“अलीगंज अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माण पर रोक लगाने के लिए सेटेलाइट इमेज और AI आधारित जियो पोर्टल तैयार किया जा रहा है। नई व्यवस्था से बिना नक्शे के निर्माण और अतिरिक्त मंजिल की पहचान कर विकास प्राधिकरणों को अलर्ट किया जाएगा।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब अवैध निर्माण पर नजर रखने के लिए पारंपरिक निगरानी व्यवस्था के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। अलीगंज अग्निकांड के बाद शासन ने अवैध निर्माणों पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सेटेलाइट इमेज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित जियो पोर्टल विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है।
इस नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के विकास प्राधिकरणों के क्षेत्रों में होने वाले निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी की जाएगी। सेटेलाइट से समय-समय पर ली गई तस्वीरों को पुराने रिकॉर्ड से मिलाकर यह पता लगाया जाएगा कि किसी भूखंड पर नया निर्माण, अतिरिक्त मंजिल या नक्शे से अलग कोई निर्माण तो नहीं किया गया है।
AI बताएगा कहां हुआ निर्माण में बदलाव
नई तकनीकी व्यवस्था में सेटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं रहेगा। AI आधारित सिस्टम अलग-अलग समय पर ली गई तस्वीरों का विश्लेषण कर निर्माण गतिविधियों में हुए बदलाव को चिह्नित करेगा।
यदि किसी क्षेत्र में पहले खाली जमीन थी और बाद की तस्वीर में वहां निर्माण दिखाई देता है, तो सिस्टम उस बदलाव को पकड़ सकेगा। इसी तरह किसी मौजूदा इमारत में अतिरिक्त मंजिल या विस्तार होने पर भी उसे चिन्हित करने की व्यवस्था की जाएगी।
इससे विकास प्राधिकरणों को ऐसे निर्माणों की जानकारी प्रारंभिक स्तर पर ही मिल सकेगी और मौके पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी।
तैयार किया जा रहा है जियो पोर्टल
उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के निर्देशन में इस योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। जियो पोर्टल तैयार करने के लिए तकनीकी स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। परिषद के अपर आवास आयुक्त एवं सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति इस संबंध में बैठक करेगी।
बैठक में पोर्टल विकसित करने वाली संस्था के चयन और तकनीकी पहलुओं पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। समिति में विभिन्न विकास प्राधिकरणों के साथ नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग तथा राज्य सूचना विज्ञान केंद्र के अधिकारी भी शामिल हैं।
निविदा प्रक्रिया के दौरान सामने आई तकनीकी आपत्तियों और प्राप्त सुझावों पर भी समिति विचार करेगी।
हर शहर की नियमित सेटेलाइट तस्वीरों से होगी निगरानी
नई व्यवस्था लागू होने के बाद विभिन्न शहरों और विकास प्राधिकरणों के क्षेत्रों की नियमित सेटेलाइट तस्वीरें ली जाएंगी। इन तस्वीरों को पुराने रिकॉर्ड और पहले उपलब्ध आंकड़ों से मिलाया जाएगा।
इस तुलना से यह पता लगाया जा सकेगा कि किसी क्षेत्र में निर्माण की गतिविधि कब और किस तरह बदली है। इससे विकास प्राधिकरणों को उन स्थानों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जहां नियमों का उल्लंघन कर निर्माण किए जाने की आशंका है।
संदिग्ध निर्माण की सूचना प्राधिकरण को मिलेगी
शासन की ओर से ऐसा डिटेक्शन सिस्टम विकसित कराया जा रहा है, जो तस्वीरों के विश्लेषण के बाद संदिग्ध निर्माण गतिविधियों की पहचान करेगा। जैसे ही किसी क्षेत्र में असामान्य निर्माण गतिविधि सामने आएगी, संबंधित विकास प्राधिकरण को इसकी सूचना भेजी जाएगी।
इसके बाद अधिकारी मौके पर जाकर निर्माण की वास्तविक स्थिति की जांच कर सकेंगे। यदि निर्माण स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप नहीं पाया गया या आवश्यक अनुमति के बिना निर्माण किया गया है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी।
अलीगंज अग्निकांड के बाद तेज हुई कवायद
अवैध निर्माण की निगरानी के लिए तकनीक का सहारा लेने का फैसला अलीगंज अग्निकांड के बाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हादसे के बाद अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया था।
इसके बाद शासन की ओर से यह संकेत दिया गया था कि अवैध निर्माण के खिलाफ केवल कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। ऐसे निर्माणों की पहचान शुरुआती चरण में ही करने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है।
इसी दिशा में अब सेटेलाइट इमेज और AI आधारित प्रणाली को शामिल करने की तैयारी की जा रही है।
विकास प्राधिकरणों की निगरानी क्षमता बढ़ेगी
नई व्यवस्था लागू होने से विकास प्राधिकरणों के अधिकारियों को शहरों में होने वाले निर्माण की निगरानी के लिए हर स्थान पर भौतिक निरीक्षण पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। तकनीक के माध्यम से संदिग्ध क्षेत्रों की पहले पहचान की जा सकेगी और इसके बाद अधिकारियों की टीम मौके पर जांच कर सकेगी।
इससे समय की बचत के साथ अवैध निर्माण पर कार्रवाई की प्रक्रिया भी तेज होने की उम्मीद है। साथ ही निगरानी व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनाने और मानवीय स्तर पर होने वाली लापरवाही या भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
अवैध निर्माण पर समय रहते लगेगा अंकुश
शासन का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे अवैध निर्माण पूरा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय निर्माण के शुरुआती चरण में ही उसकी पहचान हो सके। AI आधारित डिटेक्शन सिस्टम और सेटेलाइट तस्वीरों के जरिए लगातार निगरानी से विकास प्राधिकरणों को समय रहते कार्रवाई का मौका मिलेगा।
हालांकि, अंतिम रूप से किसी निर्माण को अवैध घोषित करने और कार्रवाई करने से पहले संबंधित प्राधिकरण को मौके पर सत्यापन और लागू नियमों के आधार पर निर्णय लेना होगा।
नई तकनीकी व्यवस्था लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश के शहरों में अवैध निर्माण की निगरानी का तरीका बदलने की उम्मीद है। अलीगंज अग्निकांड के बाद उठाया गया यह कदम भविष्य में ऐसे निर्माणों पर शुरुआती स्तर पर ही शिकंजा कसने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।








