चंपत राय के समर्थन में खुलकर उतरा संत समाज, बोले- ट्रस्ट उनका इस्तीफा स्वीकार न करे

राम मंदिर प्रकरण के बीच अयोध्या के संत समाज ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है। संतों ने ट्रस्ट से उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं करने की अपील की और मामले में पारदर्शी जांच की मांग दोहराई।

अयोध्या। राम मंदिर से जुड़े विवाद और उसके बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अयोध्या का संत समाज उनके समर्थन में खुलकर सामने आ गया है। संत मंडल ने शनिवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में ट्रस्ट से अपील की कि चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए और उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन जारी रखने का अवसर दिया जाना चाहिए।

संतों ने कहा कि वे लंबे समय से चंपत राय को जानते हैं और उनकी कार्यशैली, निष्ठा तथा ईमानदारी पर उन्हें पूरा विश्वास है। उनके अनुसार चंपत राय ने वर्षों तक राम मंदिर आंदोलन और उससे जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है तथा उनकी छवि एक समर्पित और अनुशासित कार्यकर्ता की रही है।

प्रेस वार्ता में संत समाज ने कहा कि चंपत राय के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप तथ्यहीन और निराधार हैं। उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त तथ्यों और जांच के किसी व्यक्ति की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है। संतों ने मीडिया और सार्वजनिक विमर्श में संयम बरतने की भी अपील की।

संत मंडल ने यह भी कहा कि पूरे प्रकरण की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने का अनुरोध स्वयं चंपत राय ने किया था। उनके अनुसार यह कदम उनकी पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। संतों ने सरकार द्वारा एसआईटी गठित किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि जांच से सभी तथ्य सामने आएंगे।

संतों ने कहा कि आरोपों और राजनीतिक बयानबाजी के बावजूद चंपत राय ने सार्वजनिक रूप से संयम बनाए रखा है और किसी प्रकार की प्रतिक्रिया देने से परहेज किया है। उन्होंने इसे उनकी गंभीरता और जिम्मेदारी का परिचायक बताया। संत समाज ने कहा कि अयोध्या के अधिकांश संत और धार्मिक संगठन उनके साथ खड़े हैं।

प्रेस वार्ता के दौरान संतों ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोष प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कुछ सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि मंदिर के कोष और चढ़ावे की सुरक्षा को लेकर क्या व्यवस्थाएं थीं और उनमें सुधार की आवश्यकता क्यों महसूस हुई।

इसके अलावा संतों ने ट्रस्ट की प्रस्तावित बैठकों और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने कुछ बैठकों की समय-सीमा और आयोजन को लेकर उठ रहे सवालों पर ट्रस्ट से स्पष्ट जवाब देने की मांग की।

संत समाज ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े प्रत्येक निर्णय में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वास बनाए रखना आवश्यक है। उनका मानना है कि निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।

राम मंदिर से जुड़े घटनाक्रमों के बीच संत समाज की यह खुली समर्थन घोषणा आने वाले दिनों में इस मुद्दे की धार्मिक और राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें एसआईटी जांच और ट्रस्ट के आगामी फैसलों पर टिकी हुई हैं।

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