“देवरिया के अभिषेक निषाद का शव 35 दिन बाद यूक्रेन से उनके पैतृक गांव करमेल पहुंचा। 19 जुलाई को ओडेसा बंदरगाह के पास रूसी मिसाइल हमले में 22 वर्षीय अभिषेक की मौत हो गई थी।“
देवरिया। यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के निकट रूसी मिसाइल हमले में जान गंवाने वाले देवरिया के अभिषेक निषाद का शव 35 दिन बाद सोमवार को उनके पैतृक गांव करमेल पहुंचा। शव के गांव पहुंचते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण घर के बाहर जुट गए।
गौरीबाजार थाना क्षेत्र के करमेल गांव निवासी 22 वर्षीय अभिषेक निषाद मालवाहक जहाज गोल्डन लियो पर क्रू सदस्य के रूप में काम करते थे। परिजनों के मुताबिक, वह रोजी-रोटी के सिलसिले में जहाज पर नौकरी कर रहे थे।
दिल्ली से रिश्तेदार शव लेकर पहुंचे गांव
अभिषेक का शव यूक्रेन से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लाया गया था। इसके बाद उनके रिश्तेदार शव लेकर सोमवार सुबह देवरिया स्थित पैतृक गांव पहुंचे।
शव के घर पहुंचने की सूचना मिलते ही गांव में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। किसी को यकीन नहीं हो रहा कि जिस बेटे के सुरक्षित लौटने की उम्मीद परिवार लगाए बैठा था, उसका शव घर पहुंचा है।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने गांव में सुरक्षा के इंतजाम किए हैं। एसडीएम राज कुमार गुप्ता, क्षेत्राधिकारी सत्येंद्र कुमार राय समेत बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा।
19 जुलाई को मिसाइल हमले में हुई थी मौत
अभिषेक की 19 जुलाई को यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के निकट जहाज पर हुए रूसी मिसाइल हमले में मौत हो गई थी। हमले के बाद से ही परिजन उनके शव को भारत लाने की मांग कर रहे थे।
शव की वापसी में करीब 35 दिन लग गए। इस दौरान परिवार लगातार अभिषेक के शव के भारत आने का इंतजार कर रहा था। सोमवार को जब शव गांव पहुंचा तो इंतजार का यह लंबा दौर बेहद दर्दनाक तरीके से खत्म हुआ।
10 जुलाई को वाराणसी से मुंबई पहुंचे थे अभिषेक
परिजनों के अनुसार, अभिषेक 10 जुलाई को वाराणसी पहुंचे थे। इसके बाद वह तुर्किए होते हुए 11 जुलाई को मालवाहक जहाज गोल्डन लियो पर सवार हुए थे।
जहाज पर उनकी जिम्मेदारी क्रू सदस्य के तौर पर थी। जहाज मक्का के लिए माल लेकर जा रहा था। नौकरी के सिलसिले में घर से निकले अभिषेक को परिवार ने शायद ही सोचा होगा कि कुछ ही दिनों बाद उनकी मौत की खबर आएगी।
बेटे की मौत से परिवार में पसरा मातम
अभिषेक की मौत की खबर के बाद से ही परिवार सदमे में था। परिजन लगातार उनके शव के भारत आने की प्रतीक्षा कर रहे थे। सोमवार को शव घर पहुंचा तो परिवार का दुख और गहरा हो गया।
गांव में भी मातम का माहौल है। बड़ी संख्या में ग्रामीण अभिषेक के घर पहुंचकर परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं। प्रशासन की मौजूदगी में अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं।
समुद्र में नौकरी का सपना अधूरा रह गया
22 वर्षीय अभिषेक ने बेहतर रोजगार की उम्मीद में मालवाहक जहाज पर क्रू सदस्य के तौर पर नौकरी शुरू की थी। परिवार को उम्मीद थी कि वह नौकरी कर अपने भविष्य और परिवार को बेहतर स्थिति में ले जाएंगे, लेकिन यूक्रेन के पास हुए मिसाइल हमले ने उनकी जिंदगी छीन ली।
करीब 35 दिन बाद जब उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो परिवार की उम्मीदें हमेशा के लिए मातम में बदल गईं।
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