“बेंगलुरु के NLSIU में CJI सूर्यकांत और BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को दीक्षांत समारोह में आमंत्रित करने का विरोध हुआ है। छात्रों और पूर्व छात्रों ने NALSAR विवाद के बाद खुला पत्र जारी कर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए।“
बेंगलुरु। हैदराबाद के NALSAR के बाद अब बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) में भी भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को दीक्षांत समारोह में आमंत्रित किए जाने का विरोध सामने आया है। विश्वविद्यालय के छात्रों और पूर्व छात्रों ने दोनों के निमंत्रण को लेकर आपत्ति जताते हुए एक खुला पत्र जारी किया है।
शनिवार को जारी इस पत्र पर 165 ग्रेजुएटिंग छात्रों, 409 वर्तमान छात्रों और 128 पूर्व छात्रों ने हस्ताक्षर किए हैं। इसमें NALSAR हैदराबाद के छात्रों के साथ बिना शर्त एकजुटता जताई गई है। साथ ही BCI अध्यक्ष के हालिया आचरण की आलोचना करते हुए NLSIU के दीक्षांत समारोह में CJI की प्रस्तावित भागीदारी पर भी सवाल उठाए गए हैं।
NALSAR विवाद के बाद सामने आया विरोध
NLSIU में यह विरोध NALSAR हैदराबाद में हुए हालिया विवाद के बाद सामने आया है। NALSAR के कुछ छात्रों ने अपने दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किए जाने का विरोध किया था। छात्रों की आपत्ति के बाद विवाद बढ़ गया था।
इसके बाद BCI ने 13 अगस्त को राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि NALSAR के 2026 बैच के स्नातकों को वकील के तौर पर नामांकित न किया जाए। हालांकि, कुछ घंटे बाद ही यह आदेश वापस ले लिया गया। BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने बाद में छात्रों से माफी भी मांगी थी।
NLSIU के छात्रों ने जताई NALSAR के साथ एकजुटता
NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों ने अपने बयान में कहा कि वे NALSAR के उन छात्रों के साथ खड़े हैं, जिन्होंने सत्ता के सामने अपनी बात रखने का साहस दिखाया। उनके मुताबिक, छात्रों की असहमति को दबाने के बजाय संस्थानों को उसे सुनना चाहिए।
खुले पत्र में BCI से NALSAR के छात्रों और फैकल्टी समुदाय से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की गई है। छात्रों ने आरोप लगाया कि NALSAR के मामले में उठाया गया कदम छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को प्रभावित करने वाला था।
सिर्फ दीक्षांत समारोह का मामला नहीं
NLSIU के छात्रों का कहना है कि विवाद का मुद्दा केवल यह नहीं है कि दीक्षांत समारोह में कौन मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होता है। उनके अनुसार, बड़ा सवाल यह है कि देश के प्रमुख लॉ स्कूलों के छात्र शक्तिशाली संस्थाओं और सार्वजनिक अधिकारियों के फैसलों से असहमति जताने पर अपने पेशेवर भविष्य को लेकर भयभीत न हों।
छात्रों ने कहा कि कानून की पढ़ाई करने वाले संस्थानों में लोकतांत्रिक मूल्यों, स्वतंत्र विचार और असहमति की संस्कृति को मजबूत किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, छात्रों को अपनी राय व्यक्त करने के कारण किसी तरह के पेशेवर प्रतिशोध का डर नहीं होना चाहिए।
BCI के रुख पर भी उठे सवाल
NALSAR मामले में BCI की ओर से जारी किए गए आदेश और कुछ ही घंटों बाद उसे वापस लिए जाने को लेकर भी छात्रों में नाराजगी है। NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों ने BCI अध्यक्ष के हालिया रुख की आलोचना करते हुए संस्थागत जवाबदेही और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है।
छात्रों का कहना है कि बार काउंसिल जैसी पेशेवर संस्था से यह अपेक्षा की जाती है कि वह कानून के छात्रों और युवा वकीलों के अधिकारों की रक्षा करे। ऐसे में छात्रों की असहमति के जवाब में पेशेवर भविष्य को प्रभावित करने वाले कदम उठाने से गलत संदेश जाता है।
लॉ स्कूलों में बढ़ रही बहस
NALSAR के बाद NLSIU में भी सामने आए विरोध ने देश के प्रमुख लॉ स्कूलों में छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थागत असहमति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ छात्र समुदाय अपने अधिकारों और स्वतंत्र विचार की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रमुख न्यायिक और पेशेवर संस्थाओं की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब निगाह इस बात पर है कि NLSIU प्रशासन छात्रों और पूर्व छात्रों की आपत्तियों पर क्या रुख अपनाता है और आगामी दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत तथा BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की प्रस्तावित भागीदारी को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।









