यूपी में बड़े भूखंडों पर पार्क और खुला क्षेत्र अनिवार्य, नए भवन विकास नियमों में हरित क्षेत्र पर जोर

यूपी में नए भवन विकास नियमों के तहत 3000 वर्गमीटर से बड़े भूखंडों पर पार्क या खुला क्षेत्र अनिवार्य होगा। आवासीय में 15% और औद्योगिक क्षेत्र में 10% हिस्सा हरित क्षेत्र के लिए सुरक्षित रहेगा।

लखनऊ। प्रदेश में आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों के नियोजित विकास को बढ़ावा देने के लिए भवन निर्माण से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी है। नई एकीकृत भवन विकास उपविधि के प्रस्तावित प्रारूप में तीन हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भूखंडों पर पार्क या खुले क्षेत्र का प्रावधान अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही हरित पट्टी, पौधारोपण और खुले स्थान की न्यूनतम चौड़ाई व क्षेत्रफल के मानक भी निर्धारित किए गए हैं।

प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य बड़े भूखंडों पर अनियोजित निर्माण को रोकने के साथ ही आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों में हरित क्षेत्र तथा खुले स्थान को बढ़ावा देना है। नए प्रावधानों के अनुसार तीन हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भूखंडों में खुले स्थान की गणना टेलीस्कोपिक आधार पर की जाएगी। वहीं तीन हजार वर्गमीटर से कम के आवासीय और औद्योगिक भूखंडों पर पार्क या खुला क्षेत्र छोड़ना अनिवार्य नहीं होगा।

आवासीय क्षेत्र में 15 और औद्योगिक में 10 प्रतिशत हिस्सा

प्रस्तावित उपविधि में आवासीय क्षेत्रों के लिए कुल क्षेत्रफल का 15 प्रतिशत तथा औद्योगिक क्षेत्रों में 10 प्रतिशत हिस्सा पार्क या खुले स्थान के रूप में रखने का प्रावधान किया गया है। हालांकि तीन हजार वर्गमीटर से अधिक बड़े भूखंडों पर यह गणना टेलीस्कोपिक आधार पर होगी।

उदाहरण के तौर पर यदि किसी आवासीय भूखंड का क्षेत्रफल छह हजार वर्गमीटर है तो पहले तीन हजार वर्गमीटर को इस गणना से अलग रखा जाएगा। इसके बाद बचे तीन हजार वर्गमीटर के 15 प्रतिशत यानी 450 वर्गमीटर क्षेत्र को पार्क या हरित क्षेत्र के लिए सुरक्षित रखना होगा।

इसी तरह छह हजार वर्गमीटर के औद्योगिक भूखंड में पहले तीन हजार वर्गमीटर के बाद बचे तीन हजार वर्गमीटर के 10 प्रतिशत यानी 300 वर्गमीटर हिस्से को खुले क्षेत्र के लिए रखना होगा।

खुले स्थान की न्यूनतम चौड़ाई छह मीटर

नए प्रस्तावित मानकों में खुले स्थान के आकार को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत खुले क्षेत्र की न्यूनतम चौड़ाई छह मीटर और न्यूनतम क्षेत्रफल 200 वर्गमीटर होना जरूरी होगा। इसके अलावा भूखंड की सीमा से तीन मीटर स्थान पाथवे के लिए रखा जाएगा।

इससे बड़े भूखंडों में खुले स्थान और हरित क्षेत्र को केवल औपचारिकता के तौर पर छोड़ने के बजाय उसे उपयोगी और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।

सड़क किनारे भी पौधारोपण के मानक

प्रस्तावित भवन विकास उपविधि में सड़कों के किनारे पौधारोपण को भी नियोजित तरीके से करने की व्यवस्था की गई है। नौ से 12 मीटर चौड़ी सड़कों के एक तरफ पौधारोपण करना होगा, जबकि 12 मीटर से अधिक चौड़ी सड़कों के दोनों ओर पौधे लगाए जाएंगे।

पौधों के बीच अधिकतम दूरी भी निर्धारित की गई है। सड़क किनारे अधिकतम 10-10 मीटर की दूरी पर पौधे लगाने होंगे। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने के साथ-साथ सड़कों के किनारे व्यवस्थित हरियाली विकसित करना है।

औद्योगिक क्षेत्रों में प्रति हेक्टेयर 125 पौधे अनिवार्य

औद्योगिक योजनाओं में भी हरित क्षेत्र को लेकर सख्त प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। खुले क्षेत्र में प्रति हेक्टेयर कम से कम 125 पौधे लगाना अनिवार्य होगा। इससे औद्योगिक क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने पर जोर दिया जाएगा।

प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को आवासीय क्षेत्रों से अलग रखने के लिए उनके बीच हरित पट्टी विकसित करने का भी प्रावधान किया गया है। इसके तहत आवासीय और प्रदूषणकारी औद्योगिक गतिविधियों के बीच 15 प्रतिशत क्षेत्रफल की हरित पट्टी विकसित करनी होगी।

लैंडस्केप प्लान के बाद ही मिलेगा प्रमाणपत्र

नए नियमों में केवल पार्क या हरित क्षेत्र छोड़ना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसका नियोजित विकास भी जरूरी होगा। इसके लिए लैंडस्केप प्लान का पालन करना अनिवार्य किया गया है।

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार लैंडस्केप प्लान के अनुपालन के बाद ही भवन का मानचित्र स्वीकृत किया जाएगा और निर्माण पूरा होने पर कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। इस तरह भवन निर्माण की प्रक्रिया में शुरुआत से ही खुले स्थान, हरित क्षेत्र और पौधारोपण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है।

छोटे भूखंडों को नियम से रखा गया बाहर

प्रस्तावित प्रावधानों में छोटे भूखंडों को राहत भी दी गई है। तीन हजार वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल वाले आवासीय और औद्योगिक भूखंडों पर पार्क या खुला क्षेत्र छोड़ना अनिवार्य नहीं होगा। इस तरह नए नियमों का मुख्य जोर बड़े भूखंडों और बड़े स्तर पर होने वाले नियोजित विकास पर रहेगा।

नई एकीकृत भवन विकास उपविधि के लागू होने के बाद आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों में खुले स्थान, हरित पट्टी और पौधारोपण को लेकर एक समान मानक विकसित होने की उम्मीद है। इससे नियोजित विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया जाएगा।

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