
सीएम योगी आदित्यनाथ ने गणेश चतुर्थी और विश्वकर्मा पूजा पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए ‘वोकल फॉर लोकल’ को दैनिक व्यवहार में अपनाने की अपील की। उन्होंने स्थानीय कारीगरों, हस्तशिल्प, युवाओं, तकनीक और आत्मनिर्भरता के जरिए विकसित उत्तर प्रदेश का संकल्प दोहराया।
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गणेश चतुर्थी और 17 सितंबर को होने वाले भगवान विश्वकर्मा पूजन के अवसर पर प्रदेशवासियों को मंगलकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के नाम लिखी अपनी पाती में त्योहारों को सामाजिक एकता, ज्ञान, विवेक, कर्म और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को दोहराया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गणेशोत्सव ज्ञान और विवेक के साथ कर्म की प्रेरणा देता है, जबकि भगवान विश्वकर्मा की पूजा सृजन, कौशल और तकनीकी सामर्थ्य का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि इन दोनों पर्वों की भावना को आत्मसात कर उत्तर प्रदेश को कौशल और तकनीक के बल पर नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है।
गणेशोत्सव और विश्वकर्मा पूजा का बताया महत्व
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में कहा कि गणेशोत्सव भारतीय संस्कृति में ज्ञान और विवेक के महत्व को रेखांकित करता है। भगवान गणेश को बुद्धि और शुभारंभ का प्रतीक माना जाता है, वहीं भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के प्रथम शिल्पकार के रूप में पूजने की परंपरा रही है।
उन्होंने कहा कि 17 सितंबर को होने वाला विश्वकर्मा पूजन प्रदेश के कारीगरों, श्रमिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और सृजन से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है। यह पर्व मेहनत, हुनर और निर्माण की शक्ति का सम्मान करने का अवसर भी है।
‘विकसित उत्तर प्रदेश’ के संकल्प पर जोर
मुख्यमंत्री ने अपनी पाती में आत्मनिर्भर और विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की प्रगति केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी और स्थानीय क्षमताओं को बढ़ावा देने से संभव होगी।
योगी ने कहा कि ज्ञान, तकनीक, कौशल और आत्मनिर्भरता का संगम उत्तर प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। इसके लिए युवाओं, कारीगरों और स्थानीय उद्यमियों की क्षमता को आगे लाना जरूरी है।
‘वोकल फॉर लोकल’ को दैनिक व्यवहार में अपनाने की अपील
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के विजन को केवल नारे या विचार तक सीमित नहीं रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसे अपने दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों को प्राथमिकता देने और प्रदेश के कारीगरों तथा हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री के अनुसार स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्प को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में कारीगर, शिल्पकार और हस्तशिल्प से जुड़े परिवार अपनी पारंपरिक कला और हुनर के जरिए प्रदेश की पहचान को मजबूत कर रहे हैं। स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ने से इन परिवारों की आय के साथ-साथ उनके हुनर को भी नई पहचान मिल सकती है।
उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि त्योहारों और अन्य अवसरों पर स्थानीय कारीगरों एवं उत्पादकों द्वारा तैयार वस्तुओं को प्राथमिकता दें। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
ज्ञान और तकनीक के साथ आत्मनिर्भरता का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक दौर में विकास के लिए पारंपरिक कौशल के साथ नई तकनीक को अपनाना भी जरूरी है। उत्तर प्रदेश के युवाओं और उद्यमियों को आधुनिक तकनीकी ज्ञान से जोड़कर राज्य की आर्थिक क्षमता को और मजबूत किया जा सकता है।
उन्होंने ज्ञान, तकनीक और आत्मनिर्भरता को विकास का आधार बताते हुए कहा कि इन तीनों के समन्वय से प्रदेश प्रगति की नई मिसाल कायम कर सकता है।
प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने विकास के साथ पर्यावरण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें स्थानीय संसाधनों और प्राकृतिक संतुलन का ध्यान रखा जाए।
योगी ने कहा कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी, स्थानीय सामर्थ्य का उपयोग और आत्मनिर्भरता की भावना मिलकर विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
सामाजिक एकता को मजबूत करने का संदेश
मुख्यमंत्री ने त्योहारों को सामाजिक समरसता और एकता का माध्यम बताते हुए प्रदेशवासियों से मिल-जुलकर पर्व मनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व समाज को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा देने का काम करते हैं।
गणेश चतुर्थी और विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि त्योहारों की सकारात्मक भावना प्रदेश को विकास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक एकता की दिशा में आगे बढ़ाने की प्रेरणा देगी।
योगी की पाती का संदेश
मुख्यमंत्री की पाती का मूल संदेश परंपरा से आधुनिकता, स्थानीय हुनर से रोजगार और तकनीक से विकास को जोड़ना रहा। गणेश चतुर्थी के ज्ञान-विवेक और भगवान विश्वकर्मा के कौशल-सृजन के संदेश को मुख्यमंत्री ने आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के लक्ष्य से जोड़ा।
उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेशवासी स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को प्रोत्साहित करते हुए ‘वोकल फॉर लोकल’ को अपने व्यवहार में अपनाएंगे और ज्ञान, कौशल एवं तकनीक के बल पर उत्तर प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहभागी बनेंगे।







