फर्रुखाबाद में 4 कोल्ड स्टोरेज पर FIR, 1200 किसानों का आलू फंसा; बढ़ी अन्नदाताओं की चिंता

फर्रुखाबाद में फायर सेफ्टी और लाइसेंस संबंधी नियमों के उल्लंघन पर चार कोल्ड स्टोरेज के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इन शीत गृहों में करीब 1200 किसानों का आलू भंडारित है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।

फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश में आलू उत्पादन के प्रमुख जिलों में शामिल फर्रुखाबाद में चार कोल्ड स्टोरेज संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद सैकड़ों किसानों की चिंता बढ़ गई है। इन शीतगृहों में लगभग 1200 किसानों का आलू भंडारित है और अब किसानों के सामने अपने उत्पाद की सुरक्षा और निकासी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

जिला प्रशासन की कार्रवाई उन कोल्ड स्टोरेजों के खिलाफ की गई है, जिन्होंने फायर सेफ्टी, भवन सुरक्षा और अन्य आवश्यक मानकों से जुड़े दस्तावेज निर्धारित समय में उपलब्ध नहीं कराए।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी पड़ी भारी

जिला उद्यान विभाग के अनुसार संबंधित शीतगृह संचालकों ने लाइसेंस नवीनीकरण के लिए जरूरी दस्तावेज जमा नहीं किए। इनमें अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी), भवन सुदृढ़ता प्रमाण पत्र, बीमा दस्तावेज, मशीनरी से जुड़े अभिलेख और राष्ट्रीय भवन संहिता-2005 के अनुरूप प्रमाण पत्र शामिल थे।

बार-बार नोटिस और चेतावनी के बावजूद आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, जिसके बाद प्रशासन ने कानूनी कार्रवाई का निर्णय लिया।

चार कोल्ड स्टोरेजों पर दर्ज हुई एफआईआर

कार्रवाई की जद में आए शीतगृहों में जीके कोल्ड स्टोरेज, अयूब कोल्ड स्टोरेज, हामिद कोल्ड स्टोरेज और जय श्रीकृष्णा रेफ्रिजरेशन शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि इन संस्थानों को कई बार नोटिस जारी कर कमियां दूर करने का अवसर दिया गया था।

इसके बावजूद निर्धारित मानकों का अनुपालन नहीं किया गया, जिसके चलते संबंधित थानों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

113 कोल्ड स्टोरेजों की हो रही समीक्षा

जिला उद्यान अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में कुल 113 कोल्ड स्टोरेज संचालित हैं, जिनमें बड़ी मात्रा में किसानों का आलू और अन्य कृषि उत्पाद भंडारित किया जाता है।

उन्होंने बताया कि सभी शीतगृहों की व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है और सभी संचालकों को फायर सेफ्टी और भवन सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

1200 किसानों की बढ़ी चिंता

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार एक कोल्ड स्टोरेज में औसतन 300 से 350 किसानों का आलू भंडारित होता है। ऐसे में चार शीतगृहों पर कार्रवाई का सीधा असर करीब 1200 किसानों पर पड़ सकता है।

हालांकि प्रशासन का कहना है कि फिलहाल किसानों को आलू की निकासी में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी और भंडारित फसल पूरी तरह सुरक्षित है।

किसानों ने मांगी पारदर्शी व्यवस्था

स्थानीय किसान अजय मिश्रा का कहना है कि किसानों को अक्सर यह जानकारी नहीं मिल पाती कि जिस कोल्ड स्टोरेज में वे अपनी उपज रख रहे हैं, उसके पास सभी वैधानिक अनुमति और प्रमाण पत्र हैं या नहीं।

उन्होंने मांग की कि विभाग को समय-समय पर ऐसे शीतगृहों की सूची सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि किसान सुरक्षित और मान्यता प्राप्त कोल्ड स्टोरेज का चयन कर सकें।

कानून के उल्लंघन पर हुई कार्रवाई

जिला प्रशासन के अनुसार संबंधित शीतगृह संचालकों पर उत्तर प्रदेश कोल्ड स्टोरेज विनियमन अधिनियम-1976 की धारा 37 के उल्लंघन का आरोप है। जिलाधिकारी के निर्देश पर पुलिस ने एक जुलाई को संबंधित मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

किसानों के हितों को प्राथमिकता देने का दावा

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई का उद्देश्य किसानों को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि उनके कृषि उत्पादों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अधिकारियों का कहना है कि जिन शीतगृहों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता, वहां आग, भवन क्षति या तकनीकी खराबी की स्थिति में किसानों की फसल और निवेश दोनों जोखिम में पड़ सकते हैं।

ऐसे में नियमों का पालन सुनिश्चित करना किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हित में आवश्यक है।

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