मोदी से मिले बेल्जियम के पीएम, जानिए क्यों इजरायल के यहूदी समुदाय से मांगनी पड़ी थी माफी

बेल्जियम के पीएम बार्ट डी वेवर भारत दौरे पर PM मोदी से मिले। वे कभी यहूदियों पर विवादित टिप्पणी को लेकर माफी मांग चुके हैं। जानिए एंटवर्प और भारत के हीरा कारोबार से उनका कनेक्शन।

नई दिल्ली। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर तीन दिवसीय भारत दौरे पर हैं। गुरुवार को उन्होंने नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच भारत-बेल्जियम संबंधों के विभिन्न पहलुओं के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दोनों नेताओं की मुलाकात की जानकारी साझा की।

बार्ट डी वेवर फरवरी 2025 से बेल्जियम के प्रधानमंत्री हैं। इससे पहले वह लंबे समय तक बेल्जियम की प्रमुख फ्लेमिश राष्ट्रवादी पार्टी न्यू फ्लेमिश एलायंस (N-VA) के नेता रहे। जनवरी 2013 से फरवरी 2025 तक वह एंटवर्प शहर के मेयर भी रहे। एंटवर्प को दुनिया के सबसे बड़े हीरा व्यापार केंद्रों में से एक माना जाता है और यहां भारतीय कारोबारियों, विशेषकर गुजरातियों और जैन समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

2007 में यहूदियों से जुड़ी टिप्पणी पर मांगनी पड़ी थी माफी

बार्ट डी वेवर का नाम वर्ष 2007 में एक विवाद से भी जुड़ा रहा है। उस समय एंटवर्प के तत्कालीन मेयर पैट्रिक जान्सेंस ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहूदियों को देश से बाहर भेजे जाने में शहर की भूमिका के लिए माफी मांगी थी।

इसके बाद डी वेवर ने उस समय के प्रशासन का बचाव करते हुए कहा था कि एंटवर्प ने यहूदियों को बाहर भेजने का काम नहीं किया था, बल्कि शहर खुद नाजी कब्जे का शिकार था। उन्होंने उस दौर के अधिकारियों द्वारा लिए गए फैसलों का भी बचाव किया था।

उनकी इस टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद डी वेवर ने अपने बयान के लिए माफी मांगी। उन्होंने एंटवर्प के यहूदी समुदाय के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से माफी मांगी और बेल्जियम के अखबार ‘डी स्टैंडर्ड’ में खुले पत्र के जरिए भी अपनी सफाई दी।

एंटवर्प के लंबे समय तक मेयर रहे डी वेवर

बार्ट डी वेवर ने जनवरी 2013 में एंटवर्प के मेयर पद की जिम्मेदारी संभाली थी। वह शहर के लंबे समय तक मेयर रहे और फरवरी 2025 तक इस पद पर रहे। उनके नेतृत्व में N-VA ने बेल्जियम की राजनीति में मजबूत स्थिति बनाई।

2024 के संघीय चुनाव के बाद बेल्जियम के राजा फिलिप ने डी वेवर को नई सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद फरवरी 2025 में उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

राजनीतिक तौर पर डी वेवर खुद को कंजर्वेटिव और फ्लेमिश राष्ट्रवादी बताते रहे हैं। उनकी राजनीतिक सोच पर एडमंड बर्क, मार्गरेट थैचर और अर्थशास्त्री फ्रेडरिक हायेक जैसे विचारकों का प्रभाव बताया जाता है।

एंटवर्प की ‘हीरा मंडी’ में भारतीय कारोबारियों का दबदबा

एंटवर्प को दुनिया की प्रमुख हीरा मंडियों में गिना जाता है। शहर का डायमंड डिस्ट्रिक्ट एंटवर्प सेंट्रल रेलवे स्टेशन के आसपास करीब एक वर्ग मील के क्षेत्र में फैला है। यहां बड़ी संख्या में हीरा कंपनियां और प्रमुख डायमंड एक्सचेंज संचालित होते हैं।

एंटवर्प के वैश्विक हीरा कारोबार में भारतीय कारोबारियों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। खासकर गुजरात से जुड़े व्यापारी और जैन कारोबारी लंबे समय से इस कारोबार का अहम हिस्सा रहे हैं। भारत के सूरत समेत कई शहरों का एंटवर्प के हीरा कारोबार से गहरा व्यावसायिक संबंध है।

भारत-बेल्जियम व्यापार में हीरा कारोबार अहम

भारत और बेल्जियम के बीच संबंध कई दशक पुराने हैं। सितंबर 1947 में स्वतंत्र भारत के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले शुरुआती यूरोपीय देशों में बेल्जियम शामिल था।

दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध भी लगातार मजबूत हुए हैं। वर्ष 2025-26 में भारत और बेल्जियम के बीच द्विपक्षीय व्यापार 13 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया। एंटवर्प का हीरा कारोबार इस व्यापारिक रिश्ते का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

भारत में बेल्जियम से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी हुआ है। अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 के बीच बेल्जियम से भारत में करीब 4.2 अरब डॉलर का FDI प्रवाह दर्ज किया गया। दोनों देश विज्ञान, तकनीक, नवाचार, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और स्थिरता जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं।

बेल्जियम में करीब 35 हजार भारतीय

भारतीय समुदाय भी भारत-बेल्जियम संबंधों की महत्वपूर्ण कड़ी है। बेल्जियम में भारतीय मूल के करीब 35 हजार लोग रहते हैं। इनमें गुजरात और भारत के अन्य हिस्सों से पहुंचे लोगों की बड़ी संख्या है। भारतीय समुदाय बेल्जियम के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में योगदान दे रहा है।

ऐसे समय में बार्ट डी वेवर का भारत दौरा दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। पीएम मोदी के साथ उनकी मुलाकात में द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत करने के साथ साझा हितों से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।

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