“एटा के डीएम अरविंद सिंह ने भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई करते हुए जलेसर तहसील के चकबंदी लेखपाल हरिओम सिंह को निलंबित कर दिया। जमीन पैमाइश के नाम पर रिश्वत मांगने का ऑडियो वायरल हुआ था।“
एटा। जनपद में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली की शिकायतों पर जिलाधिकारी अरविंद सिंह ने सख्त रुख अपनाया है। जलेसर तहसील क्षेत्र में तैनात चकबंदी लेखपाल हरिओम सिंह को जमीन की पैमाइश के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
लेखपाल से जुड़ा कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और मामले की तत्काल जांच कराई गई।
ऑडियो वायरल होते ही त्वरित जांच
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार गुरुवार को मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में आया। वायरल ऑडियो में जमीन की पैमाइश के बदले धनराशि मांगने की बात सामने आई।
डीएम के निर्देश पर प्रारंभिक जांच कराई गई, जिसमें आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ने हरिओम सिंह को निलंबित करते हुए मुख्यालय से संबद्ध कर दिया।
विभागीय जांच भी शुरू
मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कठोर कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन यह भी पता लगा रहा है कि लेखपाल के खिलाफ पहले भी कोई शिकायतें थीं या नहीं।
माल बाबू पर भी गिरी गाज
इसी क्रम में जलेसर क्षेत्र में तैनात एक माल बाबू का भी कथित ऑडियो सामने आया है। प्रथम जांच के बाद उसका पटल परिवर्तन कर दिया गया है और पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है।
प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
डीएम ने दी दो टूक चेतावनी
जिलाधिकारी अरविंद सिंह ने स्पष्ट कहा है कि जिले में किसी भी तरह का भ्रष्टाचार, अवैध वसूली या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
जनता में कार्रवाई से संतोष
स्थानीय लोगों का कहना है कि राजस्व और चकबंदी विभागों में लंबे समय से लेन-देन की शिकायतें आती रही हैं। ऐसे में त्वरित कार्रवाई से आम जनता में संतोष है और प्रशासन की सख्ती का संदेश गया है।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का संकेत
एटा प्रशासन की इस कार्रवाई को जिले में जीरो टॉलरेंस नीति का संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में अन्य विभागों में भी ऐसे मामलों पर निगरानी और कार्रवाई तेज होने की संभावना है।
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