेत्र में न हुई हो। FIR दर्ज होने के बाद इसे उस पुलिस थाने को भेज दिया जाता है, जिसके क्षेत्र में घटना हुई है।

इसी प्रक्रिया के तहत बेंगलुरु की विधान सौधा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दर्ज जीरो FIR को आगे की जांच के लिए हल्द्वानी के संबंधित थाना क्षेत्र में ट्रांसफर किया जाएगा।

पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक इस घटना के संबंध में देश के कम से कम आठ स्थानों पर इसी तरह की FIR दर्ज की जा चुकी हैं।

खरगे ने राज्यसभा में उठाया था मामला

‘शुद्धिकरण’ विवाद को लेकर मल्लिकार्जुन खरगे ने 13 अगस्त को राज्यसभा में भी मुद्दा उठाया था। इसके बाद उन्होंने राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा को पत्र लिखकर मामले में FIR दर्ज करने में हुई देरी पर सवाल उठाया था।

खरगे ने अपने पत्र में कहा था कि जिस स्थान पर उन्होंने रैली को संबोधित किया, वहां कथित ‘शुद्धिकरण’ की घटना संविधान की भावना और मानवीय मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने इसे अस्पृश्यता की प्रथा से भी जोड़ा था।

खरगे ने अंबेडकर के महाड़ सत्याग्रह का दिया था उदाहरण

कांग्रेस अध्यक्ष ने इस मुद्दे को डॉ. भीमराव आंबेडकर के 1927 के महाड़ सत्याग्रह से भी जोड़ा था। महाड़ सत्याग्रह का उद्देश्य वंचित वर्गों को महाराष्ट्र के महाड़ स्थित सार्वजनिक चावदार तालाब से पानी लेने का अधिकार दिलाना था।

खरगे ने इसी ऐतिहासिक संदर्भ के जरिए कथित ‘शुद्धिकरण’ की घटना पर सवाल उठाए थे।

राहुल गांधी के खिलाफ भी दर्ज हुई थी FIR

इस विवाद के बीच हल्द्वानी पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ भी FIR दर्ज की थी। यह FIR एक शिकायत के आधार पर दर्ज की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी ने आयोजकों द्वारा सामान्य धार्मिक अनुष्ठान बताए गए कार्यक्रम को जातिगत रंग दिया।

कांग्रेस ने राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR को कथित ‘शुद्धिकरण’ के मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है।

‘शुद्धिकरण’ विवाद ने बढ़ाया राजनीतिक टकराव

हल्द्वानी की घटना को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। कांग्रेस जहां इसे जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता से जोड़ रही है, वहीं आयोजन को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

अब बेंगलुरु में दर्ज जीरो FIR हल्द्वानी पुलिस को ट्रांसफर होने के बाद जांच आगे बढ़ेगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि कथित आयोजन के पीछे क्या उद्देश्य था और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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