मुख्यमंत्री बनने के बाद भी डीके शिवकुमार की मुश्किलें कम नहीं, मंत्रालय बंटवारे पर फिर बवाल; एक और मंत्री दिल्ली पहुंचे

मंत्रालय आवंटन से असंतोष बढ़ा, कांग्रेस आलाकमान तक पहुंची शिकायतें; कई कैबिनेट पद अब भी खाली

डीके शिवकुमार मंत्रालय विवाद गहराता जा रहा है। कर्नाटक में मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा और केएच मुनियप्पा समेत कई नेता विभाग बंटवारे से नाराज हैं और शिकायत लेकर दिल्ली पहुंचे हैं। 21 कैबिनेट पद खाली होने से कांग्रेस सरकार में असंतोष बढ़ गया है।

नई दिल्ली/बेंगलुरु। कर्नाटक में मुख्यमंत्री बनने के बाद डी.के. शिवकुमार के सामने राजनीतिक चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर उनकी कैबिनेट के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। एक और मंत्री ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात के लिए दिल्ली का रुख किया है।

सूत्रों के अनुसार, मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा को बेंगलुरु विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन वे अब तक अपना पदभार संभाल नहीं पाए हैं। बताया जा रहा है कि विभागीय संरचना को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं।

विभागों के बंटवारे पर टकराव की स्थिति

जानकारी के मुताबिक, विवाद इस बात को लेकर है कि कृष्णा बायरे गौड़ा को ग्रेटर बेंगलुरु डेवलपमेंट विभाग तो दिया गया है, लेकिन बेंगलुरु डेवलपमेंट अथॉरिटी (BDA) और बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (BMRDA) जैसे अहम विभाग मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अपने पास रखे हैं।

इसी असंतुलन को लेकर नाराजगी बढ़ी है और मंत्री ने दिल्ली जाकर पार्टी नेतृत्व से हस्तक्षेप की मांग की है।

पहले भी सामने आ चुका है असंतोष

यह पहला मामला नहीं है जब मंत्रालय बंटवारे पर विवाद हुआ हो। इससे पहले वरिष्ठ नेता रामलिंगा रेड्डी ने भी विभाग आवंटन से असंतोष जताया था। उन्होंने शपथ लेने के कुछ दिनों बाद इस्तीफा देने की बात कही थी, हालांकि बाद में उन्हें मनाकर स्थिति संभाली गई।

सूत्र बताते हैं कि यह वही विभाग है जिसे लेकर पहले भी विवाद खड़ा हुआ था।

दिल्ली पहुंचे कई विधायक और मंत्री

कृष्णा बायरे गौड़ा के अलावा विधायक रिजवान अरशद भी दिल्ली पहुंचे हैं। वे मुख्यमंत्री शिवकुमार के करीबी माने जाते हैं और माना जा रहा है कि वे कैबिनेट में किसी महत्वपूर्ण विभाग की मांग कर रहे हैं।

इसके साथ ही वरिष्ठ मंत्री के.एच. मुनियप्पा भी अपने विभाग से संतुष्ट नहीं बताए जा रहे हैं। उन्हें खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग दिया गया है, लेकिन उनका मानना है कि वरिष्ठता के आधार पर उन्हें अधिक अहम जिम्मेदारी मिलनी चाहिए थी।

21 कैबिनेट पद अभी भी खाली, बढ़ सकता है असंतोष

सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक मंत्रिमंडल में अभी भी 21 पद खाली हैं, जिससे आगे और राजनीतिक खींचतान की संभावना बनी हुई है। पार्टी के भीतर संतुलन साधना मुख्यमंत्री शिवकुमार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

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