87 की उम्र में नहीं रहे दिग्गज गुजराती संगीतकार गौरांग व्यास, PM मोदी ने जताया दुख; 100 से अधिक फिल्मों में दिया संगीत

87 वर्ष की उम्र में गुजराती संगीतकार गौरांग व्यास का अहमदाबाद में निधन हो गया। PM मोदी ने श्रद्धांजलि दी। गौरांग व्यास ने 100 से अधिक फिल्मों में संगीत दिया और गुजराती संगीत को समृद्ध किया।

अहमदाबाद: गुजराती सिनेमा और संगीत जगत के दिग्गज संगीतकार, गायक एवं अरेंजर गौरांग व्यास का 87 वर्ष की उम्र में अहमदाबाद में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से गुजराती फिल्म और संगीत जगत में शोक की लहर है। उनकी अंतिम यात्रा गुरुवार को अहमदाबाद के अंबावाड़ी स्थित उनके आवास से सुबह 11:30 बजे निकाली जाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गौरांग व्यास के निधन पर शोक व्यक्त किया। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गौरांग व्यास के साथ अपनी तस्वीर साझा करते हुए उनके निधन को गुजराती संगीत जगत के लिए बड़ी क्षति बताया। उन्होंने कहा कि गौरांग व्यास ने अपने पिता और मशहूर संगीतकार-गीतकार अविनाश व्यास की समृद्ध संगीत परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपनी अलग पहचान बनाई।

गुजराती संगीत को समृद्ध करने में अहम योगदान

प्रधानमंत्री मोदी ने गौरांग व्यास के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने गुजरात के सांस्कृतिक और संगीत जगत को समृद्ध किया। पीएम ने उनके परिवार और उनके असंख्य प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गुजराती संगीत के लिए गौरांग व्यास का अमूल्य योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने भी संगीतकार के निधन पर शोक जताया। उन्होंने गौरांग व्यास को गुजराती फिल्मों और लाइट म्यूजिक के क्षेत्र का प्रमुख प्रयोगधर्मी संगीतकार बताते हुए कहा कि उनके कालजयी संगीत ने गुजराती कला और संस्कृति को समृद्ध किया।

पिता से मिली संगीत की विरासत

गौरांग अविनाश व्यास का जन्म मुंबई में हुआ था। उनका बचपन संगीत के माहौल में बीता। उनके पिता अविनाश व्यास गुजराती संगीत के सबसे प्रभावशाली नामों में शामिल रहे। गौरांग व्यास ने अपने पिता की संगीत विरासत को आगे बढ़ाया और कई दशकों तक गुजराती फिल्म एवं संगीत जगत में सक्रिय रहे।

उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत पिता के सहायक के तौर पर फिल्म ‘जेसल तोरल’ से की थी। इसके बाद उन्होंने ‘लाखो फुलानी’ से स्वतंत्र संगीत निर्देशक के रूप में अपनी पहचान बनाई।

100 से ज्यादा फिल्मों में दिया संगीत

गौरांग व्यास ने अपने लंबे करियर में 100 से अधिक फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया। उनकी चर्चित फिल्मों में केतन मेहता की ‘भावनी भवई’, ‘मनियारो’, ‘नसीब नी बलिहारी’, ‘पारकी थापन’, ‘लीलुड़ी धरती’ और ‘मैयारमन मंडु नथी लागतु’ जैसी फिल्में शामिल हैं।

अपने संगीत सफर के दौरान उन्हें देश के कई दिग्गज पार्श्व गायकों के साथ काम करने का अवसर मिला। इनमें लता मंगेशकर, आशा भोसले, किशोर कुमार, मन्ना डे और महेंद्र कपूर जैसे प्रसिद्ध नाम शामिल हैं।

ये गीत रहे खासे लोकप्रिय

गौरांग व्यास के कई गीत गुजराती संगीत प्रेमियों के बीच लंबे समय तक लोकप्रिय रहे। उनके यादगार गीतों में ‘मनियारो ते हालू हालू थई रे वियो’ और ‘हू तू तू तू, जामी रमतनी ऋतु’ जैसे गीत शामिल हैं।

फिल्मी संगीत के अलावा उन्होंने गुजराती भक्ति और लोक संगीत में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके प्रमुख एल्बमों में ‘जालारामनी झुंपड़ी’, ‘भजन अनमोल’, ‘गंगा सतीना भजनों’, ‘कहत कबीर’ और ‘नॉन-स्टॉप डांडिया-रास’ शामिल हैं।

करीब 11 बार मिला राज्य स्तरीय सम्मान

गौरांग व्यास के संगीत योगदान को कई स्तरों पर सम्मान मिला। उन्हें करीब 11 बार राज्य स्तरीय सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

वर्ष 2022 में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया था। इसके अलावा वर्ष 2024 में गुजरात स्टेट म्यूजिक एकेडमी और गुजरात टूरिज्म की ओर से भी उन्हें सम्मानित किया गया। उनके निधन के साथ गुजराती संगीत जगत ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसने कई दशकों तक अपनी धुनों के जरिए क्षेत्रीय संगीत को नई पहचान दिलाई।

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