US Midterm Election 2026 में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने माना कि ईरान युद्ध और तेल की बढ़ती कीमतों ने चुनावी नुकसान पहुंचाया। तेहरान में अमेरिकी नतीजों पर जश्न, ट्रंप ने डेमोक्रेट्स के साथ काम करने की इच्छा जताई।
वाशिंगटन। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के नतीजों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। चुनाव में करारी हार के बाद ट्रंप ने पहली बार खुलकर स्वीकार किया कि ईरान के साथ जारी युद्ध और पेट्रोल-गैस की बढ़ती कीमतों ने उनकी पार्टी के प्रदर्शन को प्रभावित किया। उन्होंने माना कि युद्ध के आर्थिक प्रभावों से अमेरिकी मतदाता नाराज थे और इसका खामियाजा रिपब्लिकन पार्टी को चुनाव में भुगतना पड़ा।
ट्रंप के मुताबिक, ईरान के साथ पिछले आठ महीने से जारी संघर्ष और उससे पैदा हुए आर्थिक दबाव ने आम अमेरिकी नागरिकों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। हालांकि, उन्होंने सैन्य कार्रवाई को गलत मानने से इनकार किया। राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई जरूरी थी और अमेरिका अपनी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर आगे भी सख्त कदम उठाता रहेगा।
चुनावी हार के बाद ट्रंप के तेवर पड़े नरम, डेमोक्रेट्स को साथ लेकर चलने की बात कही
चुनावी नतीजों के बाद ट्रंप के राजनीतिक रुख में कुछ नरमी देखने को मिली। उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी को जीत की बधाई दी और देश के हित में उसके नेताओं के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई। सीबीएस न्यूज को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि वह अमेरिका की भलाई के लिए डेमोक्रेट्स के साथ सहयोग करने की उम्मीद रखते हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए साक्षात्कार में भी उन्होंने चुनावी नतीजों को स्वीकार करने की बात कही। इसे चुनावी झटके के बाद विपक्ष के प्रति उनके रुख में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, यह नरमी ज्यादा समय तक कायम नहीं रही और ट्रंप जल्द ही अपने पुराने आक्रामक अंदाज में लौट आए।
उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी की हार के लिए खुद के चुनाव मैदान में नहीं होने को भी एक वजह बताया। साथ ही स्पष्ट किया कि डेमोक्रेट्स यदि ऐसे विधेयक लाते हैं, जिनसे वह सहमत नहीं होंगे, तो राष्ट्रपति के वीटो अधिकार का इस्तेमाल कर उन्हें रोक दिया जाएगा।
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को हटाने से ट्रंप का इनकार
ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी प्रशासन पर उठ रहे सवालों के बीच रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की भूमिका भी चर्चा में है। हालांकि, ट्रंप ने उन्हें पद से हटाए जाने की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया।
राष्ट्रपति ने हेगसेथ के काम की तारीफ करते हुए कहा कि वह बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। इससे साफ है कि चुनावी हार के बावजूद ट्रंप फिलहाल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा नीति की टीम में बड़े बदलाव के पक्ष में नहीं हैं।
दरअसल, ईरान के साथ लंबे समय से जारी सैन्य संघर्ष के कारण अमेरिकी प्रशासन को घरेलू स्तर पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। युद्ध पर बढ़ते खर्च और ऊर्जा की कीमतों में उछाल ने मतदाताओं के बीच सरकार की नीतियों को लेकर असंतोष पैदा किया है।
जेडी वेंस ने भी ईरान युद्ध को बताया हार की बड़ी वजह
रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी हार के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान युद्ध को प्रमुख कारणों में शामिल किया। उनका बयान इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि अब ट्रंप प्रशासन के भीतर भी चुनावी नुकसान के कारणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
चुनाव परिणामों से यह संकेत मिला है कि अमेरिकी मतदाताओं के लिए केवल विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा ही महत्वपूर्ण मुद्दे नहीं हैं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े आर्थिक सवाल भी उतने ही अहम हैं। महंगाई, पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी ने लोगों के घरेलू बजट पर दबाव डाला है।
