पीएम मोदी की डिग्री मामले में केजरीवाल को ₹25 हजार जुर्माना देने पर चुनौती, सिंघवी बोले- याचिकाकर्ता नहीं थे AAP नेता

पीएम मोदी की डिग्री मामले में अरविंद केजरीवाल पर लगाए गए 25 हजार रुपये के जुर्माने को गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि केजरीवाल मूल याचिकाकर्ता नहीं, बल्कि प्रतिवादी थे।

अहमदाबाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़े मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर लगाए गए 25 हजार रुपये के जुर्माने को गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मंगलवार को केजरीवाल की ओर से अदालत में दलील पेश करते हुए कहा कि उनके खिलाफ की गई टिप्पणियां और जुर्माना दोनों हटाए जाने चाहिए।

सिंघवी ने सिंगल जज के आदेश में की गई टिप्पणियों को “अनुचित, अनावश्यक और कानूनी रूप से गलत” बताया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल न तो इस मामले के मूल याचिकाकर्ता थे और न ही उन्होंने प्रधानमंत्री की डिग्री को लेकर सूचना हासिल करने के लिए RTI दाखिल की थी।

केजरीवाल याचिकाकर्ता नहीं, प्रतिवादी थे: सिंघवी

सिंघवी ने हाई कोर्ट को बताया कि केजरीवाल इस मामले में मूल आवेदक नहीं बल्कि प्रतिवादी थे। ऐसे में सिंगल जज की ओर से यह कहना कि केजरीवाल मामले को लगातार आगे बढ़ा रहे थे, सही नहीं है।

उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने मूल रूप से प्रक्रिया शुरू की थी, वह केजरीवाल नहीं थे। इसलिए उनके द्वारा मामले को आगे बढ़ाने की बात कहना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं है।

RTI भी केजरीवाल ने दाखिल नहीं की

केजरीवाल की ओर से पेश हुए सिंघवी ने यह भी तर्क दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से संबंधित जानकारी हासिल करने के लिए RTI आवेदन भी केजरीवाल ने दाखिल नहीं किया था।

उन्होंने अदालत को बताया कि सूचना का मामला RTI के जरिए सामने आया था, लेकिन केजरीवाल ने व्यक्तिगत रूप से डिग्री से संबंधित कोई जानकारी RTI के माध्यम से नहीं मांगी थी। इसके बावजूद उन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

डिग्री विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध होने के दावे पर भी आपत्ति

सिंगल जज के आदेश में कहा गया था कि प्रधानमंत्री की डिग्री विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है और स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद केजरीवाल मामले को आगे बढ़ाते रहे।

सिंघवी ने इस दलील का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि संबंधित डिग्री अभी भी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इस आधार पर की गई अदालत की टिप्पणी भी सही नहीं है।

जुर्माने का उचित आधार नहीं: सिंघवी

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि केजरीवाल पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का कोई उचित कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने जुर्माना हटाने के साथ-साथ आदेश में की गई संबंधित टिप्पणियों को भी रिकॉर्ड से हटाने की मांग की।

सिंघवी ने यह भी बताया कि केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की थी। केजरीवाल ने RTI के तहत प्रधानमंत्री की डिग्री से जुड़ी जानकारी मांगने के लिए कोई आवेदन नहीं किया था। उन्हें केवल मामले में प्रतिवादी बनाया गया था।

केंद्र सरकार ने मांगा समय

सिंघवी की दलीलें सुनने के बाद केंद्र सरकार की ओर से अदालत से अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा गया। मामले की अगली सुनवाई बुधवार, 2 सितंबर को होने की बात कही गई है।

अब अगली सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से दी जाने वाली दलीलों पर सबकी नजर रहेगी। हाई कोर्ट यह भी देखेगा कि केजरीवाल पर लगाए गए जुर्माने और आदेश में की गई टिप्पणियों को हटाने की उनकी मांग पर क्या रुख अपनाया जाता है।

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