लखनऊ एमएलसी चुनाव में सपा का बड़ा उलटफेर: कांति सिंह ने भाजपा से छीनी स्नातक सीट, उमेश द्विवेदी की शिक्षक सीट पर हैट्रिक

“UP MLC Election Results 2026: लखनऊ स्नातक सीट पर सपा की कांति सिंह ने भाजपा के अवनीश सिंह को 17,127 वोटों से हराया। शिक्षक सीट पर भाजपा के उमेश द्विवेदी ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की।“

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 सीटों के लिए हुए द्विवार्षिक चुनाव के नतीजों में लखनऊ की दोनों सीटों पर भाजपा और समाजवादी पार्टी ने अपनी ताकत दिखाई। लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी कांति सिंह ने शानदार जीत दर्ज करते हुए भाजपा से सीट छीन ली। वहीं, लखनऊ शिक्षक खंड में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी उमेश द्विवेदी ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल कर अपनी राजनीतिक पकड़ बरकरार रखी।

इन दोनों परिणामों को प्रदेश की राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर स्नातक सीट पर भाजपा की हार और सपा की जीत ने आगामी राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है।

कांति सिंह ने 17,127 मतों से भाजपा प्रत्याशी को हराया

लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी कांति सिंह ने भाजपा के उम्मीदवार इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह को 17,127 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया। अंतिम और नौवें चक्र की मतगणना पूरी होने के बाद कांति सिंह को कुल 56,905 मत प्राप्त हुए, जबकि भाजपा प्रत्याशी अवनीश कुमार सिंह को 39,778 मत मिले।

इस तरह कांति सिंह ने शुरुआत से बनाई गई अपनी बढ़त को आखिरी चक्र तक कायम रखा और जीत अपने नाम कर ली। मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने उनकी जीत की आधिकारिक घोषणा की।

इस सीट पर निर्दलीय प्रत्याशियों का भी लंबे समय तक प्रभाव रहा है, लेकिन इस बार समाजवादी पार्टी ने भाजपा को पीछे छोड़ते हुए सीट पर कब्जा जमा लिया।

शुरुआती चक्र से ही आगे रहीं सपा प्रत्याशी

मतगणना के दौरान कांति सिंह लगातार भाजपा प्रत्याशी पर भारी पड़ती नजर आईं। पांचवें चक्र में उन्हें 32,228 मत मिले थे, जबकि भाजपा के अवनीश कुमार सिंह को 21,843 मत प्राप्त हुए थे। इस समय दोनों के बीच 10,385 मतों का अंतर था।

छठे चक्र में कांति सिंह की बढ़त बढ़कर 12,225 मत हो गई। सातवें चक्र में उन्हें 45,221 मत मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी 30,986 मतों पर सिमट गए। इसके बाद आठवें चक्र में कांति सिंह को 51,168 और अवनीश कुमार सिंह को 36,313 मत प्राप्त हुए। दोनों के बीच अंतर बढ़कर 14,855 मत हो गया।

अंतिम चक्र में यह बढ़त और बढ़ी तथा कांति सिंह ने 17,127 मतों से जीत दर्ज कर ली। मतगणना स्थल के बाहर परिणाम घोषित होते ही सपा कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला। समर्थकों ने नारेबाजी कर जीत का जश्न मनाया।

निर्दलीय प्रत्याशी विजय कुमार बंधु तीसरे स्थान पर

लखनऊ स्नातक सीट पर भाजपा और सपा के बीच मुख्य मुकाबले के अलावा निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी चुनाव में भाग्य आजमाया। उपलब्ध परिणामों के अनुसार, निर्दलीय प्रत्याशी विजय कुमार बंधु नौ हजार से अधिक मत प्राप्त कर तीसरे स्थान पर रहे। वहीं, कांती देवी को 1,600 से अधिक मत मिले।

इस परिणाम से स्पष्ट हुआ कि इस बार स्नातक मतदाताओं ने भाजपा के बजाय समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी पर भरोसा जताया।

उमेश द्विवेदी ने लगातार तीसरी बार दर्ज की जीत

दूसरी ओर, लखनऊ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी उमेश द्विवेदी ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर हैट्रिक लगाई। शिक्षक राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले उमेश द्विवेदी ने चुनाव में सपा प्रत्याशी सुशील कुमार को पीछे छोड़ दिया।

मतगणना के पहले चक्र से ही उमेश द्विवेदी ने बढ़त बना ली थी। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, उन्हें 7,189 मत मिले थे, जबकि समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी सुशील कुमार को 3,537 मत प्राप्त हुए थे। दोनों के बीच 3,652 मतों का अंतर था।

अंतिम परिणाम में उमेश द्विवेदी विजयी घोषित किए गए। सपा के सुशील कुमार दूसरे और सोहन लाल वर्मा तीसरे स्थान पर रहे। इस चुनाव में कुल 13 प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई थी।

लखनऊ के नतीजों ने दिया अलग-अलग राजनीतिक संदेश

लखनऊ की दोनों विधान परिषद सीटों के परिणामों में मतदाताओं का अलग-अलग रुख सामने आया। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी ने भाजपा को हराकर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की, जबकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा ने अपनी पुरानी पकड़ बरकरार रखी।

कांति सिंह की जीत को सपा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। वहीं, उमेश द्विवेदी की लगातार तीसरी जीत भाजपा के लिए शिक्षक मतदाताओं के बीच संगठनात्मक आधार और उनके व्यक्तिगत प्रभाव का संकेत देती है।

उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव के इन नतीजों से साफ है कि स्नातक और शिक्षक मतदाताओं के बीच राजनीतिक पसंद एक जैसी नहीं रही। एक सीट पर सपा ने जीत हासिल की तो दूसरी पर भाजपा ने अपना वर्चस्व कायम रखा।

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