इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो जजों को बड़ी जिम्मेदारी, SC कॉलेजियम ने मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी को बॉम्बे हाईकोर्ट और न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की है।

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो वरिष्ठ न्यायमूर्तियों को बड़ी जिम्मेदारी मिलने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी को बॉम्बे हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की है। वहीं पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व वरिष्ठ न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा को इसी हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की संस्तुति की गई है।

कॉलेजियम की यह सिफारिश अब केंद्र सरकार के पास जाएगी। नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों न्यायमूर्तियों को संबंधित हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी मिल सकती है।

न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी का न्यायिक सफर

न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने वर्ष 1990 में लखनऊ विश्वविद्यालय से विधि की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने 11 जनवरी 1992 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया और इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत शुरू की।

वकालत के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता की जिम्मेदारी भी संभाली। न्यायिक क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए 27 सितंबर 2013 को उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया।

इसके करीब डेढ़ साल बाद 10 अप्रैल 2015 को न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी को इलाहाबाद हाईकोर्ट का स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। अब सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद के लिए सिफारिश की है।

अश्वनी कुमार मिश्रा का भी लंबा न्यायिक अनुभव

न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति रहे हैं। वह न्यायमूर्ति श्रीरंग मिश्र के पुत्र हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से अर्थशास्त्र में बीए ऑनर्स किया और इसके बाद कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री हासिल की।

उन्होंने 8 मई 1993 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया और इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। वर्ष 2013 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया गया। इसके बाद 3 फरवरी 2014 को उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया।

एक फरवरी 2016 को न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीश बने।

2025 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट हुआ तबादला

न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा का 21 जुलाई 2025 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में स्थानांतरण हुआ था। इसके बाद एक जून 2026 को उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।

अब सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उन्हें इसी हाईकोर्ट का नियमित मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की है। नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।

परिवार का भी न्यायिक क्षेत्र से जुड़ाव

न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा का परिवार भी कानून और न्यायिक क्षेत्र से जुड़ा रहा है। उनके भाई अजय कुमार मिश्र उत्तर प्रदेश के महाधिवक्ता हैं। उनके पिता न्यायमूर्ति श्रीरंग मिश्र भी न्यायिक पद पर रहे हैं।

इस तरह दोनों न्यायमूर्तियों के पास लंबे न्यायिक और कानूनी अनुभव के साथ-साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट में काम करने का व्यापक अनुभव है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद अब केंद्र सरकार की मंजूरी और आगे की नियुक्ति प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

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