“केरल विधानसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित हुआ। प्रस्ताव में मतदाता सूची तैयार करने वाले सॉफ्टवेयर की कथित गड़बड़ियां दूर करने और योग्य नागरिकों के मतदान अधिकार बहाल करने की मांग की गई।“
तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग से संबंधित प्रस्ताव पारित होने की खबर सामने आई है। प्रस्ताव में मतदाता सूची तैयार करने और उसका सत्यापन करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। इसमें केंद्र सरकार से मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग करने के साथ योग्य नागरिकों के मतदान अधिकार बहाल करने की बात कही गई है।
ETV भारत की 12 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्ताव में मतदाता सूची से जुड़े फॉर्म 6 और फॉर्म 7 में किए गए बदलावों तथा चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर गंभीर चिंताएं जताई गईं। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि मतदाता सूची से संबंधित तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण पात्र नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
मतदाता सूची के सॉफ्टवेयर में गड़बड़ियां दूर करने की मांग
प्रस्ताव में मतदाता सूची तैयार करने और मतदाताओं के विवरण का सत्यापन करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सॉफ्टवेयर की कथित खामियों को ठीक करने की मांग की गई है। इसमें कहा गया कि सभी पात्र नागरिकों को मतदान का अधिकार तत्काल बहाल किया जाना चाहिए।
प्रस्ताव में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 का उल्लेख करते हुए चुनावी सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। इसमें यह भी कहा गया कि मतदाता सूची से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
हालांकि, सॉफ्टवेयर में कथित गड़बड़ियों और मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित तकनीकी दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।
मतदान के अधिकार और संविधान का दिया गया हवाला
प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद 326 का उल्लेख किया गया। इस अनुच्छेद के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों में वयस्क मताधिकार का संवैधानिक आधार निर्धारित है।
प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि योग्य नागरिकों को मतदाता सूची से बाहर रखने से उनके लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसमें पिछड़े समुदायों, अल्पसंख्यकों, प्रवासी मजदूरों और युवा मतदाताओं पर संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई गई।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि प्रस्ताव में व्यक्त किए गए आरोप और निष्कर्ष विधानसभा में रखे गए राजनीतिक तथा विधायी पक्ष को दर्शाते हैं। किसी विशिष्ट मामले में कानूनी उल्लंघन हुआ है या नहीं, इसका निर्धारण संबंधित तथ्यों और सक्षम संस्थाओं की जांच के आधार पर होगा।
सदन में संशोधन प्रस्तावों पर भी हुई चर्चा
रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी विधायक बी. गोपकुमार और वी. मुरलीधरन ने प्रस्ताव में संशोधन सुझाए। साजी चेरियन की ओर से भी बदलाव का सुझाव दिया गया, जिसमें मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के बाहर होने और ‘ECIDOT NET’ नामक सॉफ्टवेयर का उल्लेख किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने बीजेपी सदस्यों और दो सीपीएम विधायकों के संशोधन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया। वहीं, विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन की ओर से सुझाए गए मौखिक बदलाव को स्वीकार किए जाने की बात कही गई। इस बदलाव के तहत मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों की संख्या बताने वाले वाक्यांश में संशोधन किया गया।
इन संशोधनों और संख्या संबंधी दावों की सटीक पुष्टि के लिए विधानसभा की आधिकारिक कार्यवाही तथा पारित प्रस्ताव का मूल पाठ देखना जरूरी है।
केंद्र सरकार से मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग
प्रस्ताव में केंद्र सरकार से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जल्द पद से हटाने की मांग की गई है। इसमें चुनाव आयोग के कुछ निर्णयों और आयोग के सदस्यों के बीच कथित असहमति का भी उल्लेख किया गया है।
इस कदम को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के मुद्दे पर राजनीतिक विवाद के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, विधानसभा में प्रस्ताव पारित होना अपने आप में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का अंतिम निर्णय नहीं है। आगे की कार्रवाई संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही होगी।
आगे क्या होगा?
अब इस प्रस्ताव के आधिकारिक पाठ, केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और चुनाव आयोग के पक्ष पर नजर रहेगी। मतदाता सूची से संबंधित आरोपों का आकलन करने के लिए आधिकारिक आंकड़े, शिकायतों का विवरण और आयोग की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होंगे।
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