लॉरेंस बिश्नोई पर जेल में और कड़ा पहरा: साबरमती जेल के हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक ‘200 खोली’ में किया गया शिफ्ट

“गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल के हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक ‘200 खोली’ में शिफ्ट किया गया है। जानिए उसकी नई बैरक, सुरक्षा व्यवस्था और जेल में बदली दिनचर्या के बारे में।“

देश के चर्चित गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की जेल में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। उसे अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल के विशेष हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक में स्थानांतरित किया गया है। इस ब्लॉक को ‘दो सौ खोली’ (Block 200) के नाम से जाना जाता है। यहां आतंकवाद और अन्य गंभीर अपराधों में शामिल कैदियों को रखा जाता है। जेल प्रशासन का यह कदम लॉरेंस की गतिविधियों को सीमित करने और उसके संपर्कों पर नियंत्रण रखने की सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, लॉरेंस को पहले साबरमती जेल के ‘दस खोली’ में रखा गया था। अब उसे उससे अधिक क्षमता वाले विशेष सुरक्षा ब्लॉक में स्थानांतरित किया गया है। इस ब्लॉक में कैदियों की आवाजाही और आपसी संपर्क को सीमित रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। लॉरेंस की कोठरी करीब 7.5×11 फीट की बताई जा रही है।

क्या है साबरमती जेल का ‘200 खोली’ हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक?

साबरमती सेंट्रल जेल का ब्लॉक 200 एक अत्यधिक सुरक्षित क्षेत्र माना जाता है। इसमें करीब 200 कैदियों को रखने की क्षमता है। इस ब्लॉक को चार अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है। प्रत्येक हिस्से में लगभग 50 कैदियों को रखने की व्यवस्था बताई गई है।

इसका उद्देश्य कैदियों के बीच अनावश्यक संपर्क रोकना और उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखना है। इस व्यवस्था में एक सेल से दूसरे सेल तक जाने की स्वतंत्रता सीमित रहती है।

लॉरेंस बिश्नोई को इसी विशेष सुरक्षा वाले ब्लॉक में रखा गया है। यहां गंभीर आपराधिक मामलों और आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े दोषियों को भी बंद रखा जाता है। ऐसे में उसकी सुरक्षा और निगरानी के लिए जेल प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।

जेल के अंदर से गैंग चलाने की गतिविधियों पर लगाम लगाने की कोशिश

लॉरेंस बिश्नोई पर कई गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल होने और संगठित अपराध का नेटवर्क चलाने के आरोप हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, पहले उसके जेल में रहते हुए भी रंगदारी मांगने, कारोबारियों को धमकी देने और अपने नेटवर्क के जरिए आपराधिक गतिविधियों को संचालित करने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

बताया जाता है कि पहले जेल के भीतर से ही धमकी भरे ऑडियो और वीडियो संदेश भेजे जाने तथा अलग-अलग जेलों से इंटरव्यू दिए जाने के मामले सामने आए थे। इन घटनाओं ने जेलों की सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों के बाहरी संपर्कों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

हालांकि, जांचकर्ताओं के अनुसार पिछले करीब दो वर्षों में लॉरेंस की ओर से सीधे कॉल या बातचीत किए जाने का कोई मामला सामने नहीं आया है। अब उसे हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक में रखने का उद्देश्य उसके बाहरी संपर्कों और संभावित गतिविधियों को और सीमित करना बताया जा रहा है।

दस खोली से 200 खोली में पहुंचा लॉरेंस

साबरमती जेल में स्थानांतरण से पहले लॉरेंस बिश्नोई को ‘दस खोली’ नामक हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र में रखा गया था। इस ब्लॉक में केवल 10 कैदियों को रखने की व्यवस्था बताई जाती है।

इससे पहले लॉरेंस तिहाड़ जेल और पंजाब की अलग-अलग जेलों में भी रह चुका है। जेलों में रहने के दौरान उसके नाम से कारोबारियों को धमकी देने वाली रिकॉर्डिंग और अन्य गैंगस्टरों के साथ कथित बातचीत सामने आने की खबरें भी आई थीं।

अब उसे ब्लॉक 200 में स्थानांतरित किए जाने के बाद उसकी निगरानी और कड़ी कर दी गई है। बाहरी लोगों से मिलने-जुलने और डिजिटल माध्यमों तक उसकी पहुंच सीमित बताई जा रही है।

कैसी जिंदगी जी रहा है लॉरेंस बिश्नोई?

रिपोर्ट के अनुसार, जेल के भीतर लॉरेंस बिश्नोई का दैनिक जीवन काफी अनुशासित है। वह अपनी कोठरी में अकेले समय बिताता है और सुबह ध्यान करने की दिनचर्या अपनाता है।

बताया जाता है कि वह नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करता है, व्रत रखता है और शाकाहारी भोजन करता है। उसकी दिनचर्या में धार्मिक गतिविधियों और व्यक्तिगत अनुशासन का विशेष स्थान बताया गया है।

जेल के बाहर की दुनिया से उसका संपर्क बेहद सीमित है। वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालती सुनवाई में शामिल होता है और अपने वकील से कानूनी मामलों पर चर्चा करता है। उसकी अन्य गतिविधियों पर जेल प्रशासन की निगरानी रहती है।

जेल में बंद होने के बावजूद विदेशों में सक्रिय बताया जा रहा सिंडिकेट

लॉरेंस बिश्नोई भले ही साबरमती जेल में कड़ी सुरक्षा के बीच बंद है, लेकिन उसके आपराधिक नेटवर्क को लेकर जांच एजेंसियों की चिंता बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, उसका सिंडिकेट अलग-अलग देशों में मौजूद लोगों और विकेंद्रीकृत कमांड व्यवस्था के जरिए काम करता है।

इस नेटवर्क में उसके करीबी गुर्गों की भूमिका अहम बताई जाती है। विदेशों में मौजूद कुछ सहयोगियों के जरिए नए लोगों को जोड़ने, उन्हें जिम्मेदारियां सौंपने और आपराधिक गतिविधियों से जुड़े संसाधनों का समन्वय करने की बात सामने आई है।

इस कथित नेटवर्क को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं। हालांकि, विदेशों में सक्रिय बताए जा रहे नेटवर्क की वास्तविक संरचना और मौजूदा गतिविधियों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों के आधिकारिक बयानों से ही की जा सकती है।

सुरक्षा एजेंसियों की नजर, जेल प्रशासन की चुनौती बढ़ी

लॉरेंस बिश्नोई को हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक में स्थानांतरित किया जाना जेल के भीतर उसकी गतिविधियों को नियंत्रित रखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। संगठित अपराध से जुड़े मामलों में जेल में बंद आरोपियों के बाहरी संपर्कों पर नियंत्रण रखना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती रहा है।

ऐसे में साबरमती जेल प्रशासन के सामने दोहरी जिम्मेदारी है। एक तरफ लॉरेंस की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है, वहीं दूसरी तरफ उसके संभावित बाहरी संपर्कों और आपराधिक नेटवर्क के संचालन पर रोक लगाने के लिए निगरानी व्यवस्था बनाए रखनी है।

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