
“लखनऊ के SGPGI में ढाई साल की बच्ची का कोलेस्ट्रॉल 854 mg/dL तक पहुंच गया था। डॉक्टरों ने 20 सप्ताह तक प्लाज्मा एक्सचेंज कर कोलेस्ट्रॉल का स्तर 70 फीसदी घटाकर 215 mg/dL किया।“
लखनऊ। ढाई साल की एक बच्ची के शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य से कई गुना बढ़ जाने के बाद संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) के डॉक्टरों ने जटिल उपचार के जरिए उसकी जान बचाई। बच्ची के खून में कोलेस्ट्रॉल का स्तर 854 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर तक पहुंच गया था, जबकि सामान्य स्तर 200 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम माना जाता है।
कम उम्र होने के कारण बच्ची के लिए कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाओं के विकल्प भी सीमित थे। ऐसे में डॉक्टरों ने उसके लिए विशेष प्लाज्मा एक्सचेंज प्रोटोकॉल तैयार किया। करीब 20 सप्ताह तक हर सप्ताह यह प्रक्रिया की गई। उपचार के बाद बच्ची का कोलेस्ट्रॉल स्तर करीब 70 फीसदी घटकर 215 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर रह गया।
दूसरी बीमारी के इलाज के दौरान सामने आया मामला
ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. भरत सिंह के मुताबिक, बच्ची मार्च में किसी अन्य आनुवंशिक बीमारी के उपचार के लिए पीजीआई आई थी। जांच के दौरान उसके शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बेहद अधिक पाई गई।
डॉक्टरों के मुताबिक, इतनी कम उम्र में सामान्य दवाओं के विकल्प सीमित थे। एक अन्य विकल्प एलडीएल अफेरेसिस था, लेकिन लंबे समय तक इसे जारी रखना परिवार के लिए काफी महंगा होता। इसके बाद बच्ची की उम्र और जरूरत को ध्यान में रखते हुए विशेष प्लाज्मा एक्सचेंज प्रोटोकॉल तैयार किया गया।
20 सप्ताह तक हर सप्ताह किया गया प्लाज्मा एक्सचेंज
बच्ची का करीब 20 सप्ताह तक लगातार उपचार किया गया। इस दौरान प्रत्येक सप्ताह प्लाज्मा एक्सचेंज की प्रक्रिया अपनाई गई। उपचार के बाद कोलेस्ट्रॉल के स्तर में करीब 70 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
डॉक्टरों के अनुसार, इलाज के दौरान बच्ची को कोई बड़ी चिकित्सकीय जटिलता नहीं हुई। शरीर और त्वचा पर जमा अतिरिक्त वसा भी धीरे-धीरे कम होने लगी। डॉक्टरों ने इसे बेहद कम उम्र में किए गए जटिल उपचार की महत्वपूर्ण सफलता बताया है।
कई विशेषज्ञों की टीम ने संभाला इलाज
बच्ची के उपचार में ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की टीम के साथ डॉ. अमिता मोइरांगथेम, विभागाध्यक्ष प्रो. प्रीति एल्हेंस, प्रो. अनुपम वर्मा और डॉ. अजय जोसेफ शामिल रहे।
परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए अस्पताल में कुछ प्रक्रियाएं निःशुल्क भी की गईं। पीजीआई निदेशक पद्मश्री प्रो. आरके धीमान ने बच्ची के सफल उपचार के लिए पूरी चिकित्सा टीम की सराहना की।
क्या है होमोजाइगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया?
होमोजाइगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (HoFH) एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है। इसमें शरीर खून से खराब यानी एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को पर्याप्त मात्रा में बाहर नहीं निकाल पाता। इसके कारण कम उम्र में ही रक्त वाहिकाओं में कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है।
इस बीमारी में हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज, हार्ट वाल्व से जुड़ी समस्या और कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। गंभीर मामलों में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए विशेष उपचार की जरूरत पड़ती है।
कैसे काम करता है प्लाज्मा एक्सचेंज?
प्लाज्मा एक्सचेंज में मरीज के खून से प्लाज्मा को अलग कर बाहर निकाला जाता है और उसकी जगह उपयुक्त फ्लूइड दिया जाता है। इसके बाद खून के जरूरी घटकों को शरीर में वापस पहुंचाया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य रक्त में मौजूद हानिकारक तत्वों की मात्रा को कम करना होता है।
पीजीआई की टीम के अनुसार, इस बच्ची के मामले में उम्र को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए विशेष प्रोटोकॉल से कोलेस्ट्रॉल को काफी हद तक नियंत्रित करने में सफलता मिली।
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