“BSP Homecoming Campaign: 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा ने घर वापसी अभियान शुरू किया है। संतोष आनंद, विक्रम सिंह और डॉ. ज्ञान सिंह जैसे नेताओं की वापसी कराकर संगठन को मजबूत करने और आजाद समाज पार्टी की चुनौती से निपटने की तैयारी की जा रही है।“
आगरा। विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटी बहुजन समाज पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के लिए ‘घर वापसी’ अभियान शुरू कर दिया है। पार्टी से निष्कासित किए गए या अन्य दलों, विशेषकर आजाद समाज पार्टी में शामिल हुए नेताओं और कार्यकर्ताओं को दोबारा संगठन से जोड़ने की कवायद तेज कर दी गई है। इसके पीछे बसपा की रणनीति चुनाव से पहले अपने जनाधार को मजबूत करने के साथ-साथ आजाद समाज पार्टी की राजनीतिक सक्रियता को चुनौती देना माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय से बसपा पदाधिकारी उन नेताओं और कार्यकर्ताओं के संपर्क में हैं, जिन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। उन्हें संगठन में सम्मानजनक जिम्मेदारियां और राजनीतिक अवसरों का भरोसा देकर वापसी के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
संतोष आनंद की हुई वापसी
बसपा के पूर्व आगरा मंडल प्रभारी संतोष आनंद की पार्टी में वापसी को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में निष्कासित किया गया था। इसके बाद उन्होंने आजाद समाज पार्टी का दामन थाम लिया था और मध्य प्रदेश में सह प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब उनकी दोबारा बसपा में वापसी कराई गई है और उन्हें आगरा मंडल का प्रभारी बनाया गया है।
विक्रम सिंह और डॉ. ज्ञान सिंह को भी मिली जिम्मेदारी
बसपा ने संगठनात्मक पुनर्गठन के तहत अन्य नेताओं की भी वापसी कराई है। इसी वर्ष मार्च में निष्कासित किए गए पूर्व मंडल प्रभारी विक्रम सिंह को दोबारा पार्टी में शामिल कर अलीगढ़ और मेरठ मंडल का प्रभारी बनाया गया है। वहीं आगरा के पूर्व मंडल प्रभारी डॉ. ज्ञान सिंह ने भी पुनः पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है।
आजाद समाज पार्टी को चुनौती देने की तैयारी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आगरा मंडल में बसपा के पारंपरिक वोट बैंक पर आजाद समाज पार्टी की बढ़ती सक्रियता का प्रभाव दिखाई दे रहा है। ऐसे में बसपा उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को वापस जोड़ने का प्रयास कर रही है, जिनकी स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रही है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि बसपा सरकार के दौरान कार्यकर्ताओं और नेताओं को मिले राजनीतिक अवसरों का हवाला देकर उन्हें दोबारा संगठन में सक्रिय होने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके साथ ही सामाजिक भाईचारे और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
आगरा में रहा है बसपा का मजबूत आधार
आगरा मंडल कभी बसपा का मजबूत गढ़ माना जाता था। वर्ष 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने नौ में से छह-छह सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी का खाता नहीं खुल सका। इसके बावजूद कई सीटों पर बसपा दूसरे स्थान पर रही, जबकि समाजवादी पार्टी तीसरे स्थान पर रही।
ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए बसपा पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं को फिर से जोड़कर अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में जुटी हुई है।
कई और नेता संपर्क में
आगरा के मुख्य मंडल प्रभारी विमल वर्मा के अनुसार, पार्टी के पूर्व पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता भी पार्टी के संपर्क में हैं तथा आने वाले समय में और नेताओं की घर वापसी हो सकती है।
विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बसपा का यह अभियान प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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