ऐसे में ईरान युद्ध और आर्थिक संकट का असर अब सीधे अमेरिकी राजनीति पर दिखाई देने लगा है। रिपब्लिकन पार्टी के लिए आने वाले समय में इन मुद्दों पर जनता का भरोसा दोबारा हासिल करना बड़ी चुनौती होगी।
ट्रंप की चुनावी हार पर तेहरान में जश्न, हजारों लोग सड़कों पर उतरे
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों का असर केवल वाशिंगटन तक सीमित नहीं रहा। ईरान की राजधानी तेहरान में भी अमेरिकी चुनाव परिणामों को लेकर उत्साह देखने को मिला। रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद हजारों लोगों ने बुधवार को सड़कों पर मार्च निकाला और इसे ट्रंप की ईरान नीति के खिलाफ अमेरिकी जनता की प्रतिक्रिया बताया।
यह मार्च 1979 में अमेरिकी दूतावास पर कब्जे की घटना की याद में आयोजित कार्यक्रम से जुड़ा था। इस दौरान लोगों ने अमेरिकी चुनाव के नतीजों को भी अपने जश्न का हिस्सा बनाया।
ईरान में लोगों का कहना था कि अमेरिकी मतदाताओं ने चुनाव के जरिए ट्रंप की युद्ध नीति को नकार दिया है। वहां इस परिणाम को ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर जनता की नाराजगी के संकेत के रूप में पेश किया गया।
ईरान के सर्वोच्च नेता ने अमेरिका की नीति में बदलाव की उम्मीद को बताया गलतफहमी
अमेरिका में चुनावी नतीजों के बाद ईरान में जश्न के बीच वहां के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने एक पत्र जारी कर अमेरिका को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया।
उन्होंने कहा कि जो लोग यह सोचते हैं कि अमेरिका में राजनीतिक बदलाव होने से इस्लामिक गणराज्य के प्रति उसकी शत्रुता समाप्त हो सकती है, वे बड़ी गलतफहमी में हैं। उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि ईरान अमेरिकी राजनीति में बदलाव के बावजूद दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर ज्यादा उम्मीद नहीं रख रहा है।
वहीं, ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलीबॉफ ने अमेरिकी चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिकियों ने युद्ध को ना कहा है और ईरान इस संदेश का समर्थन करता है।
ईरान में वायरल हुआ ट्रंप पर तंज, टेक्सास चुनाव का भी किया जिक्र
अमेरिकी चुनाव परिणामों के बाद ईरान में राजनीतिक तंज और व्यंग्य भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने। ईरान की न्यायपालिका से जुड़े एक समाचार संस्थान ने एक्स पर वायरल हो रहे एक चुटकुले को साझा किया।
इसमें कहा गया कि ट्रंप ईरान में सत्ता परिवर्तन कराने में नाकाम रहे, लेकिन टेक्सास में ऐसा करने में सफल हो गए। यह टिप्पणी टेक्सास में सीनेट चुनाव के नतीजों को लेकर की गई थी। खबर के मुताबिक, वहां दशकों बाद पहली बार किसी डेमोक्रेट उम्मीदवार ने सीनेट का चुनाव जीता।
इस व्यंग्य के जरिए ईरान में ट्रंप की विदेश नीति और अमेरिकी घरेलू राजनीति के बीच तुलना की गई।
चुनावी नतीजों ने ट्रंप प्रशासन के सामने खड़ी की नई चुनौती
मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार ने ट्रंप प्रशासन के सामने कई राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरान युद्ध, ऊर्जा संकट और महंगाई जैसे मुद्दे अब अमेरिकी राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। ट्रंप ने भले ही सैन्य कार्रवाई को जरूरी बताया हो, लेकिन चुनावी नतीजों के बाद उन्हें यह स्वीकार करना पड़ा है कि युद्ध की आर्थिक कीमत मतदाताओं को प्रभावित कर रही है।
वहीं, विपक्षी डेमोक्रेट्स की जीत ने उन्हें सरकार की नीतियों को चुनौती देने का नया अवसर दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिकी संसद और राष्ट्रपति के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है। ट्रंप के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब युद्ध और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर जनता का विश्वास वापस हासिल करना होगा।
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